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कस्तूरबा विद्यालयों की 26 शिक्षिकाओं पर बर्खास्तगी की तलवार
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कस्तूरबा विद्यालयों की 26 शिक्षिकाओं पर बर्खास्तगी की तलवार
13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में तैनात 26 शिक्षिकाओं की संविदा होगी समाप्त
जांच में 15 के प्रमाण पत्र फर्जी, 11 की योग्यता न होने के बावजूद नौकरी पाने की पुष्टि
राजीव यादव
देवरिया। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में तैनात 26 शिक्षिकाओं की संविदा समाप्त कर बर्खास्त करने की रूपरेखा तैयार हो गई है। उच्चाधिकारियों का आदेश आते ही इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी। शासन की ओर से गठित विशेष सात सदस्यीय समिति ने अपनी जांच में यहां पर सबसे अधिक फर्जीवाड़ा किए जाने की शिकायत को सही पाया है।
जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहीं शिक्षिकाओं की कुंडली शासन की ओर से तैयार कर ली गई है। इनके शैक्षिक अभिलेख, आधार, पैनकार्ड, निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिले में 13 कस्तूरबा विद्यालयों में कार्यरत 15 शिक्षिकाएं ऐसी हैं जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी हासिल की है। साथ ही 11 ऐसी हैं जो निर्धारित पात्रता ही नहीं रखती हैं। बावजूद इसके इन्होंने यहां पूर्व के वर्षों में तैनात रहे बीएसए और जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की मिलीभगत से नौकरी हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली। अब यहां के शिक्षणेतर कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में भी बड़ा खेल किए जाने के पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कई कर्मचारियों के रिश्तेदारों पर भी कार्रवाई संभव
बेसिक कार्यालय के कई कर्मचारियों के रिश्तेदार भी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में कार्यरत हैं। अपनी पहुंच और अधिकारियों से सेटिंग कर इन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे इनकी तैनाती कराई है। पिछले 10 वर्षों के दौरान जिले में तैनात रहे बीएसए ने इन कर्मचारियों पर खूब मेहरबानी की है। एक शिक्षिका ने तो साढ़े 12 साल की उम्र में ही हाईस्कूल पास कर लिया है। जबकि उस समय हाईस्कूल में आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष आवश्यक थी।
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एक वार्डेन की सिफारिश पहुंची पूर्व बीएसए के पास
एक कस्तूरबा विद्यालय की वार्डेन नौकरी पर संकट आते देखकर सिफारिश लेकर 10 दिन पहले यहां वर्ष 2014 से 2016 तक रहे पूर्व बीएसए के पास पहुंची थी। सरकार के रुख और तेजी से बदलते घटनाक्रम व जांच में तेजी को देखते हुए इस वार्डेन को बैरंग लौटना पड़ा।
कोट:
यहां के हर कस्तूरबा विद्यालयों की शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच कर दस्तावेज लखनऊ भेजे गए थे। जिले का नाम इसलिए अधिक उछाला जा रहा है कि अन्य जनपदों में इस तरह से जांच नहीं की गई है। यहां की संदिग्ध शिक्षिकाओं की सूची अभी बढ़ सकती है। जो नियुक्तियां हुईं हैं वे उनके पूर्व अधिकारियों ने की है। शासन से निर्देश के बाद फर्जी शिक्षिकाओं पर कार्रवाई शुरू होगी।
-प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, बीएसए
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13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में तैनात 26 शिक्षिकाओं की संविदा होगी समाप्त
जांच में 15 के प्रमाण पत्र फर्जी, 11 की योग्यता न होने के बावजूद नौकरी पाने की पुष्टि
राजीव यादव
देवरिया। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में तैनात 26 शिक्षिकाओं की संविदा समाप्त कर बर्खास्त करने की रूपरेखा तैयार हो गई है। उच्चाधिकारियों का आदेश आते ही इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी। शासन की ओर से गठित विशेष सात सदस्यीय समिति ने अपनी जांच में यहां पर सबसे अधिक फर्जीवाड़ा किए जाने की शिकायत को सही पाया है।
जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहीं शिक्षिकाओं की कुंडली शासन की ओर से तैयार कर ली गई है। इनके शैक्षिक अभिलेख, आधार, पैनकार्ड, निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिले में 13 कस्तूरबा विद्यालयों में कार्यरत 15 शिक्षिकाएं ऐसी हैं जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी हासिल की है। साथ ही 11 ऐसी हैं जो निर्धारित पात्रता ही नहीं रखती हैं। बावजूद इसके इन्होंने यहां पूर्व के वर्षों में तैनात रहे बीएसए और जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की मिलीभगत से नौकरी हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली। अब यहां के शिक्षणेतर कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में भी बड़ा खेल किए जाने के पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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कई कर्मचारियों के रिश्तेदारों पर भी कार्रवाई संभव
बेसिक कार्यालय के कई कर्मचारियों के रिश्तेदार भी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में कार्यरत हैं। अपनी पहुंच और अधिकारियों से सेटिंग कर इन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे इनकी तैनाती कराई है। पिछले 10 वर्षों के दौरान जिले में तैनात रहे बीएसए ने इन कर्मचारियों पर खूब मेहरबानी की है। एक शिक्षिका ने तो साढ़े 12 साल की उम्र में ही हाईस्कूल पास कर लिया है। जबकि उस समय हाईस्कूल में आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष आवश्यक थी।
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एक वार्डेन की सिफारिश पहुंची पूर्व बीएसए के पास
एक कस्तूरबा विद्यालय की वार्डेन नौकरी पर संकट आते देखकर सिफारिश लेकर 10 दिन पहले यहां वर्ष 2014 से 2016 तक रहे पूर्व बीएसए के पास पहुंची थी। सरकार के रुख और तेजी से बदलते घटनाक्रम व जांच में तेजी को देखते हुए इस वार्डेन को बैरंग लौटना पड़ा।
कोट:
यहां के हर कस्तूरबा विद्यालयों की शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच कर दस्तावेज लखनऊ भेजे गए थे। जिले का नाम इसलिए अधिक उछाला जा रहा है कि अन्य जनपदों में इस तरह से जांच नहीं की गई है। यहां की संदिग्ध शिक्षिकाओं की सूची अभी बढ़ सकती है। जो नियुक्तियां हुईं हैं वे उनके पूर्व अधिकारियों ने की है। शासन से निर्देश के बाद फर्जी शिक्षिकाओं पर कार्रवाई शुरू होगी।
-प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, बीएसए