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सिर्फ नाम की हाईटेक है जिले की पुलिस
देवरिया
Updated Tue, 27 Sep 2016 11:07 PM IST
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पुलिस के वाहनों में लगा डैस कैमरा।
- फोटो : अमर उजाला
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सुधीर श्रीवास्तव/रवि राय
देवरिया। पुलिसिंग को स्मार्ट बनाने की जीतोड़ कोशिश की जा रही है। शासन पानी की तरह पैसा बहा रहा है। मैनुअल मुखबिरी कमजोर पड़ने के बाद महकमे ने सीसीटीवी कैमरे से शहर को लैस किया ताकि घटना होने पर फुटेज का इस्तेमाल किया जा सके। थानेदारों पर नजर रखने के लिए उनकी गाड़ियों में जीपीएस (ग्लोबल सिस्टम प्रणाली) लगाई गई।
यही नहीं, दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे खराब हैं। ऐसे में कैसे हो पाएगी देवरिया पुलिस स्मार्ट। बिहार से सटा होने के कारण जिला संवेदनशील है। महिला थाना समेत कुल 19 थाने हैं। शासन पेपर लेस एफआईआर हो या फिर अत्याधुनिक उपकरण, शासन सब कुछ उपलब्ध करा रहा है ताकि बदलाव के दौर में पुलिसकर्मी पीछे न रहें लेकिन पुलिस पुराने सिस्टम में ही मशगूल हैं।
अब इसे पुलिसकर्मियों की लापरवाही समझें या फिर आधुनिक सिस्टम से पकड़े जाने का भय, लाखों की लागत से खरीदे गए उपकरण कुछ दिनों में खराब हो जाते हैं। पुलिस महकमे में पहला बदलाव 2013 में तत्कालीन एसपी उमेश श्रीवास्तव ने किया। उनकी पहल पर बेहतर गुणवत्ता के 21 सीसीटीवी कैमरे मुख्य चौराहों पर लगाए गए। सीसीटीवी कुछ दिनों बाद बंद हो गए। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कोतवाली से होनी थी, अप्रशिक्षित पुलिसकर्मी, बिजली कटौती और अन्य समस्याएं दर्शा कर निगरानी कक्ष की ड्यूटी ही खत्म कर दी गई।
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बाद में एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने शासन के निर्देश पर थानेदारों के अलावा विभाग की गाड़ियों में जीपीएस लगवाए ताकि थानेदारों के रात्रि भ्रमण, सूचना के बाद पुलिस के मौके पर पहुंचने की टाइमिंग का पता लगाया जा सके। बॉर्डर क्षेत्र एकौना, खामपार, बनकटा, लार, भाटपाररानी, बरहज, मईल आदि थानों के नेटवर्किंग समस्या होने से जीपीएस लगते ही ध्वस्त हो गए। यही नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक डायल 100 का भी दयनीय हाल है। फाल्स कॉल कंट्रोल रूम में बजती है तो पीड़ितों को लगता है पुलिस फोन नहीं उठा रही है।
तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी ने कंट्रोल रूम की चार लाइनों को दुरुस्त कराया, लेकिन फिर स्थिति जस की तस है। कुछ दिनों पहले जिले के दौरे पर आए आईजी मोहित अग्रवाल ने भी कंट्रोल रूम का जायजा लिया था। वहां तैनात पुलिसकर्मियों से नई तकनीक के बारे में पूछताछ की थी, तो वे बगले झांकने लगे थे। इस बाबत एसपी मोहम्मद इमरान ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे या अन्य उपकरणों की खामियों को लेकर चिंतित हूं। त्योहार से पहले उनको दुरुस्त करा लिया जाएगा।
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देवरिया। पुलिसिंग को स्मार्ट बनाने की जीतोड़ कोशिश की जा रही है। शासन पानी की तरह पैसा बहा रहा है। मैनुअल मुखबिरी कमजोर पड़ने के बाद महकमे ने सीसीटीवी कैमरे से शहर को लैस किया ताकि घटना होने पर फुटेज का इस्तेमाल किया जा सके। थानेदारों पर नजर रखने के लिए उनकी गाड़ियों में जीपीएस (ग्लोबल सिस्टम प्रणाली) लगाई गई।
यही नहीं, दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे खराब हैं। ऐसे में कैसे हो पाएगी देवरिया पुलिस स्मार्ट। बिहार से सटा होने के कारण जिला संवेदनशील है। महिला थाना समेत कुल 19 थाने हैं। शासन पेपर लेस एफआईआर हो या फिर अत्याधुनिक उपकरण, शासन सब कुछ उपलब्ध करा रहा है ताकि बदलाव के दौर में पुलिसकर्मी पीछे न रहें लेकिन पुलिस पुराने सिस्टम में ही मशगूल हैं।
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अब इसे पुलिसकर्मियों की लापरवाही समझें या फिर आधुनिक सिस्टम से पकड़े जाने का भय, लाखों की लागत से खरीदे गए उपकरण कुछ दिनों में खराब हो जाते हैं। पुलिस महकमे में पहला बदलाव 2013 में तत्कालीन एसपी उमेश श्रीवास्तव ने किया। उनकी पहल पर बेहतर गुणवत्ता के 21 सीसीटीवी कैमरे मुख्य चौराहों पर लगाए गए। सीसीटीवी कुछ दिनों बाद बंद हो गए। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कोतवाली से होनी थी, अप्रशिक्षित पुलिसकर्मी, बिजली कटौती और अन्य समस्याएं दर्शा कर निगरानी कक्ष की ड्यूटी ही खत्म कर दी गई।
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बाद में एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने शासन के निर्देश पर थानेदारों के अलावा विभाग की गाड़ियों में जीपीएस लगवाए ताकि थानेदारों के रात्रि भ्रमण, सूचना के बाद पुलिस के मौके पर पहुंचने की टाइमिंग का पता लगाया जा सके। बॉर्डर क्षेत्र एकौना, खामपार, बनकटा, लार, भाटपाररानी, बरहज, मईल आदि थानों के नेटवर्किंग समस्या होने से जीपीएस लगते ही ध्वस्त हो गए। यही नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक डायल 100 का भी दयनीय हाल है। फाल्स कॉल कंट्रोल रूम में बजती है तो पीड़ितों को लगता है पुलिस फोन नहीं उठा रही है।
तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी ने कंट्रोल रूम की चार लाइनों को दुरुस्त कराया, लेकिन फिर स्थिति जस की तस है। कुछ दिनों पहले जिले के दौरे पर आए आईजी मोहित अग्रवाल ने भी कंट्रोल रूम का जायजा लिया था। वहां तैनात पुलिसकर्मियों से नई तकनीक के बारे में पूछताछ की थी, तो वे बगले झांकने लगे थे। इस बाबत एसपी मोहम्मद इमरान ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे या अन्य उपकरणों की खामियों को लेकर चिंतित हूं। त्योहार से पहले उनको दुरुस्त करा लिया जाएगा।