जिंदगी की जद्दोजहद में मदद की दरकार
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परिवार के सामने दो जून की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। गरीबी और बीमारी से जंग लड़ रहे धर्मेंद्र को मदद की दरकार है।
तरकुलवा, सोहनरिया के 35 वर्षीय धर्मेंद्र गुप्ता के दिल (हृदय) में जन्म के साथ ही छेद है। उनके पिता केदार गुप्ता दिल्ली में चौकीदारी करते थे। बचपन में धर्मेंद्र को दिक्कत शुरू हुई ।
जांच के बाद एम्स के डॉक्टरों ने दिल के छेद होने की जानकारी दी और आपरेशन किया। कुछ दिन इलाज चला लेकिन बाद में छूट गया।
वर्ष 2007 में पिता केदार गुप्ता चल बसे। इसी बीच परिवारवालों ने शादी कर दी। छह साल पहले धर्मेंद्र को सांस फूलने और अन्य शारीरिक दिक्कतें होने लगी। उसने एम्स जाकर दिखाया। डॉक्टरों ने दुबारा इलाज शुरू किया। एंजियोग्राफी और इको जांच में दिल में 18 एमएम के छेद होने की जानकारी मिली।
इसके अलावा फेफड़े में भी दिक्कत सामने आई। डॉक्टरों ने आपरेशन करने से मना कर दिया। डॉक्टरों ने सलाह दी कि इलाज लंबे समय तक चलेगा। गरीबी से जूझ रहे धर्मेंद्र के सामने इलाज में अड़चनें आने लगी। चार पहिया वाहन चलाकर कुछ कमा लेता था।
लेकिन शारीरिक दिक्कत बढ़ने पर लाचार हो गया है। उसने गुरुवार को जिलाधिकारी को पत्र देकर आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है। उसका कहना है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित और गरीब होने के बाद भी उसे बीपीएल कार्ड जारी नहीं किया गया।
इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी केजी पांडेय ने बताया कि पात्र होने की जांच कराकर उसे बीपीएल कार्ड जारी किया जाएगा।