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Deoria News: बुराइयों की होलिका जली, कल रंग लगा घोलेंगे रिश्तों में मिठास
Tue, 07 Mar 2023 07:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 07 Mar 2023 07:48 AM IST
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होलिका की राख के लगाकर की होली खेलने की शुरुआत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रंगों का पर्व होली जिले में आठ मार्च को उत्साह एवं उमंग के साथ मनाने की तैयारी हो रही है। सोमवार की देर रात होलिका शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से जलाई गई। आग की लपटों को देखकर युवाओं ने खूब आनंद लिया। इसी के साथ होली खेलने, रंग-गुलाल लगाने का अवसर भी प्रारंभ हो गया। लोग भी एक-दूसरे को पर्व की बधाई देकर इस पर्व को मनाने में तल्लीन हो गए।
ज्योतिषाचार्य पं. विवेक उपाध्याय बताते हैं कि सात मार्च को पूर्णिमा सायंकाल 05:39 मिनट तक ही है और सूर्यास्त 05: 49 बजे पर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सात मार्च को रात्रि के समय पूर्णिमा का अभाव है। सात मार्च को केवल काशी में ही होली खेली जाएगी। अन्य जगहों पर आठ मार्च को यह पर्व मनेगा।
उधर पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि बुराई की प्रतीक होलिका का दहन हो गया है। सात मार्च को रात में पूर्णिमा के अभाव के कारण होलिका का पूजन और दहन छह मार्च की रात में ही करना इस बार शुभ माना गया है। रंग भरी होली मधुमास में मनाई जाती है। ऐसे में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होने से मधुमास का उत्सव यानी होली आठ मार्च को मनाई जाएगी।
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उधर, कसया रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्य कहते हैं कि सनातन धर्म को मानने वाले हिंदू संस्कृति में होली सर्वमान्य पर्व है। जो देशाचार के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से मनाया जाता है। होली का पर्व आठ मार्च को मनाया जाना शुभकारी होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रंगों का पर्व होली जिले में आठ मार्च को उत्साह एवं उमंग के साथ मनाने की तैयारी हो रही है। सोमवार की देर रात होलिका शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से जलाई गई। आग की लपटों को देखकर युवाओं ने खूब आनंद लिया। इसी के साथ होली खेलने, रंग-गुलाल लगाने का अवसर भी प्रारंभ हो गया। लोग भी एक-दूसरे को पर्व की बधाई देकर इस पर्व को मनाने में तल्लीन हो गए।
ज्योतिषाचार्य पं. विवेक उपाध्याय बताते हैं कि सात मार्च को पूर्णिमा सायंकाल 05:39 मिनट तक ही है और सूर्यास्त 05: 49 बजे पर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सात मार्च को रात्रि के समय पूर्णिमा का अभाव है। सात मार्च को केवल काशी में ही होली खेली जाएगी। अन्य जगहों पर आठ मार्च को यह पर्व मनेगा।
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उधर पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि बुराई की प्रतीक होलिका का दहन हो गया है। सात मार्च को रात में पूर्णिमा के अभाव के कारण होलिका का पूजन और दहन छह मार्च की रात में ही करना इस बार शुभ माना गया है। रंग भरी होली मधुमास में मनाई जाती है। ऐसे में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होने से मधुमास का उत्सव यानी होली आठ मार्च को मनाई जाएगी।
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उधर, कसया रोड स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्य कहते हैं कि सनातन धर्म को मानने वाले हिंदू संस्कृति में होली सर्वमान्य पर्व है। जो देशाचार के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत ढंग से मनाया जाता है। होली का पर्व आठ मार्च को मनाया जाना शुभकारी होगा।