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Deoria News: बनाने के बजाय सेहत बिगाड़ देंगे केमिकल से पके फल
Thu, 03 Apr 2025 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:51 PM IST
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मालवीय रोड पर बिक रहा केला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नवरात्र में व्रतियों की सेहत का ख्याल न रखते हुए धंधेबाज फलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कच्चे फलों को कारबाइड का प्रयोग कर धड़ल्ले से पका दे रहे हैं।
इसका सबसे अधिक प्रयोग केला और पपीता पर हो रहा है। ऐसे में कार्बाइड से पका फल स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। सीधे संपर्क में आने से केमिकल फल के अंदर समाहित हो जाता है। ऐसे में पेट, लीवर और किडनी को यह नुकसान पहुंच रहे हैं। सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
नवरात्र में जिले में फलों की जबरदस्त मांग है। आलम यह है कि सेब, संतरा, अनार, अंगूर सब 100 रुपये से ऊपर प्रति किलो बिक रहा है । सेब तो 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं सबसे अधिक मांग केले की है। केला 50 से 60 रुपये दर्जन तक बिक रहा है। बाजार से जुड़े सूत्रों से मानें तो इसे कार्बाइड से पकाया जा रहा है।
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शहर में इधर छह एसी प्लांट काम कर रहे हैं। इसमें दो नए खुले हैं। यहीं पर केले को कार्बाइड के घोल में डुबोकर रात भर प्लांट में रखकर पकाया जा रहा है। साथ ही इन्हें रंगने में भी हानिकारक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। हर दिन जिले में यह खेल हो रहा है, लेकिन यह खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को नजर नहीं आता।
मालवीय रोड में फल बेचने वाले संजू सोनकर ने बताया कि मंडी में ज्यादातर फल केमिकल से पकाए ही बिक रहे हैं। इस समय केले की मांग ज्यादा है। देखने में यह लगता है कि पका नहीं है। वहीं, एक दिन बाद खराब भी होने लगता है। उधर सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विनय कुमार सहाय ने बताया कि केला केवल चैंबर में ही पकाया जा सकता है। उसे पकाने में सीधे रसायनों के संपर्क में आने वाली कोई भी विधि अब मान्य नहीं है। फलों को केमिकल से पकाने की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
बाजार में आया केमिकल से पका आम : शहर के फुटकर फल बाजार में अप्रैल में ही आम बिकने लगा है। देसी आम को पकने में अभी डेढ़ महीने का समय बाकी है, लेकिन बाजार में ठेले पर ये दिखने लगे हैं। ये सभी कार्बाइड से पकाए गए हैं। इसे खाने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
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देवरिया। नवरात्र में व्रतियों की सेहत का ख्याल न रखते हुए धंधेबाज फलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कच्चे फलों को कारबाइड का प्रयोग कर धड़ल्ले से पका दे रहे हैं।
इसका सबसे अधिक प्रयोग केला और पपीता पर हो रहा है। ऐसे में कार्बाइड से पका फल स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। सीधे संपर्क में आने से केमिकल फल के अंदर समाहित हो जाता है। ऐसे में पेट, लीवर और किडनी को यह नुकसान पहुंच रहे हैं। सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
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नवरात्र में जिले में फलों की जबरदस्त मांग है। आलम यह है कि सेब, संतरा, अनार, अंगूर सब 100 रुपये से ऊपर प्रति किलो बिक रहा है । सेब तो 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं सबसे अधिक मांग केले की है। केला 50 से 60 रुपये दर्जन तक बिक रहा है। बाजार से जुड़े सूत्रों से मानें तो इसे कार्बाइड से पकाया जा रहा है।
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शहर में इधर छह एसी प्लांट काम कर रहे हैं। इसमें दो नए खुले हैं। यहीं पर केले को कार्बाइड के घोल में डुबोकर रात भर प्लांट में रखकर पकाया जा रहा है। साथ ही इन्हें रंगने में भी हानिकारक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। हर दिन जिले में यह खेल हो रहा है, लेकिन यह खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को नजर नहीं आता।
मालवीय रोड में फल बेचने वाले संजू सोनकर ने बताया कि मंडी में ज्यादातर फल केमिकल से पकाए ही बिक रहे हैं। इस समय केले की मांग ज्यादा है। देखने में यह लगता है कि पका नहीं है। वहीं, एक दिन बाद खराब भी होने लगता है। उधर सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विनय कुमार सहाय ने बताया कि केला केवल चैंबर में ही पकाया जा सकता है। उसे पकाने में सीधे रसायनों के संपर्क में आने वाली कोई भी विधि अब मान्य नहीं है। फलों को केमिकल से पकाने की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
बाजार में आया केमिकल से पका आम : शहर के फुटकर फल बाजार में अप्रैल में ही आम बिकने लगा है। देसी आम को पकने में अभी डेढ़ महीने का समय बाकी है, लेकिन बाजार में ठेले पर ये दिखने लगे हैं। ये सभी कार्बाइड से पकाए गए हैं। इसे खाने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।