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नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर

Wed, 14 Apr 2021 11:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Apr 2021 11:20 PM IST
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Farmers forced to sell wheat at low prices
किसान कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर
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देवरिया। शासन के निर्देश पर एक अप्रैल से क्रय केंद्रों के ताले तो खुल गए, लेकिन गेहूं की खरीद अधिकांश जगहों पर शुरू नहीं हो पाई है। फसल का दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। किसी के घर बेटी की शादी है तो किसी को घर खर्च चलाने की चिंता। मजबूरी में किसान अनाज आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेच रहे हैं।
जिले में गेहूं खरीद की तैयारी डेढ़ माह से चल रही है। एक मार्च से ऑनलाइन पंजीकरण का विकल्प शुरू किया गया। पहली अप्रैल से क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की घोषणा की गई। अब तक की गई तैयारी महज कागजी बनकर रह गई है। कुछ क्रय केंद्रों पर बोरे का अभाव है तो कई गांवों से संबद्ध नहीं हो पाए हैं। पंजीकरण करा चुके किसान गेहूं बेचने के लिए केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं। जिन किसानों के घर शादी है या उन्हें घर खर्च चलाने के लिए रुपयों की जरूरत है, वे मजबूर होकर अपना अनाज आढ़तियों के हाथों बेच रहे हैं। क्रय केंद्रों के अलावा बाकी जगहों पर गेहूं की कीमत 1600 से 1650 रुपये है।
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पिपरा चंद्रभान के विनोद कुमार शाही ने बताया कि गेहूं बेचने के लिए उन्होंने 20 दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। सहकारी संघ सोनूघाट क्रय केंद्र से गांव संबद्ध नहीं हो पाए हैं। क्रय केंद्र प्रभारी कह रहे हैं कि गांव संबद्ध होने पर यहां सूची चस्पा की जाएगी। घर में इसी महीने शादी है। दो दिन में क्रय केंद्र पर गेहूं नहीं बिका तो आढ़तियों के हाथों बेचना मजबूरी होगी।
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राउतपार के धनंजय सिंह ने बताया कि क्रय केंद्र खुले 14 दिन हो चुके हैं। अधिकांश जगहों पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। विभाग के ढुलमुल रवैया का लाभ आढ़ती उठा रहे हैं। बरूआडीह के संजय पांडेय ने बताया कि यह समय बेहद खर्चीला है। तमाम जगह रिश्तेदारी में शादी है। इसमें रुपये की जरूरत है। कई बार क्रय केंद्र पर जा चुका हूं। पहले बोरा नहीं होने का बहाना था अब गांव संबद्ध नहीं होने का हवाला दिया जा रहा है।
धुसवां के शैलेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सरकार भले ही किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य की बात कह रही हो इसका असल लाभ तो आढ़तिए उठाएंगे। एक अप्रैल से वाकई खरीद शुरू हो जाती तब किसानों को लाभ मिलता। इस समय किसान अपना अनाज आढ़तियों के हाथों बेच रहे हैं।

गेहूं खरीद शुरू हुए 14 दिन हो चुके हैं। क्रय केंद्रो को बोरे उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब खरीद में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल्द ही गेहूं खरीद में सुस्ती बरत रहीं समितियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। जितेंद्र कुमार यादव, डिप्टी आरएमओ।
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