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Deoria News: पीडब्ल्यूडी में फर्जी बिल घोटाला मामले की होगी जांच
Mon, 04 Aug 2025 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:55 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के लोक निर्माण विभाग में करोड़ों रुपये के फर्जी बिल घोटाले के मामले में चार अधिकारियों के खिलाफ जांच की संस्तुति की गई है। जांच की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग बस्ती के मुख्य अभियंता और एक अधिशासी अभियंता को सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार, 17 जून 2021 को पथरदेवा स्थित आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में पूर्व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आयोजित कार्यक्रम के नाम पर स्विस कॉटेज, बैरिकेडिंग, मंच और पंडाल के लिए करोड़ों रुपये का फर्जी खर्च दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी की कोशिश की गई थी।
इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के प्रस्तावित आगमन को आधार बनाकर 4.27 करोड़ रुपये का त्रुटिपूर्ण व फर्जी आगणन तैयार कर शासन से स्वीकृति प्राप्त की गई।
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इसके बाद एक करोड़ रुपये की डिमांड क्लेम लिमिट (डीसीएल) की भी मांग कर दी गई। जांच में यह मामला उजागर होने के बाद शासन ने तत्कालीन दो अधिशासी अधिकारियों के खिलाफ जांच और दो जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
इसमें वर्तमान में निलंबित निर्माण खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता कमल किशोर, वर्तमान में प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार जाटव, निर्माण खंड के अवर अभियंता अनूप सिंह व साहब हुसैन शामिल हैं।
शासन ने दोनों अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता बस्ती को जांच अधिकारी और अधिशासी अभियंता लोनिवि बस्ती को जांच अधिकारी नामित किया है।
गोरखपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता को दोनों अवर अभियंताओं के खिलाफ आरोपपत्र जारी करते हुए करते हुए एक सप्ताह के भीतर प्रमुख अभियंता लखनऊ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
उधर, फर्जीवाड़े में आरोपिी लोक निर्माण के अधिकारियों पर शिकंजा करने जाने से विभाग में हड़कंप मचा है। विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि यदि मामले की जांच सही से हो जाए तो कइयों पर गाज गिर सकती है।
इस संबंध में गोरखपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, मगर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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देवरिया। जिले के लोक निर्माण विभाग में करोड़ों रुपये के फर्जी बिल घोटाले के मामले में चार अधिकारियों के खिलाफ जांच की संस्तुति की गई है। जांच की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग बस्ती के मुख्य अभियंता और एक अधिशासी अभियंता को सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार, 17 जून 2021 को पथरदेवा स्थित आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में पूर्व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आयोजित कार्यक्रम के नाम पर स्विस कॉटेज, बैरिकेडिंग, मंच और पंडाल के लिए करोड़ों रुपये का फर्जी खर्च दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी की कोशिश की गई थी।
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इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के प्रस्तावित आगमन को आधार बनाकर 4.27 करोड़ रुपये का त्रुटिपूर्ण व फर्जी आगणन तैयार कर शासन से स्वीकृति प्राप्त की गई।
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इसके बाद एक करोड़ रुपये की डिमांड क्लेम लिमिट (डीसीएल) की भी मांग कर दी गई। जांच में यह मामला उजागर होने के बाद शासन ने तत्कालीन दो अधिशासी अधिकारियों के खिलाफ जांच और दो जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
इसमें वर्तमान में निलंबित निर्माण खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता कमल किशोर, वर्तमान में प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार जाटव, निर्माण खंड के अवर अभियंता अनूप सिंह व साहब हुसैन शामिल हैं।
शासन ने दोनों अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता बस्ती को जांच अधिकारी और अधिशासी अभियंता लोनिवि बस्ती को जांच अधिकारी नामित किया है।
गोरखपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता को दोनों अवर अभियंताओं के खिलाफ आरोपपत्र जारी करते हुए करते हुए एक सप्ताह के भीतर प्रमुख अभियंता लखनऊ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
उधर, फर्जीवाड़े में आरोपिी लोक निर्माण के अधिकारियों पर शिकंजा करने जाने से विभाग में हड़कंप मचा है। विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि यदि मामले की जांच सही से हो जाए तो कइयों पर गाज गिर सकती है।
इस संबंध में गोरखपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, मगर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।