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Deoria News: कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता बना रही टीबी ग्रसित
Fri, 30 Aug 2024 06:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 30 Aug 2024 06:04 AM IST
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देवरिया। स्वास्थ्य को लेकर सभी सजग रहने की जरूरत है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से रोग से पीड़ित हो सकते हैं। इसकी वह क्षय रोग से ग्रसित होने की भी अशंका रहती है। इलाज से यह बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन दवा करने में लापरवाही भारी पड़ सकती है। इससे दूसरों को भी फैलने का खतरा रहता है। मेडिकल कॉलेज में इस तरह के हर रोज 10-15 मरीज आ रहे हैं।
क्षय रोग को लेकर सरकार गंभीर है। इसके उन्मूलन के लिए कार्य किए जा रहे हैं। लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। खानपान में गड़बड़ी और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर इस बीमारी से ग्रसित होने की अधिक संभावना बनी रहती है। इसे लेकर भ्रांति भी हैं, लेकिन उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। समय से इलाज शुरू करने व नियमित दवा लेने से यह बीमारी जड़ से समाप्त हो सकती है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग में क्षय रोग के मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना जांच करवाने 10-15 मरीज आ रहे हैं, इसमें तीन से पांच गंभीर मरीज होते हैं। मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
विटामिन डी की कमी से भी हो सकती है टीबी
चेस्ट व टीबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला व डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि टीबी के बैक्टीरिया सभी के शरीर में पाए जाते हैं। इम्यूनिटी कम होने पर ग्रोथ करते हैं, जिससे लोग क्षय रोग से ग्रसित हो जाते हैं। खानपान में गड़बड़ी, शुगर, एचआईवी व कैंसर पीड़ित को यह बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। विटामिन डी की कमी से भी टीबी हो सकती है। यह बीमारी इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसके लिए मरीज छह से सात माह कोर्स भर दवा खानी पड़ती है। छोड़-छोड़कर दवा नुकसानदायक होता है। तब मरीज एमडीआर की श्रेणी में चला जाता है, जो खतरनाक होता है।
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मरीज के एक बार खांसने पर वह 3500 बैक्टीरिया छोड़ता है, जिससे आसपास के लोगों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। सार्वजनिक स्थान पर थूकने, बिना मास्क के रहने से भी फैलता है। बीमारी का लक्षण दिखने पर संकोच नहीं करना चाहिए। समय से दवा करानी चाहिए। मरीज मिलने पर उस घर के सभी सदस्यों को भी जांच करानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में निशुल्क जांच, दवा की सुविधा है। मरीज खाते में पांच सौ रुपये हर माह दिया जाता है। खाली पेट अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पौष्टिक आहार, प्रोटीन का सेवन करने से बीमारी से बचा जा सकता है।
क्षय रोग के लक्षण
दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी, खांसी के साथ बलगम आना, बुखार, वजन कम होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, रात में लो ग्रेड का बुखार आना टीबी के लक्षण हैं। यह दिखने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू कराना चाहिए।
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यह बरतें सावधानी
- दिनचर्या नियमित रखें, समय से भोजन लें।
- पौष्टिक आहार, प्रोटीन का सेवन करें।
- तेल, मसाला से बीच चीजों का सेवन कम करें।
- सफाई पर विशेष ध्यान दें, हाथ अच्छी तरह धोकर भोजन करें।
- मरीज मास्क लगाकर रहें, इधर-उधर न थूकें।
ये मिल चुके मरीज
जनवरी से दिसंबर 2022 तक 4467, वर्ष 2023 में 5380 और वर्ष 2024 में जनवरी से अब तक करीब 3823 मरीज मिले हैं। इस वर्ष मिले सभी मरीजों का इलाज चल रहा है।
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क्षय रोग को लेकर सरकार गंभीर है। इसके उन्मूलन के लिए कार्य किए जा रहे हैं। लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। खानपान में गड़बड़ी और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर इस बीमारी से ग्रसित होने की अधिक संभावना बनी रहती है। इसे लेकर भ्रांति भी हैं, लेकिन उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। समय से इलाज शुरू करने व नियमित दवा लेने से यह बीमारी जड़ से समाप्त हो सकती है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग में क्षय रोग के मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना जांच करवाने 10-15 मरीज आ रहे हैं, इसमें तीन से पांच गंभीर मरीज होते हैं। मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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विटामिन डी की कमी से भी हो सकती है टीबी
चेस्ट व टीबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शुक्ला व डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि टीबी के बैक्टीरिया सभी के शरीर में पाए जाते हैं। इम्यूनिटी कम होने पर ग्रोथ करते हैं, जिससे लोग क्षय रोग से ग्रसित हो जाते हैं। खानपान में गड़बड़ी, शुगर, एचआईवी व कैंसर पीड़ित को यह बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। विटामिन डी की कमी से भी टीबी हो सकती है। यह बीमारी इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसके लिए मरीज छह से सात माह कोर्स भर दवा खानी पड़ती है। छोड़-छोड़कर दवा नुकसानदायक होता है। तब मरीज एमडीआर की श्रेणी में चला जाता है, जो खतरनाक होता है।
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मरीज के एक बार खांसने पर वह 3500 बैक्टीरिया छोड़ता है, जिससे आसपास के लोगों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। सार्वजनिक स्थान पर थूकने, बिना मास्क के रहने से भी फैलता है। बीमारी का लक्षण दिखने पर संकोच नहीं करना चाहिए। समय से दवा करानी चाहिए। मरीज मिलने पर उस घर के सभी सदस्यों को भी जांच करानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में निशुल्क जांच, दवा की सुविधा है। मरीज खाते में पांच सौ रुपये हर माह दिया जाता है। खाली पेट अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पौष्टिक आहार, प्रोटीन का सेवन करने से बीमारी से बचा जा सकता है।
क्षय रोग के लक्षण
दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी, खांसी के साथ बलगम आना, बुखार, वजन कम होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, रात में लो ग्रेड का बुखार आना टीबी के लक्षण हैं। यह दिखने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू कराना चाहिए।
यह बरतें सावधानी
- दिनचर्या नियमित रखें, समय से भोजन लें।
- पौष्टिक आहार, प्रोटीन का सेवन करें।
- तेल, मसाला से बीच चीजों का सेवन कम करें।
- सफाई पर विशेष ध्यान दें, हाथ अच्छी तरह धोकर भोजन करें।
- मरीज मास्क लगाकर रहें, इधर-उधर न थूकें।
ये मिल चुके मरीज
जनवरी से दिसंबर 2022 तक 4467, वर्ष 2023 में 5380 और वर्ष 2024 में जनवरी से अब तक करीब 3823 मरीज मिले हैं। इस वर्ष मिले सभी मरीजों का इलाज चल रहा है।