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एक ही चिता पर जले तीनों युवकों के शव
deoria
Updated Mon, 16 Oct 2017 11:21 PM IST
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पैकौली )। कुर्ना नाले पर जब तीनों शव एक ही चिता पर जले तो लोगों की आंखें डबडबा गईं। कुछ ही दूरी पर महिलाएं दहाड़ मारकर रो रही थीं। मौजूद लोग गमजदा थे। शवों की राख ठंडी होने तक लोग कुर्ना नाले के घाट पर जमे रहे। प्रशासन के लोग भी चौकन्ना थे। रास्ते से गुजरने वाले भी बरबस रुक कर शोक प्रकट कर रहे थे। सरौरा गांव के प्रधान के घर के बगल के खेत में रखे तीनों शवों को शाम साढ़े तीन बजे उठाया गया।
यहां मौजूद गांव की महिलाएं दहाड़े मारकर रो रही थीं। कुछ नियति को कोस रही थीं तो कुछ के अंदर प्रशासन के प्रति गुस्सा था। रामप्रवेश की भाभी ऊषा महिला सिपाहियों से कह रही थी कि वर्दी दे दो, हम बदला लेकर दिखाएंगे। सड़क पर तीनों शवों को आगे-पीछे रखा गया। इंद्रजीत की मां तो इतनी आहत थी कि शव को घर पर रखने की बात कहने लगीं।
शव के पीछे-पीछे महिलाएं रोती हुईं कुर्ना नाले के पास तक गईं और कहने लगीं भगवान किसी को यह दिन न दिखाए। गांव के पुरुष सदस्य धर्म की दुहाई देकर उन्हें वहां से लौटने की बात कहने लगे। काफी मनाने के बाद महिलाएं वहीं खड़ी हो गईं। वहां से शव को एकटक निहार रही थीं। कुर्ना नाले पर तीनों चिताओं को एक साथ सजाया गया।
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रामप्रवेश ऊर्फ कोहली की चिता को बड़े भाई राजेश राजभर ने, सत्यप्रकाश की चिता को बड़े भाई रवि प्रकाश कुशवाहा और इंद्रजीत के चिता को पिता नथुनी कुशवाहा ने मुखाग्नि दी। यह देखकर सभी के आंखों में आंसू आ गए।
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यहां मौजूद गांव की महिलाएं दहाड़े मारकर रो रही थीं। कुछ नियति को कोस रही थीं तो कुछ के अंदर प्रशासन के प्रति गुस्सा था। रामप्रवेश की भाभी ऊषा महिला सिपाहियों से कह रही थी कि वर्दी दे दो, हम बदला लेकर दिखाएंगे। सड़क पर तीनों शवों को आगे-पीछे रखा गया। इंद्रजीत की मां तो इतनी आहत थी कि शव को घर पर रखने की बात कहने लगीं।
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शव के पीछे-पीछे महिलाएं रोती हुईं कुर्ना नाले के पास तक गईं और कहने लगीं भगवान किसी को यह दिन न दिखाए। गांव के पुरुष सदस्य धर्म की दुहाई देकर उन्हें वहां से लौटने की बात कहने लगे। काफी मनाने के बाद महिलाएं वहीं खड़ी हो गईं। वहां से शव को एकटक निहार रही थीं। कुर्ना नाले पर तीनों चिताओं को एक साथ सजाया गया।
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रामप्रवेश ऊर्फ कोहली की चिता को बड़े भाई राजेश राजभर ने, सत्यप्रकाश की चिता को बड़े भाई रवि प्रकाश कुशवाहा और इंद्रजीत के चिता को पिता नथुनी कुशवाहा ने मुखाग्नि दी। यह देखकर सभी के आंखों में आंसू आ गए।