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पेड़ से टकराई स्कार्पियो, चालक समेत दो की मौत
Updated Sat, 03 Nov 2018 10:33 PM IST
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बरहज के परसियां चंदौर में हुए सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त स्कार्पियो
- फोटो : अमर उजाला
मगहरा। खुखुंदू थाना अंतर्गत मगहरा-मईल मार्ग पर परसिया चंदौर गांव के पास शुक्रवार की रात तेज रफ्तार स्कार्पियो के पेड़ से टकराने से चालक समेत दो युवकों की मौत हो गई। हादसे में स्कार्पियो सवार महिला और उसके दो बच्चे भी जख्मी हुए हैं। सभी की हालत गंभीर बनी हुई है। टक्कर इतना जोरदार था कि स्कार्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इस घटना में मां की गोद में बैठी बच्ची और दो वर्षीय बहन बाल-बाल बच गई।
बरहज के करौंदी गांव निवासी दर्शन उर्फ भोला चौहान मर्चेंट नेवी में काम करता है। उसकी तैनाती गुजरात में है। पत्नी रीना और चारों बच्चे भी वही रहते हैं। दीपावली और छठ पूजा के लिए रीना (35) अपने बच्चों क्रमश: रोशनी (8), गणेश (6), पायल (2) और डेढ़ माह की बेटी के साथ घर आ रही थी। शुक्रवार की शाम वह ट्रेन से गोरखपुर उतरी। खुखुंदू के करौदी कांटा निवासी ममेरा भाई नंदकुमार चौहान (18) पुत्र रामनाथ अपने दोस्त राकेश चौहान (21) की स्कार्पियो से उसे लेकर घर के लिए निकला। सभी रात करीब आठ बजे नंदकुमार के घर पहुंचे। यहां भोजन करने के बाद रात करीब साढ़े 12 बजे सभी लोग बरहज में करौंदी गांव के लिए रवाना हुए। वाहन राकेश चला रहा था। परसिया चंदौर के पास तेज रफ्तार स्कार्पियो सड़क किनारे आम के पेड़ से टकरा गई। जोरदार टक्कर की आवाज सुन आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। शीशा तोड़कर सभी सवारों को नीचे उतारा। राकेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी, जबकि नंदकुमार ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। रीना, रोशनी, गणेश को गोरखपुर रेफर कर दिया गया। खुखुंदू थानाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
दो होनहारों की मौत से सहमे गांववाले
खुखुंदू/मगहरा। नियति के आगे किसी का वश नहीं चलता। रात में ही पत्नी और बच्चों को घर छोड़ने की भोला की जिद के चलते सड़क हादसे में जहां दो होनहार काल के गाल में समा गए, वहीं पत्नी और तीन बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद करौंदी काटा गांव में हर तरफ मातम पसरा था।
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करौंदी काटा के रामनाथ चौहान की चार बेटों में तीसरे नंबर का नंदकुमार (18) गांव के अपने दोस्त राकेश चौहान (19) को लेकर उसकी स्कार्पियो से फुफेरी बहन रीना को लेने गोरखपुर गया था। गुजरात में रह रही रीना अपने चार बच्चों के साथ अरसे बाद ननिहाल पहुंची तो खुशी का ठिकाना नहीं था। भोजन के बाद ननिहाल के लोग उसे सुबह ससुराल भेजना चाहते थे, लेकिन रीना के पति भोला उन्हें रात में ही घर पहुंचाने की जिद पर था। बार-बार वह फोन कर पत्नी और बच्चों को रात में ही गांव पहुंचाने को कहता रहा। यही कारण था कि भोला की जिद से विवश होकर नंदकुमार और राकेश न चाहते हुए भी आधी रात में ही करौंदी के लिए रवाना हो गए। घर से निकलने के कुछ घंटे बाद ही हादसे की खबर आई तो परिजनों के होश उड़ गए। राकेश की मौत के बाद मां सुमित्रा देवी बार-बार यह कहते हुए विलाप कर रही थी कि रतियां बाबू हमार बतिया मान गइल रहतन त आज उ हमरी सामने खाड़ा रहतन। राकेश तीन भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था। गांव के लोगों के चेहरे पर दो होनहारों के खोने का गम साफ झलक रहा था। पीएम के बाद जब दोनों युवकों का शव गांव पहुंचा तो परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। पूरा गांव गमगीन हो गया। बताते चलें कि शुक्रवार की शाम को ही गांव के कमलेश चौहान के पेट में अचानक दर्द हुआ। इलाज के कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। गांववाले कमलेश की मौत से ही गमजदा थे कि कुछ घंटे में हादसे की खबर मिल गई।
शव उठवाने के लिए पुलिस ने पिता से मांगी गाड़ी
जवान बेटे की मौत से बदहवास पिता जमीन पर पड़े थे, तभी फोन की घंटी बजी। रिसीव करते किसी ने कहा कि शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाना है, गाड़ी भेजिए। यह सुनते नंदकुमार के पिता रामनाथ फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा प्रधान से बोलिए या फिर छोड़ दीजिए। जब रामनाथ से पूछा गया किसका फोन था तो रोते हुए कहने लगे थाने से पुलिस ने गांव के लोगों से फोन कराया था और शव ले जाने के लिए गाड़ी मांग रहे थे। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से गांववाले आक्रोश में थे।
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बरहज के करौंदी गांव निवासी दर्शन उर्फ भोला चौहान मर्चेंट नेवी में काम करता है। उसकी तैनाती गुजरात में है। पत्नी रीना और चारों बच्चे भी वही रहते हैं। दीपावली और छठ पूजा के लिए रीना (35) अपने बच्चों क्रमश: रोशनी (8), गणेश (6), पायल (2) और डेढ़ माह की बेटी के साथ घर आ रही थी। शुक्रवार की शाम वह ट्रेन से गोरखपुर उतरी। खुखुंदू के करौदी कांटा निवासी ममेरा भाई नंदकुमार चौहान (18) पुत्र रामनाथ अपने दोस्त राकेश चौहान (21) की स्कार्पियो से उसे लेकर घर के लिए निकला। सभी रात करीब आठ बजे नंदकुमार के घर पहुंचे। यहां भोजन करने के बाद रात करीब साढ़े 12 बजे सभी लोग बरहज में करौंदी गांव के लिए रवाना हुए। वाहन राकेश चला रहा था। परसिया चंदौर के पास तेज रफ्तार स्कार्पियो सड़क किनारे आम के पेड़ से टकरा गई। जोरदार टक्कर की आवाज सुन आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। शीशा तोड़कर सभी सवारों को नीचे उतारा। राकेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी, जबकि नंदकुमार ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। रीना, रोशनी, गणेश को गोरखपुर रेफर कर दिया गया। खुखुंदू थानाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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दो होनहारों की मौत से सहमे गांववाले
खुखुंदू/मगहरा। नियति के आगे किसी का वश नहीं चलता। रात में ही पत्नी और बच्चों को घर छोड़ने की भोला की जिद के चलते सड़क हादसे में जहां दो होनहार काल के गाल में समा गए, वहीं पत्नी और तीन बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद करौंदी काटा गांव में हर तरफ मातम पसरा था।
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करौंदी काटा के रामनाथ चौहान की चार बेटों में तीसरे नंबर का नंदकुमार (18) गांव के अपने दोस्त राकेश चौहान (19) को लेकर उसकी स्कार्पियो से फुफेरी बहन रीना को लेने गोरखपुर गया था। गुजरात में रह रही रीना अपने चार बच्चों के साथ अरसे बाद ननिहाल पहुंची तो खुशी का ठिकाना नहीं था। भोजन के बाद ननिहाल के लोग उसे सुबह ससुराल भेजना चाहते थे, लेकिन रीना के पति भोला उन्हें रात में ही घर पहुंचाने की जिद पर था। बार-बार वह फोन कर पत्नी और बच्चों को रात में ही गांव पहुंचाने को कहता रहा। यही कारण था कि भोला की जिद से विवश होकर नंदकुमार और राकेश न चाहते हुए भी आधी रात में ही करौंदी के लिए रवाना हो गए। घर से निकलने के कुछ घंटे बाद ही हादसे की खबर आई तो परिजनों के होश उड़ गए। राकेश की मौत के बाद मां सुमित्रा देवी बार-बार यह कहते हुए विलाप कर रही थी कि रतियां बाबू हमार बतिया मान गइल रहतन त आज उ हमरी सामने खाड़ा रहतन। राकेश तीन भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था। गांव के लोगों के चेहरे पर दो होनहारों के खोने का गम साफ झलक रहा था। पीएम के बाद जब दोनों युवकों का शव गांव पहुंचा तो परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। पूरा गांव गमगीन हो गया। बताते चलें कि शुक्रवार की शाम को ही गांव के कमलेश चौहान के पेट में अचानक दर्द हुआ। इलाज के कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। गांववाले कमलेश की मौत से ही गमजदा थे कि कुछ घंटे में हादसे की खबर मिल गई।
शव उठवाने के लिए पुलिस ने पिता से मांगी गाड़ी
जवान बेटे की मौत से बदहवास पिता जमीन पर पड़े थे, तभी फोन की घंटी बजी। रिसीव करते किसी ने कहा कि शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाना है, गाड़ी भेजिए। यह सुनते नंदकुमार के पिता रामनाथ फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा प्रधान से बोलिए या फिर छोड़ दीजिए। जब रामनाथ से पूछा गया किसका फोन था तो रोते हुए कहने लगे थाने से पुलिस ने गांव के लोगों से फोन कराया था और शव ले जाने के लिए गाड़ी मांग रहे थे। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से गांववाले आक्रोश में थे।