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विश्वास में धोखा खा गए डा. मो. खालिद 19-41-14
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:32 PM IST
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बघौचघाट। बदमाशों की गोलियों की शिकार हुए चिकित्सक डॉ. अब्दुल खालिद माता-पिता के इकलौते बेटे थे। करीब छह साल पहले इनकी तैनाती सखनी न्यू पीएचसी पर हुई थी। वह इतने व्यवहारिक थे कि लोग उनके मुरीद हो गए थे। रास्ता चलते लोगों का इलाज करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। यही वजह रही कि सोमवार को घर जाते समय डॉ. खालिद विश्वास में धोखा धो खा गए और हत्या हो गई।
कुशीनगर के पटहेरवा थाना क्षेत्र के बेलवा आलम दास गांव के रहने वाले डॉ. अब्दुल खालिद के घर से अस्पताल की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। देवरिया में ज्वॉइन करने के बाद तैनाती सखनी न्यू पीएचसी पर हुई। इनके आने के बाद अस्पताल पर मरीजों की संख्या में बढ़ गई। ड्यूटी के प्रति जितना वफादार थे, उतना ही व्यवहार कुशल। अस्पताल से घर जाते या आते समय अगर कोई अनजान अंजान व्यक्ति हाथ दिया तो उनकी कार रूक जाती थी और उसकी बात सुनने के बाद दवा लिखते थे। इस कार्यशैली से वह क्षेत्रीय लोगों के करीब हो गए थे। विभागीय कर्मचारियों से भी घुल मिलकर रहते थे। अस्पताल पर तैनात गोरखपुर निवासी फार्मासिस्ट आदित्यनाथ तिवारी उनकी कार से प्रत्येक दिन बघौचघाट कस्बा तक जाते थे और वहां से बस से गोरखपुर। ड्यूटी समाप्त होने के बाद दोनों आपस में बात करते हुए अस्पताल से निकले। करीब दो मीटर दूर अभी कार पहुंची थी कि हेलमेट लगाए बाइक सवार बदमाशों ने हाथ दिया। मरीज समझकर उन्होंने कार रोक दी। कार रूकते ही एक बदमाश ने गोली दाग दिया। जान बचाने के लिए डॉक्टर पैदल भागना चाहे, लेकिन मौत के सौदागरों ने दौड़ाकर पीछे से गोली पीठ के रास्ते सीने में उतार दी। बदमाशों का यह खूनी खेल देख फार्मासिस्ट कार में अचेेत हो गया। चिकित्सक की मौत के बाद पत्नी खादिजा का रो-रोकर बुरा हो गया है। उनकी दो बेटियां चार वर्षीय जोआ खालिद और छह माह की जिन्नत है।
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कुशीनगर के पटहेरवा थाना क्षेत्र के बेलवा आलम दास गांव के रहने वाले डॉ. अब्दुल खालिद के घर से अस्पताल की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। देवरिया में ज्वॉइन करने के बाद तैनाती सखनी न्यू पीएचसी पर हुई। इनके आने के बाद अस्पताल पर मरीजों की संख्या में बढ़ गई। ड्यूटी के प्रति जितना वफादार थे, उतना ही व्यवहार कुशल। अस्पताल से घर जाते या आते समय अगर कोई अनजान अंजान व्यक्ति हाथ दिया तो उनकी कार रूक जाती थी और उसकी बात सुनने के बाद दवा लिखते थे। इस कार्यशैली से वह क्षेत्रीय लोगों के करीब हो गए थे। विभागीय कर्मचारियों से भी घुल मिलकर रहते थे। अस्पताल पर तैनात गोरखपुर निवासी फार्मासिस्ट आदित्यनाथ तिवारी उनकी कार से प्रत्येक दिन बघौचघाट कस्बा तक जाते थे और वहां से बस से गोरखपुर। ड्यूटी समाप्त होने के बाद दोनों आपस में बात करते हुए अस्पताल से निकले। करीब दो मीटर दूर अभी कार पहुंची थी कि हेलमेट लगाए बाइक सवार बदमाशों ने हाथ दिया। मरीज समझकर उन्होंने कार रोक दी। कार रूकते ही एक बदमाश ने गोली दाग दिया। जान बचाने के लिए डॉक्टर पैदल भागना चाहे, लेकिन मौत के सौदागरों ने दौड़ाकर पीछे से गोली पीठ के रास्ते सीने में उतार दी। बदमाशों का यह खूनी खेल देख फार्मासिस्ट कार में अचेेत हो गया। चिकित्सक की मौत के बाद पत्नी खादिजा का रो-रोकर बुरा हो गया है। उनकी दो बेटियां चार वर्षीय जोआ खालिद और छह माह की जिन्नत है।
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