{"_id":"5af0887e4f1c1b86098b8cf9","slug":"151525713022-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हुई जमीन की रजिस्ट्री, दफ्तर पर ताला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नहीं हुई जमीन की रजिस्ट्री, दफ्तर पर ताला
Updated Mon, 07 May 2018 11:11 PM IST
विज्ञापन
प्रेसवार्ता शालिनी शुक्ला और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। लोगों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले उप निबंधन कार्यालय परिसर में सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालय में सिर्फ दो कर्मचारियों के होने की वजह से एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। कार्यालय पर ताला लगा रहा। स्टांप एआईजी ने दीपक मणि का अपहरण कर जमीन की रजिस्ट्री कराने और कर्मचारियों पर मुकदमे और गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी स्टांप आईजी को भेजी है। इसके अलावा कार्यालय संचालन के लिए तहसील से दो कर्मचारियों को संबद्ध करने की भी मांग की है।
दीपक मणि का अपहरण और करोड़ों की जमीन बैनामा कराने के मामले में सब रजिस्ट्रार और कार्यालय के कर्मचारियों की भी संलिप्तता उजागर हुई है। पुलिस ने सब रजिस्ट्रार फूलचंद यादव, दो वरिष्ठ लिपिकों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया। इसके बाद कार्यालय में मात्र दो कर्मचारी ही बचे हैं। इससे सोमवार को कार्यालय का कामकाज ठप रहा। जमीन के बैनामे और बाकी काम के लिए पहुंचे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। कार्यालय पहुंचे भलुआ गांव निवासी श्रीनारायण पांडेय ने बताया कि जमीन बैनामा कराने शनिवार को भी आए थे। अफसरों की गिरफ्तारी के कारण वापस लौटना पड़ा। आज भी दो कर्मचारी कार्यालय पर आए और हस्ताक्षर बनाकर चले गए। पूछने पर बताया कि आज जमीन का बैनामा नहीं होगा।
कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों के चेहरे पर भी खौफ नजर आया। एआईजी स्टांप डॉ. राधाकृष्ण मिश्र ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण बैनामा नहीं हुआ। तत्कालीन व्यवस्था के लिए तहसील से दो कर्मचारियों की तैनाती के लिए आईजी स्टांप लखनऊ से अनुमति मांगी गई है। उधर, सलेमपुर के निबंधन कार्यालय पर भी सोमवार को कोई काम नहीं हुआ। उप निबंधक ज्ञानेंद्र सिंह, शैलेंद्र शाही, कमलेश प्रसाद आदि मौजूद रहे। उप निबंधक ने बताया कि सोमवार को किसी जमीन के कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए।
विज्ञापन
जिला पंचायत कर्मचारियों पर भी संदेह
जिला पंचायत कार्यालय में तैनात कई लिपिक और कर्मचारी आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष के करीबी हैं। पुलिस की जांच के घेरे में ये कर्मचारी भी शामिल हैं। अध्यक्ष पर कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में भी दहशत है। नियम को दरकिनार कर जिला पंचायत में हुए आवासों के आवंटन की जानकारी देने से भी लिपिक कतरा रहे हैं। अगर गहराई से इसकी जांच कराई जाए तो गड़बड़ी का नया मामला उजागर होगा।
केंद्रीय विद्यालय की जमीन पर भी कब्जा
आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव उर्फ बबलू का गांव रजला है। इस गांव में केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन स्वीकृत हुई है लेकिन इस जमीन के कुछ हिस्सों पर आरोपी अध्यक्ष का कब्जा है। इसके अलावा सत्ताधारी दल के संगठन से जुड़े एक नेता ने भी कब्जा कर रखा है। चाह कर भी प्रशासन इस जमीन से कब्जा नहीं खाली करा पा रहा है।
जिला पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की होगी जांच - शलभ मणि
देवरिया। सपा सरकार ने असली भू-माफिया को बचाया और गरीबों के नाम भू-माफिया की सूची में डाल दिए थे। इसकी वजह से कई माफिया सत्ता तक पहुंच गए। भाजपा सरकार कमजोर और गरीबों के साथ है। सरकार भू-माफिया को चिह्नित कर शिकंजा कस रही है। जिला पंचायत में आवास आवंटन की जांच कराई जाएगी। भ्रष्टाचारियों की जगह सिर्फ जेल है। सोमवार को ये बातें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि जिला पंचायत की सड़कों के निर्माण और आवास आवंटन में नियमों की अनदेखी हुई है। इसमें कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इस भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी। इसके लिए लोकायुक्त से शिकायत की जाएगी। देवरिया में लंबे समय से भू-माफिया का वर्चस्व है। सपा सरकार में इनका मनोबल और बढ़ गया। जिले के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने दीपक मणि के साथ जो सलूक किया है, वह जघन्य अपराध है। डीजीपी और एसपी रोहन पी. कनय ने इसे गंभीरता से लिया और कानून से खिलवाड़ करने वाले प्रभावशाली आरोपियों को जेल भेजा। भू-माफिया से जो लोग भी पीड़ित हैं, वे डरें नहीं, सरकार पीड़ितों के साथ है। देवरिया के लिए दीपक एक उदाहरण है। ऐसे कितने दीपक हैं जिन्हें भू-माफिया ने बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है।
दीपक से कराए गया बैनामा निरस्त हो : डॉ. शालिनी
डॉ. शालिनी शुक्ला ने कहा कि मेरे भाई दीपक मणि का अपहरण कर उसके दस्तखत से जो बैनामा कराया गया है, उसे निरस्त कराया जाए। मैं देवरिया की बेटी हूं। भाई के साथ जो घटना हुई, उसमें आम लोगों का सहयोग मिला और एसपी ने काफी मदद की। बात करने के दौरान वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता तो दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा लोगों की मदद ही की।
विज्ञापन
दीपक मणि का अपहरण और करोड़ों की जमीन बैनामा कराने के मामले में सब रजिस्ट्रार और कार्यालय के कर्मचारियों की भी संलिप्तता उजागर हुई है। पुलिस ने सब रजिस्ट्रार फूलचंद यादव, दो वरिष्ठ लिपिकों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया। इसके बाद कार्यालय में मात्र दो कर्मचारी ही बचे हैं। इससे सोमवार को कार्यालय का कामकाज ठप रहा। जमीन के बैनामे और बाकी काम के लिए पहुंचे लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। कार्यालय पहुंचे भलुआ गांव निवासी श्रीनारायण पांडेय ने बताया कि जमीन बैनामा कराने शनिवार को भी आए थे। अफसरों की गिरफ्तारी के कारण वापस लौटना पड़ा। आज भी दो कर्मचारी कार्यालय पर आए और हस्ताक्षर बनाकर चले गए। पूछने पर बताया कि आज जमीन का बैनामा नहीं होगा।
विज्ञापन
कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों के चेहरे पर भी खौफ नजर आया। एआईजी स्टांप डॉ. राधाकृष्ण मिश्र ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण बैनामा नहीं हुआ। तत्कालीन व्यवस्था के लिए तहसील से दो कर्मचारियों की तैनाती के लिए आईजी स्टांप लखनऊ से अनुमति मांगी गई है। उधर, सलेमपुर के निबंधन कार्यालय पर भी सोमवार को कोई काम नहीं हुआ। उप निबंधक ज्ञानेंद्र सिंह, शैलेंद्र शाही, कमलेश प्रसाद आदि मौजूद रहे। उप निबंधक ने बताया कि सोमवार को किसी जमीन के कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए।
विज्ञापन
जिला पंचायत कर्मचारियों पर भी संदेह
जिला पंचायत कार्यालय में तैनात कई लिपिक और कर्मचारी आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष के करीबी हैं। पुलिस की जांच के घेरे में ये कर्मचारी भी शामिल हैं। अध्यक्ष पर कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में भी दहशत है। नियम को दरकिनार कर जिला पंचायत में हुए आवासों के आवंटन की जानकारी देने से भी लिपिक कतरा रहे हैं। अगर गहराई से इसकी जांच कराई जाए तो गड़बड़ी का नया मामला उजागर होगा।
केंद्रीय विद्यालय की जमीन पर भी कब्जा
आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव उर्फ बबलू का गांव रजला है। इस गांव में केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन स्वीकृत हुई है लेकिन इस जमीन के कुछ हिस्सों पर आरोपी अध्यक्ष का कब्जा है। इसके अलावा सत्ताधारी दल के संगठन से जुड़े एक नेता ने भी कब्जा कर रखा है। चाह कर भी प्रशासन इस जमीन से कब्जा नहीं खाली करा पा रहा है।
जिला पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की होगी जांच - शलभ मणि
देवरिया। सपा सरकार ने असली भू-माफिया को बचाया और गरीबों के नाम भू-माफिया की सूची में डाल दिए थे। इसकी वजह से कई माफिया सत्ता तक पहुंच गए। भाजपा सरकार कमजोर और गरीबों के साथ है। सरकार भू-माफिया को चिह्नित कर शिकंजा कस रही है। जिला पंचायत में आवास आवंटन की जांच कराई जाएगी। भ्रष्टाचारियों की जगह सिर्फ जेल है। सोमवार को ये बातें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि जिला पंचायत की सड़कों के निर्माण और आवास आवंटन में नियमों की अनदेखी हुई है। इसमें कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इस भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी। इसके लिए लोकायुक्त से शिकायत की जाएगी। देवरिया में लंबे समय से भू-माफिया का वर्चस्व है। सपा सरकार में इनका मनोबल और बढ़ गया। जिले के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने दीपक मणि के साथ जो सलूक किया है, वह जघन्य अपराध है। डीजीपी और एसपी रोहन पी. कनय ने इसे गंभीरता से लिया और कानून से खिलवाड़ करने वाले प्रभावशाली आरोपियों को जेल भेजा। भू-माफिया से जो लोग भी पीड़ित हैं, वे डरें नहीं, सरकार पीड़ितों के साथ है। देवरिया के लिए दीपक एक उदाहरण है। ऐसे कितने दीपक हैं जिन्हें भू-माफिया ने बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है।
दीपक से कराए गया बैनामा निरस्त हो : डॉ. शालिनी
डॉ. शालिनी शुक्ला ने कहा कि मेरे भाई दीपक मणि का अपहरण कर उसके दस्तखत से जो बैनामा कराया गया है, उसे निरस्त कराया जाए। मैं देवरिया की बेटी हूं। भाई के साथ जो घटना हुई, उसमें आम लोगों का सहयोग मिला और एसपी ने काफी मदद की। बात करने के दौरान वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता तो दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा लोगों की मदद ही की।