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हकीकत जानने राज्य महिला आयोग की टीम पहुंची
Updated Wed, 15 Aug 2018 12:06 AM IST
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सदर रेलवे स्टेशन रोड स्थित बाल गृह बालिका का गोरखपुर की पूर्व मेयर अंजु चौधरी व अन्य ने निरीक्षण किया।
- फोटो : अमर उजाला
देवरिया। बालिका गृह कांड की हकीकत जानने के लिए राज्य महिला आयोग की टीम मंगलवार को पहुंची। उपाध्यक्ष अंजू चौधरी के नेतृत्व में आई टीम ने बालिका गृह के सील भवन का अवलोकन किया। आसपास के लोगों से बातचीत की। पुलिस-प्रशासन के अफसरों से भी वार्ता कर पूरे मामले की रिपोर्ट ली। उन्होंने पुलिस की खामियों पर नाराजगी जताई। बालिका गृह से महज 100 मीटर दूरी पर रेलवे स्टेशन पुलिस चौकी होने के बावजूद पुलिस को देह व्यापार की भनक न लगने पर भी हिदायत दी। टीम ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने की बात कही है।
सुबह करीब 11 बजे टीम रेस्ट पहुंची। कुछ देर रुकने के बाद स्टेशन रोड पर बालिका गृह के भवन का अवलोकन किया। आसपास स्थित मकानों में जाकर पूछताछ की। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि लड़कियां कैसे आती-जाती थीं। कौन-कौन सी गाड़ियां आती थी। बालिका गृह की गतिविधियां कैसे थी और उसे लेकर उनकी क्या धारणा है। महिलाओं ने गाड़ियों के बारे में बता पाने में असमर्थता जताते हुए कहा कि बालिका गृह में ऐसी किसी गतिविधि के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। गाड़ियां बाहर आती थीं, घर में रहने के कारण वह नहीं देख पाई। इसके बाद टीम इसी भवन के नीचे चल रहे एक्सरे सेंटर पर पहुंची। यहां भी ऐसे ही सवाल किए। सबका पक्ष सुनने के बाद टीम कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां एडीएम सीताराम गुप्त, एएसपी गणेश साहा, डीपीओ प्रभात कुमार, बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी जेपी तिवारी से अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की। उनकी ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी ली।
उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने बताया कि टीम प्रदेश के सभी बालिका गृहों की व्यवस्था देख रही है। वहां लड़कियों को किस हाल में और कैसे रखा जा रहा है, इसकी पड़ताल की जा रही है। उन्होंने बताया इसकी रिपोर्ट वह मुख्यमंत्री और आयोग की अध्यक्ष को सौंपेगी। टीम मेें राज्य महिला आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह, निर्मला द्विवेदी के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता रंजना गुप्ता, अमिता सिंह, प्रतिभा भारती शामिल रहीं।
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सुबह करीब 11 बजे टीम रेस्ट पहुंची। कुछ देर रुकने के बाद स्टेशन रोड पर बालिका गृह के भवन का अवलोकन किया। आसपास स्थित मकानों में जाकर पूछताछ की। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि लड़कियां कैसे आती-जाती थीं। कौन-कौन सी गाड़ियां आती थी। बालिका गृह की गतिविधियां कैसे थी और उसे लेकर उनकी क्या धारणा है। महिलाओं ने गाड़ियों के बारे में बता पाने में असमर्थता जताते हुए कहा कि बालिका गृह में ऐसी किसी गतिविधि के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। गाड़ियां बाहर आती थीं, घर में रहने के कारण वह नहीं देख पाई। इसके बाद टीम इसी भवन के नीचे चल रहे एक्सरे सेंटर पर पहुंची। यहां भी ऐसे ही सवाल किए। सबका पक्ष सुनने के बाद टीम कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां एडीएम सीताराम गुप्त, एएसपी गणेश साहा, डीपीओ प्रभात कुमार, बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी जेपी तिवारी से अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की। उनकी ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी ली।
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उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने बताया कि टीम प्रदेश के सभी बालिका गृहों की व्यवस्था देख रही है। वहां लड़कियों को किस हाल में और कैसे रखा जा रहा है, इसकी पड़ताल की जा रही है। उन्होंने बताया इसकी रिपोर्ट वह मुख्यमंत्री और आयोग की अध्यक्ष को सौंपेगी। टीम मेें राज्य महिला आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह, निर्मला द्विवेदी के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता रंजना गुप्ता, अमिता सिंह, प्रतिभा भारती शामिल रहीं।
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