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Deoria News: बरसात में टॉपू बन जाता है भदिला प्रथम, परसियां-विशुनपुर देवार में हर दिन दहशत

Mon, 08 Jun 2026 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Mon, 08 Jun 2026 12:02 AM IST
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Bhadila becomes the first island during the rainy season, and there is daily terror in Parsian-Vishunpur Dewar.
बरहज में सरयू नदी पर नाव से यात्रा कर रहे लोग
देवरिया। जेठ की तपती दुपहरी के बाद अषाढ़ में जब मानसून आता है तो वह अपने साथ अगले साल की उम्मीद भी लेकर आता है। लेकिन यही मानसून देवरिया जिले के करीब 100 गांवों के लिए खुशी से अधिक तनाव का कारण बनता है। बरहज तहसील का भदिला प्रथम गांव टापू बन जाता है। वहीं परसिया और विशुनपुर देवार के लोगों के लिए चार महीने दहशत के दिन होते हैं।
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देवरिया जिले के कपरवार में गोरखपुर की तरफ से आई राप्ती और सरयू नदी का संगम है। यहां से सरयू आगे बरहज और सलेमपुर तहसील से गुजरती है। हर साल बरसात में राप्ती और सरयू में आई बाढ़ के चलते रुद्रपुर, बरहज और सलेमपुर तहसील के करीब 100 गांव बाढ़ से घिर जाते हैं।
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भदिला प्रथम गांव नदी के पानी से चारों ओर से घिर जाने के कारण टॉपू बन जाता है। वहीं परसियां-विशुनपुर देवार गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। कुछ मजरों में पानी घुस जाने के कारण स्थिति और भी भयावह हो जाती है। लोग जान जोखिम में डालकर किसी तरह नाव से सफर करने पर मजबूर हो जाते हैं। सरयू पार परसियां देवार में 22, जबकि विशुनपुर देवार में 14 मजरे हैं। बारिश के मौसम में सरयू के उफना जाने पर बाढ़ का पानी गांवों का रुख कर लेता है।
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एक दशक पहले कट गया था कूरह परसिया
सरयू की कटान के चलते बरहज तहसील का कूरह परसिया गांव वर्ष 2014 आते-आते कटकर खत्म हो गया। इस गांव के लोगों को बरहज, कपरवार, पिपरा कोट आदि गांवाें में दो-दो डिस्मिल जमीन देकर बसाया गया है। परसिया देवार गांव के रमाशंकर यादव, छोटेलाल आदि का कहना है कि गांवों की सुरक्षा के लिए पीडब्ल्यूडी बांध बनाया गया है, जो काफी जर्जर हो चुका है। 2022 में बांध के टूट जाने से हड़कंप मच गया था। विभाग ने तत्परता दिखाते हुए बांध की मरम्मत करा लिया था। वहीं बारिश के मौसम में चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिर जाने के कारण राप्ती तट पर बसे भदिला प्रथम गांव के लोगों का जीवन कैद होकर रह जाता है। बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार, बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को होती है। मेहियवां, पैना, कटइलवा से कपरवार संगम तट तक, बिनोवापुरी, महेन-मोहरा, समोगर-पटवनियां-केवटलिया आदि गांवों के लोग बरसात के दिनों में बाढ़ के पानी से प्रभावित रहते हैं। नए बांधों के बनने से कुछ हद तक राहत मिली है, मगर दियारा क्षेत्र का पीडब्ल्यूडी का बांध जर्जर हो गया है। इससे लोगों को इसके टूटने का डर बना रहता है।

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बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित गांव
0 परसिया देवार-विशुनपुर देवार, भागलपुर
0 लगभग एक लाख आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है
0 इस साल प्रशासन ने रुद्रपुर और बरहज तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाके में पांच मोटर बोट का इंतजाम किया है। इनका संचालन लोक निर्माण विभाग कराएगा।
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कोट
बाढ़ प्रभावित रुद्रपुर, बरहज और सलेमपुर तहसील में बाढ़ चौकी खोलने, राहत शिविर बनाने, आपात स्थिति में प्रभावित आबादी तक लंच पैकेट व अन्य राहत सामग्री पहुंचाने की पूरी प्लानिंग हो चुकी है। आवागमन के लिए मोटरबोट का भी इंतजाम किया गया है। नदी के किनारे रहने वालों को आपदा प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा नाविकों की सूची बनाने, नाव की मरम्मत आदि के सभी कार्य करा लिए गए हैं।
रामशंकर, एडीएम वित्त, आपदा प्रभारी
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