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स्वच्छता प्रमाण पत्र ईट भट्ठा मालिकों के गले की बनी फांस
Updated Mon, 17 Dec 2018 10:55 PM IST
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100 से अधिक ईंट-भट्ठों के पास नहीं है स्वच्छता प्रमाण पत्र
जिले में 250 से अधिक ईंट भट्ठे, नियमों को धता बता रहे भट्ठा संचालक
मिट्टी खनन के साथ आसपास के पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है प्रमाण पत्र
डीएम ने बिना प्रमाण पत्र के चल रहे भट्ठों पर कार्रवाई करने का दिया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ने ईंट-भट्ठा संचालकों की मुसीबत बढ़ा दी है। जिले में संचालित 100 से अधिक ईंट-भट्ठों के पास स्वच्छता प्रमाण पत्र नहीं है। नियमों को दरकिनार कर चल रहे इन ईंट-भट्ठों से न सिर्फ स्वच्छता मानकों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है। प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इससे भट्ठा मालिकों की बेचैनी बढ़ गई है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार की ओर से ईंट भट्ठों के लिए माइनिंग प्लान बनाया गया है। उन्हें तय मात्रा में ही मिट्टी का खनन करना है। उसकी ढुलाई या ईंट निर्माण के दौरान सुरक्षा व स्वच्छता के मानक का पालन करना जरूरी है। प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने वाले ईंट-भट्ठा मालिकों को मिट्टी खनन के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। कागजी प्रक्रिया जटिल होने के कारण अधिकांश ईंट भट्ठा मालिक स्वच्छता प्रमाण नहीं लिए हैं और नियम को दरकिनार कर मिट्टी का खनन कर कच्चा ईंट बनवा रहे हैं। ऐसे संचालकों पर खनन विभाग अभियान चलाकर केस दर्ज करा रहा है। इसे लेकर संचालकों में खलबली मची है। खनन विभाग के अनुसार जिले में करीब 250 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। सिर्फ 120 संचालकों ने स्वच्छता प्रमाण पत्र अभी तक बनवाया है। बिना स्वच्छता प्रमाण पत्र लिए अवैध तरीके से ईंट भट्ठा चलाने वाले मालिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
बंद होंगे ईंट भट्ठे
जिले में 250 से अधिक ईंट-भट्ठा वर्तमान समय में संचालित हो रहे हैं। 2004 के बाद संचालित होने वाले 100 से अधिक ईंट-भट्ठा को प्रदूषण विभाग से एनओसी नहीं मिली है। इनका अवैध तरीके से संचालन हो रहा है। खनन विभाग की इस कार्रवाई से ऐसे ईंट भट्ठों की आग बुझ जाएगी।
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यह है मानक
बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र ईंट-भट्ठा मालिकों के लिए अनिवार्य किया गया है। माइनिंग प्लान के अनुसार ईंट-भट्ठा मालिक जहां मिट्टी का खनन कराएगा। उस जमीन का खतौनी और खसरा को प्रदूषण विभाग कार्यालय में जमा करना होगा। शर्तों में मिट्टी खनन करने का मानक, एक जगह से दूसरे स्थान पर मिट्टी ढककर लेकर जाना होगा। सूखी मिट्टी होने पर पानी का छिड़काव करने समेत कई नियमों को पूरा करना शामिल है।
चार संचालकों पर केस, दो को किया सीज
तीन दिन के अंदर खनन विभाग ने छह ईट-भट्ठा मालिकों पर कार्रवाई किया है। चार भट्ठा मालिकों पर केस दर्ज कराया और दो ईंट-भट्ठा को सीज कर दिया। इसको लेकर ईट-भट्ठा संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने वाले ईंट-भट्ठों के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। भट्ठा संचालक जल्द प्रमाण पत्र ले लें। बिना प्रमाण पत्र के चल रहे ईंट-भट्ठों पर कार्रवाई की जाएगी।
- उमाकांत, जिला खान निरीक्षक।
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जिले में 250 से अधिक ईंट भट्ठे, नियमों को धता बता रहे भट्ठा संचालक
मिट्टी खनन के साथ आसपास के पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है प्रमाण पत्र
डीएम ने बिना प्रमाण पत्र के चल रहे भट्ठों पर कार्रवाई करने का दिया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ने ईंट-भट्ठा संचालकों की मुसीबत बढ़ा दी है। जिले में संचालित 100 से अधिक ईंट-भट्ठों के पास स्वच्छता प्रमाण पत्र नहीं है। नियमों को दरकिनार कर चल रहे इन ईंट-भट्ठों से न सिर्फ स्वच्छता मानकों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है। प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इससे भट्ठा मालिकों की बेचैनी बढ़ गई है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार की ओर से ईंट भट्ठों के लिए माइनिंग प्लान बनाया गया है। उन्हें तय मात्रा में ही मिट्टी का खनन करना है। उसकी ढुलाई या ईंट निर्माण के दौरान सुरक्षा व स्वच्छता के मानक का पालन करना जरूरी है। प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने वाले ईंट-भट्ठा मालिकों को मिट्टी खनन के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। कागजी प्रक्रिया जटिल होने के कारण अधिकांश ईंट भट्ठा मालिक स्वच्छता प्रमाण नहीं लिए हैं और नियम को दरकिनार कर मिट्टी का खनन कर कच्चा ईंट बनवा रहे हैं। ऐसे संचालकों पर खनन विभाग अभियान चलाकर केस दर्ज करा रहा है। इसे लेकर संचालकों में खलबली मची है। खनन विभाग के अनुसार जिले में करीब 250 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। सिर्फ 120 संचालकों ने स्वच्छता प्रमाण पत्र अभी तक बनवाया है। बिना स्वच्छता प्रमाण पत्र लिए अवैध तरीके से ईंट भट्ठा चलाने वाले मालिकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
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बंद होंगे ईंट भट्ठे
जिले में 250 से अधिक ईंट-भट्ठा वर्तमान समय में संचालित हो रहे हैं। 2004 के बाद संचालित होने वाले 100 से अधिक ईंट-भट्ठा को प्रदूषण विभाग से एनओसी नहीं मिली है। इनका अवैध तरीके से संचालन हो रहा है। खनन विभाग की इस कार्रवाई से ऐसे ईंट भट्ठों की आग बुझ जाएगी।
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यह है मानक
बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र ईंट-भट्ठा मालिकों के लिए अनिवार्य किया गया है। माइनिंग प्लान के अनुसार ईंट-भट्ठा मालिक जहां मिट्टी का खनन कराएगा। उस जमीन का खतौनी और खसरा को प्रदूषण विभाग कार्यालय में जमा करना होगा। शर्तों में मिट्टी खनन करने का मानक, एक जगह से दूसरे स्थान पर मिट्टी ढककर लेकर जाना होगा। सूखी मिट्टी होने पर पानी का छिड़काव करने समेत कई नियमों को पूरा करना शामिल है।
चार संचालकों पर केस, दो को किया सीज
तीन दिन के अंदर खनन विभाग ने छह ईट-भट्ठा मालिकों पर कार्रवाई किया है। चार भट्ठा मालिकों पर केस दर्ज कराया और दो ईंट-भट्ठा को सीज कर दिया। इसको लेकर ईट-भट्ठा संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने वाले ईंट-भट्ठों के लिए स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। भट्ठा संचालक जल्द प्रमाण पत्र ले लें। बिना प्रमाण पत्र के चल रहे ईंट-भट्ठों पर कार्रवाई की जाएगी।
- उमाकांत, जिला खान निरीक्षक।