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मंडराने लगा सूखे का खतरा
Updated Mon, 16 Jul 2018 10:24 PM IST
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मंडराने लगा सूखे का खतरा
मौसम की बेरुखी से सूखने लगी फसलें, किसान चिंतित
पिछले 16 दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ी दरार
पंपिंग सेट की मदद से फसल को बचाने में जुटे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। मौसम की बेेेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश नहीं होने से रोपी गई धान की फसल सूखने लगी हैं। फसल को बचाने के लिए किसान लगातार खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। जुलाई में अभी तक सिर्फ 11.55 मिमी औसत वर्षा हुई है, जबकि जिले में इस माह औसत वर्षा का आंकड़ा 308 मिमी है। कृषि विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगले एक सप्ताह तक यही हाल रहा तो फिर स्थिति गंभीर होगी।
धान की फसल मानसून पर आधारित है। 15 जून तक मानसून की दस्तक के साथ धान की रोपाई शुरू हो जाती है। इस बार शुरुआती कुछ दिनों तक बारिश के बाद से ही मौसम प्रतिकूल बना हुआ है। बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। अधिकांश किसान पंपिंग सेट से पानी चलाकर धान की रोपी हुई फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो एक से 16 जुलाई तक 11.55 मिमी और जून में 27.91 मिमी वर्षा हुई है। वहीं, वर्ष 2017 में जून में 41.64 मिमी औसत, जुलाई में 90.31 मिमी औसत वर्षा हुई थी। किसान हरिवंश यादव, राजन सिंह, रामनरेश, विजय बहादुर का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेतों में धान की फसल सूख रही है। किसी तरह पानी चलाकर इसे बचाया जा रहा है। लागत बढ़ने के बाद भी बहुत फायदा नहीं दिख रहा। एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो फसलें सूख जाएंगी।
खेतों में नमी को बरकरार रखें किसान
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतनशंकर ओझा ने बताया कि असमान वर्षा से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। धान की फसल को बचाने के लिए खेतों में नमी को बरकरार रखना जरूरी है। पानी की कमी होने पर फसल की जड़ों में दीमक लगता है। इससे बचाव के लिए सिंचाई के बाद कीटनाशक का छिड़काव जरूर करें। नियमित सिंचाई करते रहें, जिससे फसल को नमी मिलती रहे।
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जिले में करीब 90 फीसदी धान की रोपाई किसान कर लिए हैं। बारिश का औसत काफी कम रहा है। दस दिनों तक बारिश नहीं हुई तो धान की सफल को बचाना मुश्किल होगा। सूखा से निपटने के लिए अभी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। -मोहम्मद मुजम्मिल, जिला कृृषि अधिकारी।
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मौसम की बेरुखी से सूखने लगी फसलें, किसान चिंतित
पिछले 16 दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ी दरार
पंपिंग सेट की मदद से फसल को बचाने में जुटे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। मौसम की बेेेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश नहीं होने से रोपी गई धान की फसल सूखने लगी हैं। फसल को बचाने के लिए किसान लगातार खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। जुलाई में अभी तक सिर्फ 11.55 मिमी औसत वर्षा हुई है, जबकि जिले में इस माह औसत वर्षा का आंकड़ा 308 मिमी है। कृषि विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगले एक सप्ताह तक यही हाल रहा तो फिर स्थिति गंभीर होगी।
धान की फसल मानसून पर आधारित है। 15 जून तक मानसून की दस्तक के साथ धान की रोपाई शुरू हो जाती है। इस बार शुरुआती कुछ दिनों तक बारिश के बाद से ही मौसम प्रतिकूल बना हुआ है। बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। अधिकांश किसान पंपिंग सेट से पानी चलाकर धान की रोपी हुई फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो एक से 16 जुलाई तक 11.55 मिमी और जून में 27.91 मिमी वर्षा हुई है। वहीं, वर्ष 2017 में जून में 41.64 मिमी औसत, जुलाई में 90.31 मिमी औसत वर्षा हुई थी। किसान हरिवंश यादव, राजन सिंह, रामनरेश, विजय बहादुर का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेतों में धान की फसल सूख रही है। किसी तरह पानी चलाकर इसे बचाया जा रहा है। लागत बढ़ने के बाद भी बहुत फायदा नहीं दिख रहा। एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो फसलें सूख जाएंगी।
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खेतों में नमी को बरकरार रखें किसान
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतनशंकर ओझा ने बताया कि असमान वर्षा से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। धान की फसल को बचाने के लिए खेतों में नमी को बरकरार रखना जरूरी है। पानी की कमी होने पर फसल की जड़ों में दीमक लगता है। इससे बचाव के लिए सिंचाई के बाद कीटनाशक का छिड़काव जरूर करें। नियमित सिंचाई करते रहें, जिससे फसल को नमी मिलती रहे।
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जिले में करीब 90 फीसदी धान की रोपाई किसान कर लिए हैं। बारिश का औसत काफी कम रहा है। दस दिनों तक बारिश नहीं हुई तो धान की सफल को बचाना मुश्किल होगा। सूखा से निपटने के लिए अभी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। -मोहम्मद मुजम्मिल, जिला कृृषि अधिकारी।