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27 बस मालिकों को नोटिस, अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी
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देवरिया। बस्ती में चुनाव ड्यूटी में अपने वाहन नहीं भेजने वाले 27 बस मालिकों को अनुबंध समाप्त करने का नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में परिवहन निगम ने अनुबंधित बस मालिकों से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा है। उधर, बसें खड़ी कर दिए जाने से यात्रियों की मुसीबत रविवार को और बढ़ गई। गोरखपुर, सलेमपुर, रुद्रपुर, लार, पकहां, बरहज सहित अन्य मार्गों पर यात्री बसें न मिलने के कारण लोग रोडवेज प्रशासन को कोसते नजर आए।
बस्ती में चुनाव ड्यूटी में देवरिया डिपो की अनुबंधित बसों को भेजे जाने की बात कही गई थी। इस बीच वाहन मालिकों ने अनुबंधित बसों का संचालन नहीं किया। अनुबंधित बसें परिसर अथवा वाहन स्वामियों के घरों पर खड़ी रहीं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी रोडवेज यात्रियों को हुई। उन्हें समय से बसें नहीं मिलीं और वह गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। लग्न का समय होने के चलते कई यात्री समय से अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां नहीं पहुंच पाए। महिलाएं अपने बच्चों व सामान के साथ कड़ी धूप में बसों के इंतजार में परेशान दिखीं। यात्रियों की ज्यादा संख्या के बावजूद डिपो प्रशासन इनके लिए बसों का इंतजाम नहीं कर पाया।
एआरएम आरवी विश्वकर्मा का कहना है कि बस्ती में चुनाव ड्यूटी के लिए शासन स्तर से 50 अनुबंधित बसें उपलब्ध कराने का निर्देेश हुआ था। शनिवार की शाम किसी तरह व्यवस्था करके 37 बसों को भेजा गया। न जाने वाली 27 बसों के मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 24 घंटे के अंदर बस मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उनका अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
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अनुबंधित बस मालिकों ने एआरएम से की वार्ता
अनुबंधित बस एसोसिएशन के अध्यक्ष शक्ति सिंह, उपाध्यक्ष राजेश यादव व महामंत्री अंगद तिवारी के नेतृत्व में संगठन का प्रतिनिधिमंडल रविवार को एआरएम से मिला। बस मालिकों ने कहा कि करीब 50 वाहनों का संचालन रविवार को रोक दिया गया। बसें अगर चुनाव में भेजी जानी थीं तो इसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई। पिछली बार भी गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुई सभा में बसें गई थी, लेकिन उस बार डीजल काफी कम एवं पैसा आज भी बकाया है। इस बार भी बसें भेजने का फरमान जारी हो गया, जबकि इसका खर्च कौन देगा, इसको नहीं बताया गया। शनिवार की शाम को एआरटीओ ने बसों का अधिग्रहीत कर उस पर चुनावी ड्यूटी के लिए स्टीकर चस्पा करवा दिया। जबकि इस संबंध में एक बार भी बस मालिकों से पूछा तक नहीं गया।
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बस्ती में चुनाव ड्यूटी में देवरिया डिपो की अनुबंधित बसों को भेजे जाने की बात कही गई थी। इस बीच वाहन मालिकों ने अनुबंधित बसों का संचालन नहीं किया। अनुबंधित बसें परिसर अथवा वाहन स्वामियों के घरों पर खड़ी रहीं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी रोडवेज यात्रियों को हुई। उन्हें समय से बसें नहीं मिलीं और वह गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। लग्न का समय होने के चलते कई यात्री समय से अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां नहीं पहुंच पाए। महिलाएं अपने बच्चों व सामान के साथ कड़ी धूप में बसों के इंतजार में परेशान दिखीं। यात्रियों की ज्यादा संख्या के बावजूद डिपो प्रशासन इनके लिए बसों का इंतजाम नहीं कर पाया।
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एआरएम आरवी विश्वकर्मा का कहना है कि बस्ती में चुनाव ड्यूटी के लिए शासन स्तर से 50 अनुबंधित बसें उपलब्ध कराने का निर्देेश हुआ था। शनिवार की शाम किसी तरह व्यवस्था करके 37 बसों को भेजा गया। न जाने वाली 27 बसों के मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 24 घंटे के अंदर बस मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उनका अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
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अनुबंधित बस मालिकों ने एआरएम से की वार्ता
अनुबंधित बस एसोसिएशन के अध्यक्ष शक्ति सिंह, उपाध्यक्ष राजेश यादव व महामंत्री अंगद तिवारी के नेतृत्व में संगठन का प्रतिनिधिमंडल रविवार को एआरएम से मिला। बस मालिकों ने कहा कि करीब 50 वाहनों का संचालन रविवार को रोक दिया गया। बसें अगर चुनाव में भेजी जानी थीं तो इसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई। पिछली बार भी गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुई सभा में बसें गई थी, लेकिन उस बार डीजल काफी कम एवं पैसा आज भी बकाया है। इस बार भी बसें भेजने का फरमान जारी हो गया, जबकि इसका खर्च कौन देगा, इसको नहीं बताया गया। शनिवार की शाम को एआरटीओ ने बसों का अधिग्रहीत कर उस पर चुनावी ड्यूटी के लिए स्टीकर चस्पा करवा दिया। जबकि इस संबंध में एक बार भी बस मालिकों से पूछा तक नहीं गया।