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अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे आयुर्वेदिक अस्पताल
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:32 PM IST
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किराए के मकान में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्साल।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। वैसे तो अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए होते हैं, लेकिन देवरिया में आयुर्वेदिक अस्पतालों को खुद ही इलाज की जरूरत है। आयुर्वेदिक अस्पताल के बहुतायत भवन जर्जर हो चुके हैं। इसमें डॉक्टर और कर्मचारी जान जोखिम में डालकर रोगियों का इलाज करने को मजबूर हैं। राजकीय आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पताल डॉक्टरों की कमी की वजह से फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के भरोसे अस्पताल चल रहे हैं।
जिले में 42 राजकीय आयुर्वेदिक और दो यूनानी चिकित्सालय चल रहे हैं। लेकिन मात्र 17 अस्पतालों पर डॉक्टरों की तैनाती है। अन्य अस्पताल फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अफसरों की अनदेखी के कारण अधिकांश आयुर्वेदिक अस्पतालों का ताला नहीं खुलता है। जिला पंचायत के भवन में चल रहे अस्पताल का भवन मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हो गया है। छत और दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। निष्क्रिय हुए उपकरणों के बीच चार बेड मरीजों के लिए है, लेकिन इसका उपयोग नहीं होता है। यहां तैनात डॉ. करूणालता, फार्मासिस्ट उपेंद्र मणि तिवारी ने बताया भवन में बैठकर इलाज करना मुश्किल है। कई बार छत का प्लास्टर टूटकर गिरने से कर्मचारी जख्मी भी हो गए हैं।
अस्पतालों की दशा ठीक नहीं है। जर्जर भवन होने के कारण कई अस्पतालों में कर्मचारी और डॉक्टर परहेज करते हैं। इधर कुछ माह से दवाओं की सप्लाई मिल रही है और सभी अस्पतालों पर जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
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डॉ. सुरेंद्र राय, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी
अधिकांश अस्पताल रहते हैं बंद
आयुर्वेदिक अस्पतालों में आने वाले मरीजों को दवा नहीं मिलती है। अधिकांश अस्पतालों का ताला नहीं खुलता है। इसको लेकर विभागीय अफसर भी उदासीन रवैया अपनाते हैं। इस कारण मरीजों का आयुर्वेदिक अस्पतालों से मोहभंग होता जा रहा है।
किराए के भवन में 13 अस्पताल
जिला में 13 आयुर्वेदिक अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें मगहरा, रावतपार अमेठिया, बैरौना, बरियारपुर, लार रोड, मझौलीराज, बढ़या हरदो, श्रीनगर, भोसिमपुर, रायबारी, भटनी, बरडीहा शहर के चटनी गड़ही के पास शामिल हैं। इसके अलावा मदनपुर और शहर के खरजरवा में यूनानी अस्पताल संचालित होता है।
कर्मचारी विरोधी है सरकार का फैसला
देवरिया। आयुर्वेदिक, यूनानी चिकित्सालयों और कर्मचारियों को पीएचसी और सीएचसी में स्थानांतरित करने का आदेश शासन ने जारी किया गया है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। कर्मचारियों ने बैठक कर इसका विरोध किया और स्थानांतरित प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। सरकार का यह फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है। इस दौरान राजीव पांडेय, वीर बहादुर यादव, सुरेंद्र पांडेय, महेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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जिले में 42 राजकीय आयुर्वेदिक और दो यूनानी चिकित्सालय चल रहे हैं। लेकिन मात्र 17 अस्पतालों पर डॉक्टरों की तैनाती है। अन्य अस्पताल फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अफसरों की अनदेखी के कारण अधिकांश आयुर्वेदिक अस्पतालों का ताला नहीं खुलता है। जिला पंचायत के भवन में चल रहे अस्पताल का भवन मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हो गया है। छत और दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। निष्क्रिय हुए उपकरणों के बीच चार बेड मरीजों के लिए है, लेकिन इसका उपयोग नहीं होता है। यहां तैनात डॉ. करूणालता, फार्मासिस्ट उपेंद्र मणि तिवारी ने बताया भवन में बैठकर इलाज करना मुश्किल है। कई बार छत का प्लास्टर टूटकर गिरने से कर्मचारी जख्मी भी हो गए हैं।
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अस्पतालों की दशा ठीक नहीं है। जर्जर भवन होने के कारण कई अस्पतालों में कर्मचारी और डॉक्टर परहेज करते हैं। इधर कुछ माह से दवाओं की सप्लाई मिल रही है और सभी अस्पतालों पर जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
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डॉ. सुरेंद्र राय, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी
अधिकांश अस्पताल रहते हैं बंद
आयुर्वेदिक अस्पतालों में आने वाले मरीजों को दवा नहीं मिलती है। अधिकांश अस्पतालों का ताला नहीं खुलता है। इसको लेकर विभागीय अफसर भी उदासीन रवैया अपनाते हैं। इस कारण मरीजों का आयुर्वेदिक अस्पतालों से मोहभंग होता जा रहा है।
किराए के भवन में 13 अस्पताल
जिला में 13 आयुर्वेदिक अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें मगहरा, रावतपार अमेठिया, बैरौना, बरियारपुर, लार रोड, मझौलीराज, बढ़या हरदो, श्रीनगर, भोसिमपुर, रायबारी, भटनी, बरडीहा शहर के चटनी गड़ही के पास शामिल हैं। इसके अलावा मदनपुर और शहर के खरजरवा में यूनानी अस्पताल संचालित होता है।
कर्मचारी विरोधी है सरकार का फैसला
देवरिया। आयुर्वेदिक, यूनानी चिकित्सालयों और कर्मचारियों को पीएचसी और सीएचसी में स्थानांतरित करने का आदेश शासन ने जारी किया गया है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। कर्मचारियों ने बैठक कर इसका विरोध किया और स्थानांतरित प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। सरकार का यह फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है। इस दौरान राजीव पांडेय, वीर बहादुर यादव, सुरेंद्र पांडेय, महेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।