फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   सुप्रीम कोर्ट की दखल न होती तो बच जाते अफसर

सुप्रीम कोर्ट की दखल न होती तो बच जाते अफसर

Tue, 07 May 2019 10:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2019 10:48 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की दखल न होती तो बच जाते अफसर
माफिया अतीक अहमद - फोटो : amar ujala
देवरिया। सुप्रीम कोर्ट की दखल नहीं होती तो इस बार भी देवरिया जेल में मची अंधेरगर्दी के सरपरस्तों बच जाते। कारोबारी मोहित जायसवाल को अपहरण कर जेल के अंदर लाना और बेरहमी से पिटाई कर करोड़ों की संपत्ति बैनामा करा लेने के मामले को प्रशासनिक स्तर पर तो पहले ही दबा दिया गया था। अधिकारी शुरुआती कार्रवाइयों के बाद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मौन साध गए थे। जिम्मेदार अधिकारियों पर चार महीने बाद निलंबन की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की फटकार पर ही हुई। वहीं, अब उन पर मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है।
विज्ञापन

अप्रैल 2017 में नैनी जेल से जब माफिया अतीक अहमद देवरिया जेल में शिफ्ट हुआ तो अराजकता का माहौल हो गया था। बाहर से सब कुछ ठीक दिखता था, लेकिन अंदर वही होता था जो अतीक चाहता था। उसने जेल से ही तीन बार रंगदारी मांगी थी। जेल सूत्रों की मानें तो जिनसे रंगदारी मांगी गई वो देवरिया जेल में रकम पहुंचा दिए। नतीजा यह हुआ कि माफिया अतीक की कारस्तानी बढ़ती गई। लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का 26 दिसंबर को अपहरण कर जेल में पिटाई के बाद मामला सुर्खियों में आया तो 31 दिसंबर को उसे बरेली जेल भेजा गया। शासन ने डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड वार्डर मुन्ना पांडेय, वार्डर राकेश शर्मा व एक अन्य को निलंबित कर दिया। जेलर मुकेश कटियार और जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय को चार्जशीट दी गई थी। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सख्ती हुई तो पहले जेलर और फिर जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया। जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी ने पांचों के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस दर्ज कराया है। तय है कि सीबीआई जांच में कई अधिकारी नप सकते हैं। इस बाबत जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी, ने कहा अभी नया आया हूं। पूर्व के मामलों के बारे में जानकारी की जा रही है। मामले में केस दर्ज करा दिया गया है।
विज्ञापन


जेल में मिले थे 50 से अधिक मोबाइल
जिला जेल में पिछले साल मई महीने में एक-एक दिन के अंतराल पर की गई जांच में बंदियों के पास से 50 से अधिक मोबाइल मिले थे। सवाल यह है कि इतनी जांच के बाद मोबाइल अंदर कैसे पहुंच जाता था। जेल सूत्रों की मानें तो इसमें अधिकारियों की मिलीभगत होती थी। माफिया अतीक अहमद की बैरक को जेल अधिकारी डर की वजह से चेक नहीं करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


त्योहार पर अपने खर्च से बनवाता था भोजन
ईद, बकरीद जैसे त्योहार पर जेल में अतीक अहमद अपने खर्च से खाना बनवाता था। सभी बंदी यही खाते थे। हालांकि जेल के जिम्मेदार लोग इसे छिपाते रहे। इसके पीछे वजह यह थी कि उस दिन के खर्च का बंदरबांट करते थे। बताया तो यह भी जा रहा है कि प्रतिदिन बाहर से भोजन अतीक अहमद तक पहुंचता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed