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पेयजल परियोजनाओं की प्रगति ठीक नहीं
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पानी नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। स्वच्छ पेयजल की किल्लत झेल रहे जिले वासियों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही। जिस रफ्तार से पाईप पेयजल योजना का विस्तार हो रहा है उससे जेई/एईएस प्रभावित गांवों को ही संतृप्त करने में दशकों गुजर जाएंगे।
योजना शुरू हुए 36 साल हो चुके हैं। अबतक 181 ग्राम पंचायतों में पाईप पेयजल परियाजना का विस्तार हो पाया है। इसे सालाना औसत मानें तो पांच से छह गांवों को ही राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल परियोजना से संतृप्त किया जा सका है। जबकि जिले जेई/एईएस से प्रभावित गांवों की संख्या 539 है। इनमें 358 ग्राम पंचायत के लोग आज भी दूषित जल पीने को मजबूर हैं। 1981 में सरकार ने गांवों में साफ पानी की किल्लत दूर करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना की शुरुआत की। जिन गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब मिली उन्हें योजना से संतृप्त करने का प्लान तैयार हुआ। बाद में जेई/एईएस से प्रभावित गांव भी पाइप पेयजल योजना में शामिल किए गए। विश्व बैंक की मदद से नीर निर्मल योजना शुरू हुई। इससे भी अबतक जिले में 17 ग्राम पंचायतों को ही संतृप्त किया जा सका है।
कागजों में दे रहे साफ पानी
36 साल में पूरी हुई 181 परियोजनाओं में दर्जनों बंद पड़ी हैं। किसी का पाईप फटा है तो किसी का मोटर ही खराब है। कई गांवों में ऑपरेटर नहीं होने के चलते सबकुछ ठीक होने के बावजूद घरों तक पानी की साप्लाई नहीं दी जा रही है। रामपुर कारखाना ब्लाक के नौतन गांव में वर्ष 2009-10 में पेयजल परियोजना का काम पूरा हुआ। टेस्टिंग के वक्त ही पाईप फट गए। नौ साल गुजरने के बाद भी मरम्मत नहीं हुआ। यही हाल आसपास के गुद्दीजोर, उदयपुरा आदि गांवों का है।
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इनसेट
जिले में पाईप पेयजल योजना का हाल
1189 ग्राम पंचायत जिले में हैं।
- 181 ग्राम पंचायतों में पेयजल परियोजना पूर्ण हो चुकी हैं।
- 57 परियोजना ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किए गए हैं।
- 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
- 17 ग्राम पंचायतों में 50 रुपये यूजर चार्ज वसूले जा रहे हैं।
जहां पानी की गुणवत्ता खराब है और जो गांव जेई/एईएस से प्रभावित हैं उन गांवों को पाईप पेयजल योजना से संतृप्त किया जा रहा है। जहां परियोजना पूर्ण हो रही है उसे मेंटेनेंस के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करने की कार्यवाही की जा रही है।
प्रदीप कुमार, एक्सईएन, जल निगम।
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योजना शुरू हुए 36 साल हो चुके हैं। अबतक 181 ग्राम पंचायतों में पाईप पेयजल परियाजना का विस्तार हो पाया है। इसे सालाना औसत मानें तो पांच से छह गांवों को ही राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल परियोजना से संतृप्त किया जा सका है। जबकि जिले जेई/एईएस से प्रभावित गांवों की संख्या 539 है। इनमें 358 ग्राम पंचायत के लोग आज भी दूषित जल पीने को मजबूर हैं। 1981 में सरकार ने गांवों में साफ पानी की किल्लत दूर करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना की शुरुआत की। जिन गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब मिली उन्हें योजना से संतृप्त करने का प्लान तैयार हुआ। बाद में जेई/एईएस से प्रभावित गांव भी पाइप पेयजल योजना में शामिल किए गए। विश्व बैंक की मदद से नीर निर्मल योजना शुरू हुई। इससे भी अबतक जिले में 17 ग्राम पंचायतों को ही संतृप्त किया जा सका है।
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कागजों में दे रहे साफ पानी
36 साल में पूरी हुई 181 परियोजनाओं में दर्जनों बंद पड़ी हैं। किसी का पाईप फटा है तो किसी का मोटर ही खराब है। कई गांवों में ऑपरेटर नहीं होने के चलते सबकुछ ठीक होने के बावजूद घरों तक पानी की साप्लाई नहीं दी जा रही है। रामपुर कारखाना ब्लाक के नौतन गांव में वर्ष 2009-10 में पेयजल परियोजना का काम पूरा हुआ। टेस्टिंग के वक्त ही पाईप फट गए। नौ साल गुजरने के बाद भी मरम्मत नहीं हुआ। यही हाल आसपास के गुद्दीजोर, उदयपुरा आदि गांवों का है।
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जिले में पाईप पेयजल योजना का हाल
1189 ग्राम पंचायत जिले में हैं।
- 181 ग्राम पंचायतों में पेयजल परियोजना पूर्ण हो चुकी हैं।
- 57 परियोजना ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किए गए हैं।
- 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
- 17 ग्राम पंचायतों में 50 रुपये यूजर चार्ज वसूले जा रहे हैं।
जहां पानी की गुणवत्ता खराब है और जो गांव जेई/एईएस से प्रभावित हैं उन गांवों को पाईप पेयजल योजना से संतृप्त किया जा रहा है। जहां परियोजना पूर्ण हो रही है उसे मेंटेनेंस के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करने की कार्यवाही की जा रही है।
प्रदीप कुमार, एक्सईएन, जल निगम।