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अफसरों के सामने किसानों ने की हूटिंग
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अफसरों के सामने किसानों ने की हूटिंग
लंबित रेल परियोजना के लिए किसानों से वार्ता करने पहुंचे थे अफसर
अधिकांश किसान बोले, किसान विरोधी है परियोजना, नहीं देंगे जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
भटनी। हथुआ-भटनी रेल परियोजना को लेकर हुई बैठक में किसानों ने हूटिंग की। आधे से अधिक किसान बैठक से उठकर चले गए और किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देने का ऐलान किया। वहीं कुछ किसान वर्तमान सर्किल रेट पर जमीन देने को राजी हुए। सदर तहसीलदार ने जमीन देने वाले किसानों से दो दिनों के अंदर शपथ पत्र देने को कहा।
किसानों के विरोध की वजह से कई वर्षों से हथुआ-भटनी रेल परियोजना प्रभावित है। शासन की सख्ती के बाद डीएम की पहल पर लंबित रेल परियोजना को सुलझाने का प्रयास शुरू किया गया है। गुरुवार को प्रभावित किसानों से वार्ता के लिए सदर तहसीलदार ओमप्रकाश, रेलवे के इंजीनियर विपुल माथुर ने रेलवे के मनोरंजन कक्ष में किसानों से वार्ता की। वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से नियमानुसार मुआवजा देने की बात अफसरों ने कहा, लेकिन अधिकांश किसानों ने इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया। किसान डॉ. रामजी द्विवेदी, महिपाल सिंह, त्रिवेणी यादव, विश्वामित्र, रामकरन तिवारी आदि किसान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि जिन किसानों की जमीन नदी किनारे पड़ रही है। वह जमीन देना चाहते हैं बाकी किसान परियोजना का विरोध कर रहे हैं और करते रहेंगे। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव अपने निजी हित के लिए रेल परियोजना की नींव रखी थी जो किसान विरोधी है। किसानों के हूटिंग और नारेबाजी को देख अफसर सहम गए। वहीं जमीन देने को राजी हुए किसानों से तहसीलदार ने दो दिन में शपथ पत्र देने को कहा। देवरिया सदर के तहसीलदार ओमप्रकाश ने कहा कि किसानों से वार्ता हुई है। कुछ किसान जमीन देने को राजी हुए हैं। कुछ विरोध कर रहे हैं। इसकी रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी।
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लंबित रेल परियोजना के लिए किसानों से वार्ता करने पहुंचे थे अफसर
अधिकांश किसान बोले, किसान विरोधी है परियोजना, नहीं देंगे जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
भटनी। हथुआ-भटनी रेल परियोजना को लेकर हुई बैठक में किसानों ने हूटिंग की। आधे से अधिक किसान बैठक से उठकर चले गए और किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देने का ऐलान किया। वहीं कुछ किसान वर्तमान सर्किल रेट पर जमीन देने को राजी हुए। सदर तहसीलदार ने जमीन देने वाले किसानों से दो दिनों के अंदर शपथ पत्र देने को कहा।
किसानों के विरोध की वजह से कई वर्षों से हथुआ-भटनी रेल परियोजना प्रभावित है। शासन की सख्ती के बाद डीएम की पहल पर लंबित रेल परियोजना को सुलझाने का प्रयास शुरू किया गया है। गुरुवार को प्रभावित किसानों से वार्ता के लिए सदर तहसीलदार ओमप्रकाश, रेलवे के इंजीनियर विपुल माथुर ने रेलवे के मनोरंजन कक्ष में किसानों से वार्ता की। वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से नियमानुसार मुआवजा देने की बात अफसरों ने कहा, लेकिन अधिकांश किसानों ने इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया। किसान डॉ. रामजी द्विवेदी, महिपाल सिंह, त्रिवेणी यादव, विश्वामित्र, रामकरन तिवारी आदि किसान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि जिन किसानों की जमीन नदी किनारे पड़ रही है। वह जमीन देना चाहते हैं बाकी किसान परियोजना का विरोध कर रहे हैं और करते रहेंगे। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव अपने निजी हित के लिए रेल परियोजना की नींव रखी थी जो किसान विरोधी है। किसानों के हूटिंग और नारेबाजी को देख अफसर सहम गए। वहीं जमीन देने को राजी हुए किसानों से तहसीलदार ने दो दिन में शपथ पत्र देने को कहा। देवरिया सदर के तहसीलदार ओमप्रकाश ने कहा कि किसानों से वार्ता हुई है। कुछ किसान जमीन देने को राजी हुए हैं। कुछ विरोध कर रहे हैं। इसकी रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी।
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