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दिल्ली हाईकोर्ट: जिमखाना क्लब पर फिलहाल नहीं चलेगा केंद्र का डंडा, 16 सितंबर तक कार्रवाई पर रोक; सुनवाई तय
Thu, 03 Sep 2026 04:55 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Thu, 03 Sep 2026 04:55 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि 16 सितंबर तक दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। क्लब की बेदखली के नोटिस पर रोक की मांग वाली याचिका पर अदालत अब 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।
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दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि वह दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ 16 सितंबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। यह बयान सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर से बेदखली के संबंध में दिया गया। न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में 29 जून को जारी बेदखली के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई है।
खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की याचिकाएं एक लंबित मुकदमे का हिस्सा हैं। यह मुकदमा भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश को चुनौती देता है। इस आदेश में क्लब की स्थायी लीज डीड समाप्त कर दी गई थी। क्लब को 5 जून तक जमीन वापस करने को कहा गया था। केंद्र ने इसके पीछे "रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने" का आधार बताया था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि पहले दिया गया बयान जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि याचिकाओं पर जवाब और दलीलें पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बेदखली नोटिस पर अंतरिम रोक के मुद्दे को सुनवाई के लिए तैयार बताया। न्यायमूर्ति झिंगन ने दलीलों के लिए अन्य तारीख पर सुनवाई करने की बात कही। उन्होंने क्लब सदस्यों को संपदा अधिकारी के समक्ष जवाब दाखिल करने का सुझाव दिया। अदालत ने मामले को 16 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
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खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की याचिकाएं एक लंबित मुकदमे का हिस्सा हैं। यह मुकदमा भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश को चुनौती देता है। इस आदेश में क्लब की स्थायी लीज डीड समाप्त कर दी गई थी। क्लब को 5 जून तक जमीन वापस करने को कहा गया था। केंद्र ने इसके पीछे "रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने" का आधार बताया था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया।
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उन्होंने कहा कि पहले दिया गया बयान जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि याचिकाओं पर जवाब और दलीलें पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बेदखली नोटिस पर अंतरिम रोक के मुद्दे को सुनवाई के लिए तैयार बताया। न्यायमूर्ति झिंगन ने दलीलों के लिए अन्य तारीख पर सुनवाई करने की बात कही। उन्होंने क्लब सदस्यों को संपदा अधिकारी के समक्ष जवाब दाखिल करने का सुझाव दिया। अदालत ने मामले को 16 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
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लीज समाप्ति और केंद्र का रुख
केंद्र ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि स्थायी लीज समाप्त होने के बाद सरकार को जमीन कब्जे में लेने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। केंद्र ने बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत बेदखली से संबंधित मुकदमे पर दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र प्रतिबंधित है। संपदा अधिकारी की कार्रवाई के संबंध में निषेधाज्ञा जारी करना भी प्रतिबंधित है। केंद्र ने तर्क दिया कि स्थायी लीज डीड एक द्विपक्षीय समझौता था। क्लब का कोई सदस्य इस समझौते का पक्षकार नहीं था। इसलिए वे अधिकारियों को अपने संविदात्मक अधिकारों का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकते।
केंद्र ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि स्थायी लीज समाप्त होने के बाद सरकार को जमीन कब्जे में लेने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। केंद्र ने बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत बेदखली से संबंधित मुकदमे पर दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र प्रतिबंधित है। संपदा अधिकारी की कार्रवाई के संबंध में निषेधाज्ञा जारी करना भी प्रतिबंधित है। केंद्र ने तर्क दिया कि स्थायी लीज डीड एक द्विपक्षीय समझौता था। क्लब का कोई सदस्य इस समझौते का पक्षकार नहीं था। इसलिए वे अधिकारियों को अपने संविदात्मक अधिकारों का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकते।
बेदखली नोटिस और खुराना की चुनौती
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन एलएंडडीओ ने 29 जून को क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया था कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह ने क्लब और परिसर में कब्जा रखने वाले सभी व्यक्तियों को 7 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा था। उन्हें उसी दिन दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। यह कदम केंद्र के 26 मई के बयान के एक महीने से अधिक समय बाद उठाया गया था। केंद्र ने तब कहा था कि वह 5 जून तक क्लब के 27.3 एकड़ परिसर पर जबरन कब्जा नहीं लेगा। खुराना ने अपने मुकदमे में केंद्र के "रक्षा बुनियादी ढांचे" के कारण को "दिखावा" बताया है।
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन एलएंडडीओ ने 29 जून को क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया था कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह ने क्लब और परिसर में कब्जा रखने वाले सभी व्यक्तियों को 7 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा था। उन्हें उसी दिन दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। यह कदम केंद्र के 26 मई के बयान के एक महीने से अधिक समय बाद उठाया गया था। केंद्र ने तब कहा था कि वह 5 जून तक क्लब के 27.3 एकड़ परिसर पर जबरन कब्जा नहीं लेगा। खुराना ने अपने मुकदमे में केंद्र के "रक्षा बुनियादी ढांचे" के कारण को "दिखावा" बताया है।
अंतरिम राहत की मांग
खुराना ने दावा किया कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय जबरन बेदखली का प्रयास है। उनकी याचिका को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। 26 मई को अदालत ने कहा था कि बेदखली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू होने का कोई संकेत नहीं था। इसलिए उस समय अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं थी। खुराना ने अपनी अंतरिम अर्जी में 29 जून के नोटिस को "पूरी तरह गलत" बताया। उन्होंने कहा कि यह समय से पहले लगाए गए अनुमानों पर आधारित है। अर्जी में बेदखली आदेश पर रोक लगाने और क्लब के कब्जे, संचालन और कामकाज की मौजूदा स्थिति बनाए रखने की मांग की गई है।
खुराना ने दावा किया कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय जबरन बेदखली का प्रयास है। उनकी याचिका को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। 26 मई को अदालत ने कहा था कि बेदखली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू होने का कोई संकेत नहीं था। इसलिए उस समय अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं थी। खुराना ने अपनी अंतरिम अर्जी में 29 जून के नोटिस को "पूरी तरह गलत" बताया। उन्होंने कहा कि यह समय से पहले लगाए गए अनुमानों पर आधारित है। अर्जी में बेदखली आदेश पर रोक लगाने और क्लब के कब्जे, संचालन और कामकाज की मौजूदा स्थिति बनाए रखने की मांग की गई है।