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केंद्रीय एजेंसी से कराया जाए प्रियंका हत्या कांड की जांच
Updated Sat, 08 Jul 2017 10:59 PM IST
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सलेमपुर। बहुचर्चित प्रियंका हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराए जाने की मांग सीएम से की गई है। प्रमुख सचिव ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए निर्देश दिया है। सीओ ने आरोपी का बयान दर्ज कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। आरोपी का भाई घटना के पर्दाफाश पर सवाल खड़ा कर रहा है।
कोतवाली क्षेत्र के बिराजमार गांव निवासी बसपा नेता रामअशीष की भतीजी प्रियंका 23 नवंबर 2010 को गांव की एक शादी समारोह में गई थी। वहां से वह गायब हो गई। दूसरे गांव के एक खेत में उसकी लाश मिली। पुलिस इस मामले में बसपा नेता की तहरीर पर अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज कर लिया। उस वक्त प्रदेश में बसपा सरकार थी। कुछ माह तक घटना का पर्दाफाश नहीं हुआ। बसपा नेता का मामला होने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सलेमपुर कोतवाली पहुंच गईं। पूर्व मुख्यमंत्री के सामने प्रियंका की बहन ने तत्कालीन सीओ रत्नाकर को थप्पड़ भी जड़ा था। सीओ और कोतवाल बुद्धा सिंह चौहान को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद एसओजी ने घटना का पर्दाफाश करते हुए गांव के अभिषेक कुशवाहा को जेल भेज दिया था। आरोपी का भाई अश्वनी भगत उसी वक्त से घटना के पर्दाफाश पर सवाल खड़ा करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहा है। 17 मई को पीड़ित ने सीएम को गोरखपुर मंदिर पर शिकायती पत्र दिया था। इस पत्र पर सीओ ने अश्वनी का ब्यान दर्ज कर प्रमुख सचिव को भेजा है। उसी समय से बसपा नेता को सुरक्षा के लिए दो सुरक्षा गार्ड कोर्ट के आदेश में मिले है जो बरकरार है।
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कोतवाली क्षेत्र के बिराजमार गांव निवासी बसपा नेता रामअशीष की भतीजी प्रियंका 23 नवंबर 2010 को गांव की एक शादी समारोह में गई थी। वहां से वह गायब हो गई। दूसरे गांव के एक खेत में उसकी लाश मिली। पुलिस इस मामले में बसपा नेता की तहरीर पर अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज कर लिया। उस वक्त प्रदेश में बसपा सरकार थी। कुछ माह तक घटना का पर्दाफाश नहीं हुआ। बसपा नेता का मामला होने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सलेमपुर कोतवाली पहुंच गईं। पूर्व मुख्यमंत्री के सामने प्रियंका की बहन ने तत्कालीन सीओ रत्नाकर को थप्पड़ भी जड़ा था। सीओ और कोतवाल बुद्धा सिंह चौहान को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद एसओजी ने घटना का पर्दाफाश करते हुए गांव के अभिषेक कुशवाहा को जेल भेज दिया था। आरोपी का भाई अश्वनी भगत उसी वक्त से घटना के पर्दाफाश पर सवाल खड़ा करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहा है। 17 मई को पीड़ित ने सीएम को गोरखपुर मंदिर पर शिकायती पत्र दिया था। इस पत्र पर सीओ ने अश्वनी का ब्यान दर्ज कर प्रमुख सचिव को भेजा है। उसी समय से बसपा नेता को सुरक्षा के लिए दो सुरक्षा गार्ड कोर्ट के आदेश में मिले है जो बरकरार है।
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