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चुनावी वादा बनकर रह गया हल्दी उद्योग
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चुनावी जुमला बनकर रह गया हल्दी उद्योग
भाटपाररानी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर होती है हल्दी की खेती
हल्दी की खेती और बिक्री को प्रोत्साहन देने की थी योजना
बघेल नवीन
भाटपाररानी। लोकसभा के चुनावी समर में देश-प्रदेश के विकास की बातें तो खूब हो रही हैं, लेकिन स्थानीय मुद्दों को भूला दिया गया है। चुनाव लड़ने वालों का इन पर न तो कोई ध्यान है और न ही कहीं जिक्र। भाटपाररानी क्षेत्र का ऐसा ही एक मुद्दा है हल्दी उद्योग का। वर्षों से घोषणाओं के सब्जबाग जी रहे किसानों के लिए यह सिर्फ एक जुमला बनकर रह गया है। उद्योग के माध्यम से हल्दी की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की खुशहाली बनाने का दावा चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। भाटपाररानी तहसील क्षेत्र में हल्दी की खेती व्यापक स्तर पर होती है। हजारों किसान इससे जुड़े हुए हैं। खेतों में उत्पादित हल्दी बेचकर ही वह अपनी आजीविका चलाते हैं। स्थानीय स्तर पर कोई उद्योग या विपणन का केंद्र नहीं होने से उन्हें गोरखपुर या बिहार के बाजारों में उपज लेकर जाना पड़ता है, जहां व्यापारियों की मर्जी पर दाम मिलता है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए ही पिछले चुनावों में इस क्षेत्र में हल्दी उद्योग लगाने का वादा हुआ था। सपने तो ऐसे दिखाए गए कि लगा किसानों की तकदीर बदल जाएगी। अरसे से किसान दिन बहुरने की आस लगाए हैं, मगर नेताओं का वादा सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह गया।
क्या कहते हैं स्थानीय किसान
कृषि स्नातक और युवा किसान राकेश कुशवाहा कहते हैं कि लागत की अपेक्षा हल्दी की फसल अन्य फसलों से मुनाफे वाली है, मगर स्थानीय स्तर पर मंडी न होने से सीधा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। बुजुर्ग किसान रामनारायण कुशवाहा कहते हैं कि अरसे से सुनते आ रहे हैं कि हल्दी उद्योग लगेगा, मगर कब यह भविष्य के गर्भ में है। बंगरा बाजार निवासी सुनील यादव कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी भागवत भगत खजड़ी वाले की स्मृति में कृषि मेला लगना शुरू हुआ। इस मेले में स्थानीय किसानों की मांग पर हल्दी उद्योग लगाए जाने का आश्वासन मिला। मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही का भी दौरा हो चुका है, लेकिन हल्दी उद्योग के स्थापना की घोषणा कभी परवान नहीं चढ़ी।
राष्ट्रीय मुद्दों में खो गए स्थानीय मुद्दे
सांसद रवींद्र कुशवाहा जहां दूसरी बार जीतने के लिए जोर लगाए हैं। प्रत्येक सभा में प्रधानमंत्री मोदी को करिश्माई नेता बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशों में देश का सम्मान बढ़ने की बात कहते हैं वहीं गठबंधन प्रत्याशी आरएस कुशवाहा बेरोजगारी, नोटबंदी जीएसटी जैसे मुद्दे उठाकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने में लगे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी और वाराणसी के पूर्व सांसद डॉ.राजेश मिश्र कहते हैं कि जातिवाद को लेकर यह क्षेत्र पिछड़ा है। उनका दावा है कि जिस प्रकार प्रत्येक वर्ग से समर्थन मिल रहा है सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी।
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भाटपाररानी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर होती है हल्दी की खेती
हल्दी की खेती और बिक्री को प्रोत्साहन देने की थी योजना
बघेल नवीन
भाटपाररानी। लोकसभा के चुनावी समर में देश-प्रदेश के विकास की बातें तो खूब हो रही हैं, लेकिन स्थानीय मुद्दों को भूला दिया गया है। चुनाव लड़ने वालों का इन पर न तो कोई ध्यान है और न ही कहीं जिक्र। भाटपाररानी क्षेत्र का ऐसा ही एक मुद्दा है हल्दी उद्योग का। वर्षों से घोषणाओं के सब्जबाग जी रहे किसानों के लिए यह सिर्फ एक जुमला बनकर रह गया है। उद्योग के माध्यम से हल्दी की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की खुशहाली बनाने का दावा चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। भाटपाररानी तहसील क्षेत्र में हल्दी की खेती व्यापक स्तर पर होती है। हजारों किसान इससे जुड़े हुए हैं। खेतों में उत्पादित हल्दी बेचकर ही वह अपनी आजीविका चलाते हैं। स्थानीय स्तर पर कोई उद्योग या विपणन का केंद्र नहीं होने से उन्हें गोरखपुर या बिहार के बाजारों में उपज लेकर जाना पड़ता है, जहां व्यापारियों की मर्जी पर दाम मिलता है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए ही पिछले चुनावों में इस क्षेत्र में हल्दी उद्योग लगाने का वादा हुआ था। सपने तो ऐसे दिखाए गए कि लगा किसानों की तकदीर बदल जाएगी। अरसे से किसान दिन बहुरने की आस लगाए हैं, मगर नेताओं का वादा सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह गया।
क्या कहते हैं स्थानीय किसान
कृषि स्नातक और युवा किसान राकेश कुशवाहा कहते हैं कि लागत की अपेक्षा हल्दी की फसल अन्य फसलों से मुनाफे वाली है, मगर स्थानीय स्तर पर मंडी न होने से सीधा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। बुजुर्ग किसान रामनारायण कुशवाहा कहते हैं कि अरसे से सुनते आ रहे हैं कि हल्दी उद्योग लगेगा, मगर कब यह भविष्य के गर्भ में है। बंगरा बाजार निवासी सुनील यादव कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी भागवत भगत खजड़ी वाले की स्मृति में कृषि मेला लगना शुरू हुआ। इस मेले में स्थानीय किसानों की मांग पर हल्दी उद्योग लगाए जाने का आश्वासन मिला। मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही का भी दौरा हो चुका है, लेकिन हल्दी उद्योग के स्थापना की घोषणा कभी परवान नहीं चढ़ी।
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राष्ट्रीय मुद्दों में खो गए स्थानीय मुद्दे
सांसद रवींद्र कुशवाहा जहां दूसरी बार जीतने के लिए जोर लगाए हैं। प्रत्येक सभा में प्रधानमंत्री मोदी को करिश्माई नेता बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशों में देश का सम्मान बढ़ने की बात कहते हैं वहीं गठबंधन प्रत्याशी आरएस कुशवाहा बेरोजगारी, नोटबंदी जीएसटी जैसे मुद्दे उठाकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने में लगे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी और वाराणसी के पूर्व सांसद डॉ.राजेश मिश्र कहते हैं कि जातिवाद को लेकर यह क्षेत्र पिछड़ा है। उनका दावा है कि जिस प्रकार प्रत्येक वर्ग से समर्थन मिल रहा है सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी।
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