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Deoria News: रोजाना 20 टन दाल की हो रही खपत...दूसरी जगहों से होती है पूर्ति
Fri, 14 Nov 2025 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 14 Nov 2025 01:02 AM IST
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खुली बिक रही दाल, फोटो: संवाद
गोरखपुर। जिले में रोजाना करीब पांच टन दाल की खपत है, जबकि लगभग 15 टन दाल यहां से गोरखपुर समेत अन्य जगहों पर भेजी जाती है। हालांकि इसके सापेक्ष जिले में उत्पादन की स्थिति बहुत खराब है। पूरे जिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही अरहर की बुआई होती है। वहीं मसूर-मटर और चना मिलाकर भी यह रकबा चार हजार हेक्टेयर के आसपास ही बैठता है। ऐसे में जिले में मध्य प्रदेश के कटनी और आसपास के इलाकों से दाल आ रही है।
देवरिया शहर समेत जिले में 25-30 बड़े अनाज विक्रेता हैं। शहर से लेकर गांव तक हर घर में दाल की खपत है। इसलिए इसकी बिक्री भी अधिक है। इन दिनों मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर दाल की आवक है, जिससे रेट गिरा हुआ है।
थोक में दाल 90-100 रुपये प्रति किलोग्राम है। फुटकर में भी इसकी कीमत 110-115 रुपये प्रति किलोग्राम ही है। दाल विक्रेताओं का कहना है कि सबसे अधिक खपत अरहर दाल की है।
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तरकुलवा क्षेत्र के किसान जितेंद्र मिश्रा बताते हैं कि महज दो दशक पहले तक देवरिया जिला दाल का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र था। बांगर में अरहर तो भाठ मिट्टी में मसूर और मटर की खेती होती थी। हर किसान अपने खाने भर की दाल अपने खेत में ही उगाता था लेकिन अब ऐसे गांव हैं जहां एक कट्ठा भी दलहन नहीं बोई जाती।
कृषि विभाग के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह बताते हैं कि दाल का रकबा पांच हजार हेक्टेयर से भी कम है। विभाग की तरफ से प्रोत्साहन स्कीम के तहत किसानों को प्रेरित किया जाता है लेकिन लोग दलहन की बजाय अन्य फसलों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि जिले में रोजाना करीब 20 टन दाल की खपत होती है। इसमें स्थानीय खपत के अलावा बाहर भी भेजी जाती है। वहीं बाहर से बड़ी मात्रा में दाल मंगाई भी जा रही है। जिले में करीब चार से पांच हजार क्विंटल ही दाल का उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत इससे कहीं ज्यादा है।
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मध्य प्रदेश से सीधे मंगा रहे व्यापारी
शहर के गल्ला व्यापारी और उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष शक्ति गुप्ता का कहना है कि दाल की खपत अधिक है लेकिन स्थानीय स्तर पर आवक नहीं है। अधिकांश दाल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आती है। देवरिया के व्यापारी सीधे माल मंगाते हैं। अकेले देवरिया की मंडी में रोजाना तीन से चार ट्रक दाल आती है। वहीं सलेमपुर समेत अन्य कस्बों के बड़े व्यापारी भी सीधे माल मंगाते हैं।
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देवरिया शहर समेत जिले में 25-30 बड़े अनाज विक्रेता हैं। शहर से लेकर गांव तक हर घर में दाल की खपत है। इसलिए इसकी बिक्री भी अधिक है। इन दिनों मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर दाल की आवक है, जिससे रेट गिरा हुआ है।
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थोक में दाल 90-100 रुपये प्रति किलोग्राम है। फुटकर में भी इसकी कीमत 110-115 रुपये प्रति किलोग्राम ही है। दाल विक्रेताओं का कहना है कि सबसे अधिक खपत अरहर दाल की है।
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तरकुलवा क्षेत्र के किसान जितेंद्र मिश्रा बताते हैं कि महज दो दशक पहले तक देवरिया जिला दाल का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र था। बांगर में अरहर तो भाठ मिट्टी में मसूर और मटर की खेती होती थी। हर किसान अपने खाने भर की दाल अपने खेत में ही उगाता था लेकिन अब ऐसे गांव हैं जहां एक कट्ठा भी दलहन नहीं बोई जाती।
कृषि विभाग के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह बताते हैं कि दाल का रकबा पांच हजार हेक्टेयर से भी कम है। विभाग की तरफ से प्रोत्साहन स्कीम के तहत किसानों को प्रेरित किया जाता है लेकिन लोग दलहन की बजाय अन्य फसलों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि जिले में रोजाना करीब 20 टन दाल की खपत होती है। इसमें स्थानीय खपत के अलावा बाहर भी भेजी जाती है। वहीं बाहर से बड़ी मात्रा में दाल मंगाई भी जा रही है। जिले में करीब चार से पांच हजार क्विंटल ही दाल का उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत इससे कहीं ज्यादा है।
मध्य प्रदेश से सीधे मंगा रहे व्यापारी
शहर के गल्ला व्यापारी और उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष शक्ति गुप्ता का कहना है कि दाल की खपत अधिक है लेकिन स्थानीय स्तर पर आवक नहीं है। अधिकांश दाल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आती है। देवरिया के व्यापारी सीधे माल मंगाते हैं। अकेले देवरिया की मंडी में रोजाना तीन से चार ट्रक दाल आती है। वहीं सलेमपुर समेत अन्य कस्बों के बड़े व्यापारी भी सीधे माल मंगाते हैं।