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कस्तूरबा से बर्खास्त दो अध्यापिकाओं को मिला स्टे-आर्डर
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कस्तूरबा से बर्खास्त दो अध्यापिकाओं को मिला स्टे-आर्डर
बीएसए बोले-हम लोगों का पक्ष नहीं सुना गया, दाखिल करेंगे काउंटर
विभाग को प्रामाणिक कापी मिलने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर बर्खास्त की गईं दो अध्यापिकाओं को हाईकोर्ट से स्टे-आर्डर मिल गया है। इन दोनों की ओर से इसे बेसिक कार्यालय में रिसीव करा दिया गया है। हालांकि विभाग इसकी प्रामाणिक कापी मिलने का इंतजार कर रहा है। उधर, निर्णय के विरोध में बीएसए काउंटर दाखिल करने की बात कह रहे हैं।
अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद प्रदेश स्तर पर कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सत्यापन के बाद कूटरचित प्रमाण पत्र लगाने के आरोप में 15 जुलाई को 14 शिक्षक-शिक्षिकाओं की संविदा समाप्त कर इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। एक सप्ताह बाद सभी को आरोपित करते हुए कोतवाली पुलिस में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा ने तहरीर दी थी। इसके बाद इन सभी पर मुकदमा भी दर्ज हो गया। उधर, निर्णय के विरोध में कई अध्यापिकाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने गौरीबाजार की एक पूर्णकालिक शिक्षिका की बर्खास्तगी पर और रामपुर कारखाना की पूर्व वार्डेन की गिरफ्तारी का स्टे-आर्डर का आदेश जारी किया है। अध्यापिकाओं की ओर से बेसिक कार्यालय में इसे उपलब्ध भी करा दिया गया है।
बुधवार को एक शिक्षिका बेसिक कार्यालय गई तो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उनका स्टे-आर्डर लेने से कर्मचारियों ने मना कर दिया। इस पर कुछ देर तक हंगामे की भी नौबत बनी। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा टीएन पांडेय ने बताया कि उन्हें किसी शिक्षिका ने न्यायालय का कोई आदेश नहीं रिसीव कराया है। उधर, बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि एक शिक्षिका का स्टे-आर्डर विभाग को मिला है। वह भी व्हाट्सएप पर है। इसकी प्रमाणित छायाप्रति अभी मिलनी बाकी है। इस मामले में विभाग का पक्ष नहीं सुना गया है। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों से वार्ता की है। निर्णय के विरोध में काउंटर दाखिल किया जाएगा।
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बीएसए बोले-हम लोगों का पक्ष नहीं सुना गया, दाखिल करेंगे काउंटर
विभाग को प्रामाणिक कापी मिलने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर बर्खास्त की गईं दो अध्यापिकाओं को हाईकोर्ट से स्टे-आर्डर मिल गया है। इन दोनों की ओर से इसे बेसिक कार्यालय में रिसीव करा दिया गया है। हालांकि विभाग इसकी प्रामाणिक कापी मिलने का इंतजार कर रहा है। उधर, निर्णय के विरोध में बीएसए काउंटर दाखिल करने की बात कह रहे हैं।
अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद प्रदेश स्तर पर कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सत्यापन के बाद कूटरचित प्रमाण पत्र लगाने के आरोप में 15 जुलाई को 14 शिक्षक-शिक्षिकाओं की संविदा समाप्त कर इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। एक सप्ताह बाद सभी को आरोपित करते हुए कोतवाली पुलिस में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा ने तहरीर दी थी। इसके बाद इन सभी पर मुकदमा भी दर्ज हो गया। उधर, निर्णय के विरोध में कई अध्यापिकाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने गौरीबाजार की एक पूर्णकालिक शिक्षिका की बर्खास्तगी पर और रामपुर कारखाना की पूर्व वार्डेन की गिरफ्तारी का स्टे-आर्डर का आदेश जारी किया है। अध्यापिकाओं की ओर से बेसिक कार्यालय में इसे उपलब्ध भी करा दिया गया है।
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बुधवार को एक शिक्षिका बेसिक कार्यालय गई तो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उनका स्टे-आर्डर लेने से कर्मचारियों ने मना कर दिया। इस पर कुछ देर तक हंगामे की भी नौबत बनी। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा टीएन पांडेय ने बताया कि उन्हें किसी शिक्षिका ने न्यायालय का कोई आदेश नहीं रिसीव कराया है। उधर, बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि एक शिक्षिका का स्टे-आर्डर विभाग को मिला है। वह भी व्हाट्सएप पर है। इसकी प्रमाणित छायाप्रति अभी मिलनी बाकी है। इस मामले में विभाग का पक्ष नहीं सुना गया है। इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों से वार्ता की है। निर्णय के विरोध में काउंटर दाखिल किया जाएगा।
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