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रेलवे अस्पताल में सुविधाओं का टोटा
Updated Sun, 11 Jun 2017 06:39 PM IST
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देवरिया। यात्रियों और रेल कर्मचारियों के अचानक बीमार पड़ने और उनके इलाज के लिए स्टेशन परिसर में स्थापित रेलवे अस्पताल हांथी का दांत साबित हो रहा है। यात्री हो या रेल कर्मचारी उनके इलाज के लिए कोई खास बंदोबस्त नहीं है। लिहाजा यह अस्पताल अक्सर बंद ही रहता है। ऐसे में ट्रेन में जहर के खुरानी शिकार, ट्रेन दुर्घटना में घायल यात्रियों को जीआरपी व आरपीएफ इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराते हैं।
रेल विभाग ने यात्रियों व रेल कर्मचारियों के लिए सदर रेलवे स्टेशन पर अस्पताल तो स्थापित कर दिया। लेकिन व्यवस्था वर्षों पुरानी है। स्टेशन से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रियों का आना-जाना होता है। ट्रेन में जहर खुरानी का मामला हो या दूर-दराज से यात्रा करने वाले यात्री की अचानक तबीयत खराब होने पर रेलवे में अस्पताल में इलाज कराना संभव नही होता है क्योंकि अस्पताल अक्सर बंद ही रहता है। ऐसे में प्राइवेट वाहनों से जीआरपी व आरपीएफ के जवान इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाते हैं। रेलवे अस्पताल में एक एंबुलेंस तक की व्यवस्था नही है। अस्पताल में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब ब्वाय के अलावा सफाई कर्मचारी तैनात है। फिर भी अस्पताल अक्सर बंद रहता है। इस संबंध में रेलवे अस्पताल के चिकित्सक एके गोछाय ने बताया कि रेलवे अस्पताल का क्षेत्र कुसम्ही आउटर से अहिल्यापुर आउटर तक है। दोनों आउटर के बीच पड़ने वाले छोटे बड़े स्टेशनों की चिकित्सकीय व्यवस्था इसी अस्पताल से चलता है। सदर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर चिकित्सकीय इलाज की भी व्यवस्था है। रेल कर्मचारियों की तबीयत गंभीर होने पर उन्हें वाराणसी या फिर गोरखपुर रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।
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रेल विभाग ने यात्रियों व रेल कर्मचारियों के लिए सदर रेलवे स्टेशन पर अस्पताल तो स्थापित कर दिया। लेकिन व्यवस्था वर्षों पुरानी है। स्टेशन से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रियों का आना-जाना होता है। ट्रेन में जहर खुरानी का मामला हो या दूर-दराज से यात्रा करने वाले यात्री की अचानक तबीयत खराब होने पर रेलवे में अस्पताल में इलाज कराना संभव नही होता है क्योंकि अस्पताल अक्सर बंद ही रहता है। ऐसे में प्राइवेट वाहनों से जीआरपी व आरपीएफ के जवान इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाते हैं। रेलवे अस्पताल में एक एंबुलेंस तक की व्यवस्था नही है। अस्पताल में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब ब्वाय के अलावा सफाई कर्मचारी तैनात है। फिर भी अस्पताल अक्सर बंद रहता है। इस संबंध में रेलवे अस्पताल के चिकित्सक एके गोछाय ने बताया कि रेलवे अस्पताल का क्षेत्र कुसम्ही आउटर से अहिल्यापुर आउटर तक है। दोनों आउटर के बीच पड़ने वाले छोटे बड़े स्टेशनों की चिकित्सकीय व्यवस्था इसी अस्पताल से चलता है। सदर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर चिकित्सकीय इलाज की भी व्यवस्था है। रेल कर्मचारियों की तबीयत गंभीर होने पर उन्हें वाराणसी या फिर गोरखपुर रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।
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