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जिले में यूरिया की किल्लत बरकरार
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देवरिया। यूरिया की किल्लत से जिले के किसान परेशान हैं। समितियों पर पहुंचने वाला यूरिया ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। वहीं जिम्मेदार लक्ष्य से अधिक जिले में यूरिया आने का दावा कर रहे हैं। यूरिया की कमी से अधिकांश समितियों पर ताला लटक रहा है।
जिले में 1330 टन मीट्रिक टन यूरिया का रैक 28 जनवरी को पहुंचा। 200-200 बोरी यूरिया 101 समितियों पर भेजा गया। इसमें कई ऐसी साधन सहकारी समितियां है, जहां यूरिया एलाट होने के बाद आज तक नहीं पहुंचा है। कोऑपरेटिव विभाग की ओर से 101 साधन समितियों, एक गन्ना विभाग की समिति को, इफको बाजार को 6124 मीट्रिक टन, आइएफडीसी को 200 मीट्रिक टन, यूरिया एलाट किया गया। एक समितियों पर दी गई 200 बोरी यूरिया ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। ट्रक पहुंचते ही 200 बोरी यूरिया एक घंटे में बंट गया। किसानों का दबाव इस कदर समिति के सचिवों पर हैं कि वह गोदाम पर जाने से कन्नी काट रहे हैं। बुधवार को जिला कृषि अधिकारी और कोआपरेटिव एआर रामपुर कारखाना समेत कई समितियों का निरीक्षण किया। लेकिन अधिकांश समिति यूरिया के अभाव में बंद मिला। वहीं लार ब्लॉक के रामनगर साधन सहकारी समिति पर कई बार यूरिया विभाग की ओर से एलाट किया गया है। लेकिन आज तक रामनगर समिति पर यूरिया का वितरण सचिव नहीं किया है। किसानों का आरोप है कि सचिव के पास बौरडीह और रामनगर समिति का चार्ज है। विभागीय अफसरों की मिलीभगत से बौरडीह समिति पर रामनगर का यूरिया भी वितरण करता है। वहीं रोपन छपरा साधन सहकारी समिति कई दिनों से यूरिया नहीं होने से बंद हैं। इसके अलावा कुसहरी, लाहीपार, उच्चका गांव, गौर कोठी और सलेमपुर ब्लॉक के कई समितियों पर यूरिया नहीं है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी मोहम्मद मुजम्मिल ने बताया कि जो यूरिया आया था। उसे समितियों व अन्य केंद्रों पर भेजा गया। अभी भी यूरिया की किल्लत है। तीन फरवरी को यूरिया का रैक आते ही अन्य समितियों पर भेजा जाएगा।
लक्ष्य से अधिक मिला यूरिया, कहां गया
रबी के लिए जिले में 31501 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष 37848.35 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। बावजूद यूरिया की किल्लत कम नहीं हो रही है। इसको लेकर जिम्मेदार अफसर भी परेशान हैं।
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समितियों पर यूरिया भेजने में मनमानी
कोआपरेटिव विभाग से समितियों को यूरिया एलाट कर दिया जाता है। डीसीएफ विभाग की जिम्मेदारी समितियों पर यूरिया भेजने की है। डीसीएफ कार्यालय पर तैनात एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की मनमानी के कारण समितियों पर समय से यूरिया नहीं पहुंच रहा है। इसकी शिकायत भी किसानों से दर्ज कराई है।
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जिले में 1330 टन मीट्रिक टन यूरिया का रैक 28 जनवरी को पहुंचा। 200-200 बोरी यूरिया 101 समितियों पर भेजा गया। इसमें कई ऐसी साधन सहकारी समितियां है, जहां यूरिया एलाट होने के बाद आज तक नहीं पहुंचा है। कोऑपरेटिव विभाग की ओर से 101 साधन समितियों, एक गन्ना विभाग की समिति को, इफको बाजार को 6124 मीट्रिक टन, आइएफडीसी को 200 मीट्रिक टन, यूरिया एलाट किया गया। एक समितियों पर दी गई 200 बोरी यूरिया ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। ट्रक पहुंचते ही 200 बोरी यूरिया एक घंटे में बंट गया। किसानों का दबाव इस कदर समिति के सचिवों पर हैं कि वह गोदाम पर जाने से कन्नी काट रहे हैं। बुधवार को जिला कृषि अधिकारी और कोआपरेटिव एआर रामपुर कारखाना समेत कई समितियों का निरीक्षण किया। लेकिन अधिकांश समिति यूरिया के अभाव में बंद मिला। वहीं लार ब्लॉक के रामनगर साधन सहकारी समिति पर कई बार यूरिया विभाग की ओर से एलाट किया गया है। लेकिन आज तक रामनगर समिति पर यूरिया का वितरण सचिव नहीं किया है। किसानों का आरोप है कि सचिव के पास बौरडीह और रामनगर समिति का चार्ज है। विभागीय अफसरों की मिलीभगत से बौरडीह समिति पर रामनगर का यूरिया भी वितरण करता है। वहीं रोपन छपरा साधन सहकारी समिति कई दिनों से यूरिया नहीं होने से बंद हैं। इसके अलावा कुसहरी, लाहीपार, उच्चका गांव, गौर कोठी और सलेमपुर ब्लॉक के कई समितियों पर यूरिया नहीं है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी मोहम्मद मुजम्मिल ने बताया कि जो यूरिया आया था। उसे समितियों व अन्य केंद्रों पर भेजा गया। अभी भी यूरिया की किल्लत है। तीन फरवरी को यूरिया का रैक आते ही अन्य समितियों पर भेजा जाएगा।
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लक्ष्य से अधिक मिला यूरिया, कहां गया
रबी के लिए जिले में 31501 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष 37848.35 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। बावजूद यूरिया की किल्लत कम नहीं हो रही है। इसको लेकर जिम्मेदार अफसर भी परेशान हैं।
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समितियों पर यूरिया भेजने में मनमानी
कोआपरेटिव विभाग से समितियों को यूरिया एलाट कर दिया जाता है। डीसीएफ विभाग की जिम्मेदारी समितियों पर यूरिया भेजने की है। डीसीएफ कार्यालय पर तैनात एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की मनमानी के कारण समितियों पर समय से यूरिया नहीं पहुंच रहा है। इसकी शिकायत भी किसानों से दर्ज कराई है।