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स्कूलों की बाउंड्री निर्माण में खेल
Updated Sat, 29 Sep 2018 10:25 PM IST
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स्कूलों की बाउंड्री निर्माण में हो रहा ‘खेल’
खिड़की के सामने खड़ी कर दी गई ऊंची बाउंड्री तो कहीं रोशनदान कर दिया बंद
पुरानी बाउंड्री को ही प्लास्टर कराकर नए निर्माण का दे दिया स्वरूप
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। परिषदीय स्कूलों की बाउंड्री बनाने की आड़ में लूट का नया खेल उजागर हुआ है। कई स्कूलों मेें खिड़की के सामने ऊंची बाउंड्री खड़ी कर दी गई है तो कहीं पुरानी बाउंड्री को ही थोड़ा ऊंचा कराकर नए निर्माण का धन ले लिया गया है। यही नहीं चहेतों को लाभ दिलाने के मकसद से स्कूल की भूमि के काफी अंदर ही बाउंड्री बनवाई जा रही है। आईजीआरएस पोर्टल पर आई शिकायत की जांच में पहुंचे शिक्षा अधिकारी शनिवार को स्कूलों की यह स्थिति देख भौचक रह गए।
शासन ने ग्राम पंचायतों को कायाकल्प योजना के जरिए परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 14वें वित्त की धनराशि से ग्राम पंचायत विद्यालय में बाउंड्री निर्माण, टाइल्स, रंग-रोगन सहित अन्य जरूरी कार्य करा सकती है। इसके लिए बजट की कोई सीमा नहीं है। शासन की इस छूट का लाभ पाकर न सिर्फ सरकारी धन को हड़प किया जा रहा है, बल्कि नियम-कानून भी दरकिनार कर दिए गए हैं। कई स्कूलों की बाउंड्री नौ इंच में 10 से 12 फीट ऊंची करा दी गई है। आलम यह है कि इससे विद्यालयों के बाहरी हिस्से में लगी खिड़की-रोशनदान बंद हो गए हैं। कई स्थानों पर तो खिड़की बंद होने से कमरों में घना अंधेरा छा गया है। यहीं नहीं बिना पैमाइश कराए ही बाउंड्री का निर्माण हो रहा है। इसका लाभ पास-पड़ोस के दूसरे मकान व खेत स्वामियों को मिल रहा है। जिम्मेदारों से मिलीभगत कर विद्यालय की भूमि अपने हिस्से में मिलाने में कामयाब हो रहे हैं। शनिवार को देसही देवरिया ब्लॉक में निरीक्षण में पहुंचे बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने कई स्कूलों में यह हाल देखा तो भौचक रह गए। गौर फरमाने वाली बात रही कि इस अनियमितता पर स्कूल स्टॉफ भी पूरी तरह मौन साधे हुए है। बीईओ ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी है। बीईओ ने बताया कि बाउंड्री का मकसद विद्यालय की भूमि को सुरक्षित करना था, लेकिन निरीक्षण के बाद स्थिति ठीक उल्टी दिख रही है। इस बारे में बीएसए व बीडीओ के अलावा एसडीएम को भी पत्र लिखा जा रहा है, ताकि पैमाइश के बाद ही बाउंड्री बनाने की अनुमति दी जाए।
स्कूलों की स्थिति देख हैरान रह गए अफसर
देसही देवरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मुंडेरा उर्फ बलुवही में विद्यालय भवन से सटाकर बाउंड्री का निर्माण किया गया है। बाउंड्री इतनी ऊंची है कि खिड़की-रोशनदान बंद हो गए हैं। बताते हैं कि यहां तैनात एक शिक्षक की भूमि से विद्यालय से सटे है। ऐसे में शिक्षक को भूमि का भी लाभ देने का अंदेशा जाहिर किया गया है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय शाहजहांपुर में भी 8-10 फीट तक ऊंची बाउंड्री विद्यालय भवन से सटाकर बनवाई गई है। एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में पहले चार फीट ऊंची बाउंड्री थी। पुरानी बाउंड्री को ही थोड़ा ऊंचा कराकर प्लास्टर करा दिया गया है। कागज में पूरी बाउंड्री नई दर्शाई गई है। ब्लाक क्षेत्र में ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं।
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अन्य ब्लॉकों में भी है हुई है गड़बड़ी
बाउंड्रीवाल बनाने की आड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सिर्फ किसी एक ब्लॉक का नहीं है। पिछले दिनों बरहज के एक विद्यालय में भी पुरानी बाउंड्रीवाल को ही प्लास्टर कराकर नया दिखाते हुए धन निकालने का मामला आया था। सलेमपुर, भटनी, भाटपाररानी सहित अन्य ब्लॉकों में भी ऐसे कई उदाहरण हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कायाकल्प योजना के तहत बजट की सीमा तय नहीं होने से प्रधान मनमाने ढंग से काम करा रहे हैं, जिसकी मॉनिटरिंग भी नहीं की जा रही।
विद्यालयों की बाउंड्री व अन्य निर्माण का जिम्मा ग्राम पंचायतों को ही सौंपा गया है। वह स्थानीय आवश्यकतानुसार निर्माण करा सकते हैं। विभाग की ओर से इसका कोई मानक तय नहीं है।
- माधवजी तिवारी, बीएसए।
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खिड़की के सामने खड़ी कर दी गई ऊंची बाउंड्री तो कहीं रोशनदान कर दिया बंद
पुरानी बाउंड्री को ही प्लास्टर कराकर नए निर्माण का दे दिया स्वरूप
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। परिषदीय स्कूलों की बाउंड्री बनाने की आड़ में लूट का नया खेल उजागर हुआ है। कई स्कूलों मेें खिड़की के सामने ऊंची बाउंड्री खड़ी कर दी गई है तो कहीं पुरानी बाउंड्री को ही थोड़ा ऊंचा कराकर नए निर्माण का धन ले लिया गया है। यही नहीं चहेतों को लाभ दिलाने के मकसद से स्कूल की भूमि के काफी अंदर ही बाउंड्री बनवाई जा रही है। आईजीआरएस पोर्टल पर आई शिकायत की जांच में पहुंचे शिक्षा अधिकारी शनिवार को स्कूलों की यह स्थिति देख भौचक रह गए।
शासन ने ग्राम पंचायतों को कायाकल्प योजना के जरिए परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 14वें वित्त की धनराशि से ग्राम पंचायत विद्यालय में बाउंड्री निर्माण, टाइल्स, रंग-रोगन सहित अन्य जरूरी कार्य करा सकती है। इसके लिए बजट की कोई सीमा नहीं है। शासन की इस छूट का लाभ पाकर न सिर्फ सरकारी धन को हड़प किया जा रहा है, बल्कि नियम-कानून भी दरकिनार कर दिए गए हैं। कई स्कूलों की बाउंड्री नौ इंच में 10 से 12 फीट ऊंची करा दी गई है। आलम यह है कि इससे विद्यालयों के बाहरी हिस्से में लगी खिड़की-रोशनदान बंद हो गए हैं। कई स्थानों पर तो खिड़की बंद होने से कमरों में घना अंधेरा छा गया है। यहीं नहीं बिना पैमाइश कराए ही बाउंड्री का निर्माण हो रहा है। इसका लाभ पास-पड़ोस के दूसरे मकान व खेत स्वामियों को मिल रहा है। जिम्मेदारों से मिलीभगत कर विद्यालय की भूमि अपने हिस्से में मिलाने में कामयाब हो रहे हैं। शनिवार को देसही देवरिया ब्लॉक में निरीक्षण में पहुंचे बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने कई स्कूलों में यह हाल देखा तो भौचक रह गए। गौर फरमाने वाली बात रही कि इस अनियमितता पर स्कूल स्टॉफ भी पूरी तरह मौन साधे हुए है। बीईओ ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी है। बीईओ ने बताया कि बाउंड्री का मकसद विद्यालय की भूमि को सुरक्षित करना था, लेकिन निरीक्षण के बाद स्थिति ठीक उल्टी दिख रही है। इस बारे में बीएसए व बीडीओ के अलावा एसडीएम को भी पत्र लिखा जा रहा है, ताकि पैमाइश के बाद ही बाउंड्री बनाने की अनुमति दी जाए।
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स्कूलों की स्थिति देख हैरान रह गए अफसर
देसही देवरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मुंडेरा उर्फ बलुवही में विद्यालय भवन से सटाकर बाउंड्री का निर्माण किया गया है। बाउंड्री इतनी ऊंची है कि खिड़की-रोशनदान बंद हो गए हैं। बताते हैं कि यहां तैनात एक शिक्षक की भूमि से विद्यालय से सटे है। ऐसे में शिक्षक को भूमि का भी लाभ देने का अंदेशा जाहिर किया गया है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय शाहजहांपुर में भी 8-10 फीट तक ऊंची बाउंड्री विद्यालय भवन से सटाकर बनवाई गई है। एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में पहले चार फीट ऊंची बाउंड्री थी। पुरानी बाउंड्री को ही थोड़ा ऊंचा कराकर प्लास्टर करा दिया गया है। कागज में पूरी बाउंड्री नई दर्शाई गई है। ब्लाक क्षेत्र में ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं।
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अन्य ब्लॉकों में भी है हुई है गड़बड़ी
बाउंड्रीवाल बनाने की आड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सिर्फ किसी एक ब्लॉक का नहीं है। पिछले दिनों बरहज के एक विद्यालय में भी पुरानी बाउंड्रीवाल को ही प्लास्टर कराकर नया दिखाते हुए धन निकालने का मामला आया था। सलेमपुर, भटनी, भाटपाररानी सहित अन्य ब्लॉकों में भी ऐसे कई उदाहरण हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कायाकल्प योजना के तहत बजट की सीमा तय नहीं होने से प्रधान मनमाने ढंग से काम करा रहे हैं, जिसकी मॉनिटरिंग भी नहीं की जा रही।
विद्यालयों की बाउंड्री व अन्य निर्माण का जिम्मा ग्राम पंचायतों को ही सौंपा गया है। वह स्थानीय आवश्यकतानुसार निर्माण करा सकते हैं। विभाग की ओर से इसका कोई मानक तय नहीं है।
- माधवजी तिवारी, बीएसए।