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‘युग पुरुष थे देवरहा बाबा’
Updated Sun, 09 Jul 2017 06:15 PM IST
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सलेमपुर (देवरिया)। देवरहा बाबा काठ आश्रम मईल में गुरु पूर्णिमा सादगी के बीच मनाई गई। दूर दराज से आए बाबा के अनुवाइयों ने उनका पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया। भक्तों ने गुरु की महिमा और तपस्या का बखान करते हुए उनके बनाए हुए मार्गों पर चलने का संकल्प लिया। देर शाम तक प्रसाद वितरण का कार्यक्रम चला।
कार्यक्रम का शुभारंभ आश्रम के पीठाधीश्वर श्याम सुंदरदास ने देवरहा बाबा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती के साथ किया। पीठाधीश्वर ने कहा कि देवरहा बाबा युग पुरुष थे। वे आज भी यहां के कण-कण में विराजमान हैं, जो भक्त आज भी उनको दिल से याद करते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बाबा अध्यात्म जगत के महा गौरव और भारतीय संस्कृति की गरिमा के कीर्तिमान स्वरूप हैं। वहीं भारतीय संस्कृति की पहचान बढ़ेगी। एक दिन पहले से ही बाबा के अनुवाई आश्रम पर पहुंचने लगे और मानस पाठ का भी आयोजन किया गया था। पूजन-अर्चन के बाद प्रसाद वितरण और भंडारा देर शाम तक चला। देवरहा बाबा की गुफा पर बालमुकुंद दास के नेतृत्व में गुरुपूर्णिमा मनाया गया। इस दौरान हरीनाम दास, माधव शरण चतुर्वेदी, वृद्धिचन्द्र यादव, विनोद चौधरी, हरेराम चौधरी, अवधेश सिंह, रामप्रवेश यादव, बीरेंद्र चौधरी आदि मौजूद रहे।
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फोटो
आध्यात्मिक उत्कर्ष के प्रतीक रहे देवरहा बाबा
सलेमपुर। नदियों की लहरों पर, जिसकी कीर्ति तैरती रही है। उसकी काया वर्षों या सदियों के गणनाकारों के लिए अबुझ पहेली रही। यकीनन वह पूर्वांचल के आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक पुरुष रहे। देवरहा बाबा के प्रति आस्था की अथाह गहराई का संकेत उनके अनुवाई देते है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंचे कुछ भक्तों से बातचीत।
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कोट
देवरहा बाबा आश्रम से मैं बचपन से जुड़ा हूं। वर्ष 1954 में बाबा से दीक्षा लिए और वर्ष 1998 में देवरहा बाबा की क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से विष्णु महायज्ञ कर मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा हुआ, जिनको बाबा का आशीर्वाद और सेवा करने का मौका मिला। वह धन्य हो गया।
-डा. रामश्रय सिंह, रिटायर्ड एएसपी
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कोट
अक्सर आश्रम अपने अभिभावकों के साथ आया करते थे। देवरहा बाबा से आर्शीवाद लेने वाले भक्तों का यहां तांता लगता था। उनके नदी में ब्रह्मलीन होने के बाद लोगों का आना-जाना जरूर कम हुआ है लेकिन दस दिनों पर एक बार मैं जरूर आश्रम पर आकर आर्शीवाद लेता हूं।
रमाकांत यादव, देवरिया
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कोट
हम लोगों का बचपन इसी आश्रम पर बीता है। होश संभालने के बाद से आश्रम पर सेवा करते थे। यहां पर आने वाले चढ़ावा को रखने और गायों की सेवा में दिन बीता करता था। आज भी आश्रम से उतना ही लगाव है। आश्रम पर सेवा के लिए लोग निस्वार्थ भाव से लगे रहते हैं।
वृद्घि यादव, मईल, प्रधान
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कोट
देवरहा बाबा के पास हमारे ससुर आया करते थे। उनके गुजरने के बाद प्रत्येक माह यहां पर और वृंदावन आश्रम पर जाया करती हूं। गुरु कृपा ही पारस मणि है, जिसकी स्पर्श मात्र से मूल्यहीन वस्तु मूल्यवान हो जाती है। बाबा के आशीर्वाद से हम लोग आज बहुत आगे हैं।
कांती देवी, वाराणसी
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कार्यक्रम का शुभारंभ आश्रम के पीठाधीश्वर श्याम सुंदरदास ने देवरहा बाबा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती के साथ किया। पीठाधीश्वर ने कहा कि देवरहा बाबा युग पुरुष थे। वे आज भी यहां के कण-कण में विराजमान हैं, जो भक्त आज भी उनको दिल से याद करते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बाबा अध्यात्म जगत के महा गौरव और भारतीय संस्कृति की गरिमा के कीर्तिमान स्वरूप हैं। वहीं भारतीय संस्कृति की पहचान बढ़ेगी। एक दिन पहले से ही बाबा के अनुवाई आश्रम पर पहुंचने लगे और मानस पाठ का भी आयोजन किया गया था। पूजन-अर्चन के बाद प्रसाद वितरण और भंडारा देर शाम तक चला। देवरहा बाबा की गुफा पर बालमुकुंद दास के नेतृत्व में गुरुपूर्णिमा मनाया गया। इस दौरान हरीनाम दास, माधव शरण चतुर्वेदी, वृद्धिचन्द्र यादव, विनोद चौधरी, हरेराम चौधरी, अवधेश सिंह, रामप्रवेश यादव, बीरेंद्र चौधरी आदि मौजूद रहे।
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आध्यात्मिक उत्कर्ष के प्रतीक रहे देवरहा बाबा
सलेमपुर। नदियों की लहरों पर, जिसकी कीर्ति तैरती रही है। उसकी काया वर्षों या सदियों के गणनाकारों के लिए अबुझ पहेली रही। यकीनन वह पूर्वांचल के आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक पुरुष रहे। देवरहा बाबा के प्रति आस्था की अथाह गहराई का संकेत उनके अनुवाई देते है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंचे कुछ भक्तों से बातचीत।
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देवरहा बाबा आश्रम से मैं बचपन से जुड़ा हूं। वर्ष 1954 में बाबा से दीक्षा लिए और वर्ष 1998 में देवरहा बाबा की क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से विष्णु महायज्ञ कर मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा हुआ, जिनको बाबा का आशीर्वाद और सेवा करने का मौका मिला। वह धन्य हो गया।
-डा. रामश्रय सिंह, रिटायर्ड एएसपी
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अक्सर आश्रम अपने अभिभावकों के साथ आया करते थे। देवरहा बाबा से आर्शीवाद लेने वाले भक्तों का यहां तांता लगता था। उनके नदी में ब्रह्मलीन होने के बाद लोगों का आना-जाना जरूर कम हुआ है लेकिन दस दिनों पर एक बार मैं जरूर आश्रम पर आकर आर्शीवाद लेता हूं।
रमाकांत यादव, देवरिया
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हम लोगों का बचपन इसी आश्रम पर बीता है। होश संभालने के बाद से आश्रम पर सेवा करते थे। यहां पर आने वाले चढ़ावा को रखने और गायों की सेवा में दिन बीता करता था। आज भी आश्रम से उतना ही लगाव है। आश्रम पर सेवा के लिए लोग निस्वार्थ भाव से लगे रहते हैं।
वृद्घि यादव, मईल, प्रधान
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देवरहा बाबा के पास हमारे ससुर आया करते थे। उनके गुजरने के बाद प्रत्येक माह यहां पर और वृंदावन आश्रम पर जाया करती हूं। गुरु कृपा ही पारस मणि है, जिसकी स्पर्श मात्र से मूल्यहीन वस्तु मूल्यवान हो जाती है। बाबा के आशीर्वाद से हम लोग आज बहुत आगे हैं।
कांती देवी, वाराणसी