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शिक्षकों ने दी बोर्ड परीक्षा बहिष्कार की धमकी
Updated Sat, 03 Feb 2018 11:07 PM IST
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने जिला प्रशासन को मांग पत्र सौपा।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। लंबित मांगों की पूर्ति नहीं होने से माध्यमिक शिक्षकों के तेवर कड़े हो गए हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश व्यापी आह्वान पर शिक्षकों ने शनिवार को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन को सौंपा।
संघ ने कहा कि उनकी दस सूत्री मांगे छह फरवरी से पहले सरकार ने पूरा नहीं किया तो माध्यमिक शिक्षक बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि बुलंदशहर के जौलीगढ़ पब्लिक इंटर कॉलेज के चयनित शिक्षक बृजेंद्र कुमार से कार्यभार ग्रहण करने के लिए 40 हजार की मांग करने और वेतन नहीं पास करने के कारण आत्महत्या के लिए बेबस होना पड़ा था। जिला विद्यालय निरीक्षक एवं पटल सहायकों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर समुचित कार्रवाई की जाए। बृजेंद्र की पत्नी को मृतक आश्रित के रूप में शिक्षक के पद पर सेवायोजित किया जाए। परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। एक अप्रैल 2005 से पूर्व की पेंशन व्यवस्था को लागू किया जाए। नवीन पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना में समायोजित किया जाए। वित्त विहीन विद्यालयों के सभी अंशकालिक शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक बनाकर राज्यकोष से वेतन दिया जाए। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए। प्रदेश के बालिका विद्यालय में पुरुष प्रबंधकों से महिला शिक्षकों के उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। शिक्षक नेताओं ने कहा कि उनकी मांगे जायज है। फिर भी सरकार मान नहीं रही है। इस दौरान जिलाध्यक्ष अवधेश सिंह, मंत्री दिनेश त्रिपाठी और उमाशंकर आदि मौजूद रहे।
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संघ ने कहा कि उनकी दस सूत्री मांगे छह फरवरी से पहले सरकार ने पूरा नहीं किया तो माध्यमिक शिक्षक बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि बुलंदशहर के जौलीगढ़ पब्लिक इंटर कॉलेज के चयनित शिक्षक बृजेंद्र कुमार से कार्यभार ग्रहण करने के लिए 40 हजार की मांग करने और वेतन नहीं पास करने के कारण आत्महत्या के लिए बेबस होना पड़ा था। जिला विद्यालय निरीक्षक एवं पटल सहायकों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर समुचित कार्रवाई की जाए। बृजेंद्र की पत्नी को मृतक आश्रित के रूप में शिक्षक के पद पर सेवायोजित किया जाए। परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। एक अप्रैल 2005 से पूर्व की पेंशन व्यवस्था को लागू किया जाए। नवीन पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना में समायोजित किया जाए। वित्त विहीन विद्यालयों के सभी अंशकालिक शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक बनाकर राज्यकोष से वेतन दिया जाए। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए। प्रदेश के बालिका विद्यालय में पुरुष प्रबंधकों से महिला शिक्षकों के उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। शिक्षक नेताओं ने कहा कि उनकी मांगे जायज है। फिर भी सरकार मान नहीं रही है। इस दौरान जिलाध्यक्ष अवधेश सिंह, मंत्री दिनेश त्रिपाठी और उमाशंकर आदि मौजूद रहे।
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