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पुष्टाहार का असर नहीं, कुपोषित हो रहे बच्चे
Updated Thu, 19 Oct 2017 06:38 PM IST
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देवरिया। बच्चों को स्वस्थ बनाने में आंगनबाड़ी केंद्रों से वितरण होने वाली पंजीरी कारगर साबित नहीं हो रही है। इसको लेकर विभागीय जिम्मेदार गंभीर नहीं है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 15 माह में 323 अति कुपोषित बच्चों आए हैं। सर्वाधिक रामपुर कारखाना और देसही देवरिया ब्लॉक के हैं। वर्तमान में छह बच्चों का केंद्र पर इलाज चल रहा है।
कुपोषण के शिकार बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए सरकार पानी की तरह रुपये बहा रही है, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को वजन जांचने के बाद स्वस्थ बनाने के लिए पुष्टाहार यानी पंजीरी दी जाती है। इसकी रिपोर्टिंग भी आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों की कागजी आंकड़ों में तो बच्चे ना के बराबर अति कुपोषित हैं, लेकिन जिला अस्पताल में संचालित होने वाले पोषण पुनर्वास केंद्र पर 15 माह में 323 पांच साल तक के अति कुपोषित बच्चे आए हैं। बच्चे के साथ रहने वाली उसकी मां को भोजन और प्रत्येक दिन 50 रुपये के हिसाब से जोड़कर दिया जाता है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर आए बच्चों में सर्वाधिक बच्चे रामपुर कारखाना और देसही देवरिया ब्लॉक के रहने वाले है। इस बाबत सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र पर आने वाले अति कुपोषित बच्चों 14 दिन भर्ती कर इलाज किया जाता है। इसके अलावा डाइट के हिसाब से पोषण युक्त आहार दिया जाता है।
खर्च के हिसाब से नहीं मिलती डाइट
देवरिया। एक बच्चे की डाइट का एक दिन का खर्च 75 रुपये और साथ रहने वाली महिला का 50 रुपये पड़ता है। अति कुपोषित बच्चों को दो माह में चार बार जांच किया जाता है। जरूरत पड़ने पर दुबारा भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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कुपोषण के शिकार बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए सरकार पानी की तरह रुपये बहा रही है, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को वजन जांचने के बाद स्वस्थ बनाने के लिए पुष्टाहार यानी पंजीरी दी जाती है। इसकी रिपोर्टिंग भी आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों की कागजी आंकड़ों में तो बच्चे ना के बराबर अति कुपोषित हैं, लेकिन जिला अस्पताल में संचालित होने वाले पोषण पुनर्वास केंद्र पर 15 माह में 323 पांच साल तक के अति कुपोषित बच्चे आए हैं। बच्चे के साथ रहने वाली उसकी मां को भोजन और प्रत्येक दिन 50 रुपये के हिसाब से जोड़कर दिया जाता है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर आए बच्चों में सर्वाधिक बच्चे रामपुर कारखाना और देसही देवरिया ब्लॉक के रहने वाले है। इस बाबत सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र पर आने वाले अति कुपोषित बच्चों 14 दिन भर्ती कर इलाज किया जाता है। इसके अलावा डाइट के हिसाब से पोषण युक्त आहार दिया जाता है।
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खर्च के हिसाब से नहीं मिलती डाइट
देवरिया। एक बच्चे की डाइट का एक दिन का खर्च 75 रुपये और साथ रहने वाली महिला का 50 रुपये पड़ता है। अति कुपोषित बच्चों को दो माह में चार बार जांच किया जाता है। जरूरत पड़ने पर दुबारा भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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