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बंदी बदलेंगे शहर का पर्यावरण, करेंगे आमदनी
Updated Mon, 15 Oct 2018 10:37 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जिला कारागार में बंदियों की मेहनत से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। जेल प्रशासन की पहल पर बंदी जेल में पौधे उगा रहे हैं। बाजार से कम कीमत पर जरूरतमंद यहां से पौधे खरीद सकते हैं। योजना सफल रही तो जेल में बड़े पैमाने पर नर्सरी लगाई जाएगी।
जिला जेल प्रशासन नई पहल की है। जेल में पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है। ट्रायल के तौर पर जेल प्रशासन ने करीब एक बीघे में तीन हजार पौधों की नर्सरी लगाई है। इसकी निराई-गुड़ाई बंदियों की जिम्मे है। सुबह-शाम बंदी नर्सरी की देखरेख में अपना पसीना बहा रहे हैं। जेल प्रशासन ने नर्सरी तैयारी करने से पहले बंदियों से सुझाव मांगा था। इसमें अधिकांश बंदियों ने सहमति जताई थी। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर नर्सरी तैयार करने, समय-समय पर दवा की छिड़काव समेत अन्य बारीकियां सिखाई गई। इसकी सामूहिक जानकारी बंदियों को भी दी गई है। जेल प्रशासन की ओर से इसके लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बिक्री के लिए कई प्राइवेट नर्सरी संचालकों से भी जेल प्रशासन संपर्क कर रहा है। पौधा देने में वन विभाग को प्राथमिकता दी जाएगी। प्राइवेट नर्सरी और आम लोगों को भी यहां से पौधा दिया जाएगा। इस नर्सरी की खास बात यह होगी कि बाजार से कम कीमत पर पौधे दिए जाएंगे। सफलता मिलने पर नर्सरी का विस्तार किया जाएगा और बंदियों को मेहनताना भी मिलेगा।
नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे
जेल की नर्सरी में सागौन, कटहल, अमरूद, आम का पौधा तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा तुलसी और फूलों की नर्सरी डाली गई है। फलदार पौधा तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
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जेल के अंदर काफी जमीन खाली पड़ी है। 15 अगस्त पर सरकार ने पौधरोपण अभियान चलाया था। इसमें पौधों की कमी पड़ गई थी। तभी जेल में नर्सरी का विचार आया। वन विभाग और बंदियों से सुझाव के बाद इसे शुरू किया गया है। शुरुआती दौर में 3000 पौधों की नर्सरी तैयार हो रही है।
- दिलीप पांडेय, जेल अधीक्षक।
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जिला जेल प्रशासन नई पहल की है। जेल में पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है। ट्रायल के तौर पर जेल प्रशासन ने करीब एक बीघे में तीन हजार पौधों की नर्सरी लगाई है। इसकी निराई-गुड़ाई बंदियों की जिम्मे है। सुबह-शाम बंदी नर्सरी की देखरेख में अपना पसीना बहा रहे हैं। जेल प्रशासन ने नर्सरी तैयारी करने से पहले बंदियों से सुझाव मांगा था। इसमें अधिकांश बंदियों ने सहमति जताई थी। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर नर्सरी तैयार करने, समय-समय पर दवा की छिड़काव समेत अन्य बारीकियां सिखाई गई। इसकी सामूहिक जानकारी बंदियों को भी दी गई है। जेल प्रशासन की ओर से इसके लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बिक्री के लिए कई प्राइवेट नर्सरी संचालकों से भी जेल प्रशासन संपर्क कर रहा है। पौधा देने में वन विभाग को प्राथमिकता दी जाएगी। प्राइवेट नर्सरी और आम लोगों को भी यहां से पौधा दिया जाएगा। इस नर्सरी की खास बात यह होगी कि बाजार से कम कीमत पर पौधे दिए जाएंगे। सफलता मिलने पर नर्सरी का विस्तार किया जाएगा और बंदियों को मेहनताना भी मिलेगा।
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नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे
जेल की नर्सरी में सागौन, कटहल, अमरूद, आम का पौधा तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा तुलसी और फूलों की नर्सरी डाली गई है। फलदार पौधा तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
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जेल के अंदर काफी जमीन खाली पड़ी है। 15 अगस्त पर सरकार ने पौधरोपण अभियान चलाया था। इसमें पौधों की कमी पड़ गई थी। तभी जेल में नर्सरी का विचार आया। वन विभाग और बंदियों से सुझाव के बाद इसे शुरू किया गया है। शुरुआती दौर में 3000 पौधों की नर्सरी तैयार हो रही है।
- दिलीप पांडेय, जेल अधीक्षक।