{"_id":"5aa805044f1c1bc0078b505b","slug":"131520960772-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"झमेले में फंसा आंगानबाड़ी केंद्रों का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झमेले में फंसा आंगानबाड़ी केंद्रों का निर्माण
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:00 PM IST
विज्ञापन
देसही देवरिया ब्लॉक के पिपरा मदन गोपाल में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। तीन विभागों की खींचतान में आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। 31 मार्च-2018 तक भवनों का निर्माण कार्य पूरा कराना विभाग के लिए चुनौती बनी है। खुद के बचाव में अफसर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में जुटे हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में 15.50 करोड़ की लागत से जिले के 16 ब्लॉकों में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण होना है। एक भवन के निर्माण पर 7.52 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें आईसीडीएस को दो लाख, पंचायतीराज विभाग को 1.6 लाख और मनरेगा को 4.86 लाख रुपये देना था। अभी तक पंचायतीराज विभाग की ओर से धन आवंटित नहीं किया जा सका है। आईसीडीएस ने टोटल रकम दे दिया है और मनरेगा की ओर से तय रकम में दस दिन पूर्व आधे की भुगतान किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने में मात्र 17 दिन बचे हैं। इतने दिनों में भवनों का निर्माण पूरा कर पाना मुश्किल हैं। इसको लेकर जिम्मेदार अफसरों के बीच खींचतान बढ़ गई है। 100 भवन क्षेत्र पंचायत और 100 भवन का निर्माण कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के पास है। चौदहवें वित्त की निधि से ग्राम पंचायत के अकाउंट में जिम्मेदार विभागों को धन आवंटित करना है। अफसरों की उदासीनता से संपूर्ण धन आवंटित नहीं होने के कारण भवन का निर्माण कार्य अधर में लटका है। सीडीओ राजेश त्यागी ने बताया कि धन आवंटित करने में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में भवनों का निर्माण होना मुश्किल लग रहा है। इस बाबत डीसी मनरेगा गजेंद्र तिवारी ने बताया कि मनरेगा में धन की कमी थी। चार मार्च को धन आया। जितने लोगों का भवन निर्माण के लिए बिल लगा था। उनका भुगतान कर दिया गया है। देरी की वजह धन का समय से नहीं मिलना है।
जमीन के विवाद में फंसे कई भवन
आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण ग्राम पंचायत के भवन में होना है। जमीन के विवाद के चलते कई गांवों में भवन निर्माण रुका हुआ है। विभागीय अफसरों के रुचि नहीं लेने के कारण ऐसा हुआ है। इसकी जानकारी ब्लॉक के सभी बीडीओ से जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय ने भवन निर्माण की जानकारी मांगी है। अभी तक तरकुलवा, सदर और रुद्रपुर के बीडीओ ने रिपोर्ट भेजी है। इसमें कई गांवों में जमीन विवाद में भवन निर्माण नहीं होने की जानकारी दी गई है। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की सर्वाधिक खराब हाल भटनी और गौरीबाजार ब्लॉक का है। इन ब्लॉकों में एक भी भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका है और बीडीओ रिपोर्ट भी नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
चालू वित्तीय वर्ष में 15.50 करोड़ की लागत से जिले के 16 ब्लॉकों में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण होना है। एक भवन के निर्माण पर 7.52 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें आईसीडीएस को दो लाख, पंचायतीराज विभाग को 1.6 लाख और मनरेगा को 4.86 लाख रुपये देना था। अभी तक पंचायतीराज विभाग की ओर से धन आवंटित नहीं किया जा सका है। आईसीडीएस ने टोटल रकम दे दिया है और मनरेगा की ओर से तय रकम में दस दिन पूर्व आधे की भुगतान किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने में मात्र 17 दिन बचे हैं। इतने दिनों में भवनों का निर्माण पूरा कर पाना मुश्किल हैं। इसको लेकर जिम्मेदार अफसरों के बीच खींचतान बढ़ गई है। 100 भवन क्षेत्र पंचायत और 100 भवन का निर्माण कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के पास है। चौदहवें वित्त की निधि से ग्राम पंचायत के अकाउंट में जिम्मेदार विभागों को धन आवंटित करना है। अफसरों की उदासीनता से संपूर्ण धन आवंटित नहीं होने के कारण भवन का निर्माण कार्य अधर में लटका है। सीडीओ राजेश त्यागी ने बताया कि धन आवंटित करने में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अफसरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में भवनों का निर्माण होना मुश्किल लग रहा है। इस बाबत डीसी मनरेगा गजेंद्र तिवारी ने बताया कि मनरेगा में धन की कमी थी। चार मार्च को धन आया। जितने लोगों का भवन निर्माण के लिए बिल लगा था। उनका भुगतान कर दिया गया है। देरी की वजह धन का समय से नहीं मिलना है।
विज्ञापन
जमीन के विवाद में फंसे कई भवन
आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण ग्राम पंचायत के भवन में होना है। जमीन के विवाद के चलते कई गांवों में भवन निर्माण रुका हुआ है। विभागीय अफसरों के रुचि नहीं लेने के कारण ऐसा हुआ है। इसकी जानकारी ब्लॉक के सभी बीडीओ से जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय ने भवन निर्माण की जानकारी मांगी है। अभी तक तरकुलवा, सदर और रुद्रपुर के बीडीओ ने रिपोर्ट भेजी है। इसमें कई गांवों में जमीन विवाद में भवन निर्माण नहीं होने की जानकारी दी गई है। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की सर्वाधिक खराब हाल भटनी और गौरीबाजार ब्लॉक का है। इन ब्लॉकों में एक भी भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका है और बीडीओ रिपोर्ट भी नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन