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कुंडली मिलान में विचारणीय होता है वैधव्य योग
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बैकुंठपुर में संस्कृत विद्यालय में चल रहे कार्यशाला को मुख्य अतिथि डॉ मदन मोहन पाठक को सम्मानित किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान लखनऊ के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदनमोहन पाठक ने कहा कि वैधव्य योग वर और कन्या दोनों की कुंडली में विचारणीय होता है। सामान्य जीवन में इसके बहुविध प्रभाव देखे गए हैं। कई बार तो यह योग इतना खतरनाक प्रभाव देता है कि वर या वधु (पति-पत्नी) में से किसी एक की मृत्यु संभव है। जब कभी भी विवाह का निर्णय लें तब इस बात का अवश्य विचार करा लें कि कहीं से दोनों की कुंडली इस कष्टकारी योग से प्रभावित तो नहीं है, और अगर है तो इसके फलाफल क्या होंगे, अनिष्टकारी परिणाम को रोकने के लिए शास्त्रोचित उपाय क्या हैं।
वह सोमवार को श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय, बैकुंठपुर में ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान व जनकल्याण केंद्र की ओर से आयोजित 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकाण्ड विषयक कार्यशाला के अंतर्गत वैधव्य योग एवं परिहार विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि चतुर्विध पुरुषार्थ की प्राप्ति को पति और पत्नी दोनों का साथ-साथ जीवन जीना अत्यावश्यक है। वैधव्य दोष के 30 प्रतिशत फल जीवन को प्रभावित करने वाले भी होते हैं। यदि यह दोष अपना पूरा फल किसी शुभ योग से नहीं दे पा रहा है तो अन्य जीवनोत्कर्ष को प्रभावित करता है। मौके पर स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी, आभार नीतेश उपाध्याय व संचालन डॉ. मनीष शुक्ल ने किया। इस दौरान रानी चौरसिया, रवि मधुसूदन चौरसिया, डॉ. नरेंद्र देव शुक्ल, डॉ. वंदना सिंह, प्रभा कुमारी, डॉ. मदन मोहन पुरोहित, डॉ. देवीप्रभा, राकेश तिवारी, मनीष मिश्र आदि मौजूद रहे।
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वह सोमवार को श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय, बैकुंठपुर में ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान व जनकल्याण केंद्र की ओर से आयोजित 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकाण्ड विषयक कार्यशाला के अंतर्गत वैधव्य योग एवं परिहार विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि चतुर्विध पुरुषार्थ की प्राप्ति को पति और पत्नी दोनों का साथ-साथ जीवन जीना अत्यावश्यक है। वैधव्य दोष के 30 प्रतिशत फल जीवन को प्रभावित करने वाले भी होते हैं। यदि यह दोष अपना पूरा फल किसी शुभ योग से नहीं दे पा रहा है तो अन्य जीवनोत्कर्ष को प्रभावित करता है। मौके पर स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी, आभार नीतेश उपाध्याय व संचालन डॉ. मनीष शुक्ल ने किया। इस दौरान रानी चौरसिया, रवि मधुसूदन चौरसिया, डॉ. नरेंद्र देव शुक्ल, डॉ. वंदना सिंह, प्रभा कुमारी, डॉ. मदन मोहन पुरोहित, डॉ. देवीप्रभा, राकेश तिवारी, मनीष मिश्र आदि मौजूद रहे।
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