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आफत
Updated Tue, 21 Aug 2018 10:32 PM IST
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सरयू के पानी से घिरे 14 टोले, नाव बनी सहारा
24 घंटे से थमा जलस्तर, दहशत बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
बरहज। सरयू में उफान से नदी पार दियारा क्षेत्र के विशुनपुर के 14 टोले पानी से घिर गए हैं। घरों तक बाढ़ का पानी पहुंचने से लोग सांसत में हैं। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में कोई इजाफा नहीं हुआ है। नदी स्थिर हो गई है, लेकिन ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। लोग जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे हैं।
करीब एक माह से सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता रहा है। नदी खतरे के निशान 66.50 से 67.40 सेमी पर पहुंच गई है। जलस्तर में हुए इजाफा से नदी का पानी विशुनपुर के साधू की मड़ई, दसरिया टोला, पांडेय टोला, जरलहवा, बरमहवां सहित 14 टोलों में घुस गया है। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने लोगों के आने-जाने के लिए करीब 10 नाव, जबकि भदिला प्रथम में पांच नाव लगाने का निर्देश दिया है। पिछले चार दिनों में जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि से नदी की लहरें तेज हो गई हैं। इससे नाव के सहारे आवागमन में लोग भयभीत हैं। नदी पार से आने वाले लोगों का कहना है कि चार माह तक नाव से सफर करने जैसा खतरा हर वर्ष मोल लेना पड़ता है। मोहन सेतु बन जाने से कुछ हद तक राहत हो जाएगी।
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24 घंटे से थमा जलस्तर, दहशत बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
बरहज। सरयू में उफान से नदी पार दियारा क्षेत्र के विशुनपुर के 14 टोले पानी से घिर गए हैं। घरों तक बाढ़ का पानी पहुंचने से लोग सांसत में हैं। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में कोई इजाफा नहीं हुआ है। नदी स्थिर हो गई है, लेकिन ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। लोग जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे हैं।
करीब एक माह से सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता रहा है। नदी खतरे के निशान 66.50 से 67.40 सेमी पर पहुंच गई है। जलस्तर में हुए इजाफा से नदी का पानी विशुनपुर के साधू की मड़ई, दसरिया टोला, पांडेय टोला, जरलहवा, बरमहवां सहित 14 टोलों में घुस गया है। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने लोगों के आने-जाने के लिए करीब 10 नाव, जबकि भदिला प्रथम में पांच नाव लगाने का निर्देश दिया है। पिछले चार दिनों में जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि से नदी की लहरें तेज हो गई हैं। इससे नाव के सहारे आवागमन में लोग भयभीत हैं। नदी पार से आने वाले लोगों का कहना है कि चार माह तक नाव से सफर करने जैसा खतरा हर वर्ष मोल लेना पड़ता है। मोहन सेतु बन जाने से कुछ हद तक राहत हो जाएगी।
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