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बेटियों को फुटबॉलर बना रहे देवरिया के जयकुमार
Updated Fri, 29 Jun 2018 11:15 PM IST
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देवरिया के एक गांव के मैदान में लड़कियों को फुटबॉल का निशुल्क प्रशिक्षण देते जयकुमार राव।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। अक्सर जिद जब जुनून बन जाए तो जिंदगी बदल जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ जयकुमार राव के साथ। एक तरफ संसाधनों का रोना रोते सरकारी खेल प्रशिक्षक और दूसरी ओर अभाव में ही गांव की बेटियों की प्रतिभा को निखार रहे जयकुमार। बिना किसी शुल्क के गांव की लड़कियों को वे फुटबॉल का प्रशिक्षण देते हैं। उनसे हुनर सीखकर अब तक कई बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
पथरदेवा ब्लॉक के छोटे से गांव मझौवा के रहने वाले जयकुमार खुद यूपी की ओर से वर्ष 1982-83 में राष्ट्रीय टीम में खेल चुके हैं। अब गांव के ही एक वित्तविहीन विद्यालय में शारीरिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। करीब आठ वर्ष पूर्व वे अपने स्कूल की टीम लेकर भभुआ (बिहार) गए थे। वहां लड़कों की टीम के साथ लड़कियों को फुटबॉल खेलते देख इस कदर प्रभावित हुए कि अपने गांव की बेटियों को भी फुटबॉलर बनाने की जिद ठान ली। लोगों की टोका-टाकी के बीच यह जिद जुनून बन गई तो गांव में दर्जनों फुटबॉलर बेटियां तैयार हो गई हैं। अब आसपास के गांवों से भी अभिभावक खुद अपनी बेटियों को फुटबॉल सीखने के लिए उनके पास भेज रहे हैं।
गांव के मैदान में बेटियों को नि:शुल्क ट्रेनिंग दे रहे जयकुमार से फुटबॉल सीखकर पिछले चार वर्षों में 25 से अधिक लड़कियां बाहर खेलने जा चुकी है। 20 बेटियां अभी भी सुबह-शाम नियमित अभ्यास कर रही हैं। शहर से दूर बिहार की सीमा से सटे गांव में लोग बेटियों को फुटबाल खेलते देखते हैं तो हैरत में पड़ जाते हैं। बकौल जयकुमार, उनका सपना है कि देश की महिला फुटबाल टीम हो, जिसमें पथरदेवा की लड़कियां भी प्रतिनिधित्व करें। इसी कोशिश के साथ इस मुहिम में जुटे हुए हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ के इस दौर में उनकी कोशिश से बेटियों को कमजोर समझने की सोच भी बदलेगी।
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आसान नहीं था बेटियों को इस खेल से जोडना
ताकत और मेहनत वाले इस खेल से बेटियों को जोड़ना आसान नहीं था। वह भी ऐसी जगह, जहां संसाधन तो दूर खेल के लिए अनुकूल माहौल तक नहीं था। तीन-चार साल के प्रयास के बाद लोग इस बात को समझ सके और वर्ष 2014 में उन्होंने प्रशिक्षण देने की शुरुआत की। इससे पहले गांव-गांव जाकर लोगों से बात की। तमाम स्कूलों में भी गए और बेटियों को फुटबाल खेलने के लिए भेजने का आह्वान किया। तमाम कोशिशों के बाद बंजरिया गांव निवासी रूपाली गुप्ता, रिंकी मद्धेशिया, शिखा गुप्ता के साथ उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की। अब तक करीब सौ लड़कियां फुटबॉल सीख चुकी हैं। फिलहाल रूपाली नेशनल खेल रही हैं। शिखा का चयन केडी बाबू हॉस्टल में हो चुका है। वह 400 मीटर दौड़ में गोल्ड भी जीत चुकी है। रिंकी ने भी दौड़ में मेडल जीता है।
नेशनल स्तर पर खेल रहीं कई खिलाड़ी
रुपाली, रिंकी और शिखा के अलावा भी कई लड़कियां अलग-अलग कैटेगरी मेें नेशनल स्तर पर खेल रही हैं। इसमें मुरार छपरा निवासी आयशा, मझौवा निवासी सोनाक्षी सिंह, हरफोड़ा निवासी सुष्मिता, गुरलिया निवासी शालिनी, हरफोड़ा की मुस्कान खान, फरीदा अंसारी, कंडीपट्टी की आकांक्षा सिंह अलग-अलग टीमों से खेल चुकी हैं। इन दिनों मैदान में ट्रेनिंग ले रही अनीता कन्नौजिया, रिया सिंह अंजली चौहान, रुकसार खातून, हीना, रागिनी, निशा यादव, सुनीता आदि ने बताया कि वह भी फुटबॉल में कॅरियर बनाना चाहती हैं।
ओडिशा में यूपी से खेलेगी मुस्कान
हरफोड़ा गांव निवासी आलम खान की बेटी मुस्कान का चयन यूपी टीम में हुआ है। वह जुलाई के प्रथम सप्ताह से ओडिशा के कटक में आयोजित अंडर-16 नेशनल स्पर्धा में यूपी का प्रतिनिधित्व करेगी। बरेली में हुए ट्रायल के बाद शुक्रवार को ही यह सूचना गांव पहुंची तो लोग खुशी से झूम उठे। घर वालों ने संपर्क किया तो वह उड़ीसा के लिए रवाना हो चुकी थी। फोन पर बातचीत में उसने बताया कि बरेली में 30 लड़कियों ने ट्रायल दिया था। इसमें 20 खिलाड़ी चुनी गई हैं। उन्होंने इसका श्रेय कोच जयकुमार व अपने अभिभावकों को दिया।
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पथरदेवा ब्लॉक के छोटे से गांव मझौवा के रहने वाले जयकुमार खुद यूपी की ओर से वर्ष 1982-83 में राष्ट्रीय टीम में खेल चुके हैं। अब गांव के ही एक वित्तविहीन विद्यालय में शारीरिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। करीब आठ वर्ष पूर्व वे अपने स्कूल की टीम लेकर भभुआ (बिहार) गए थे। वहां लड़कों की टीम के साथ लड़कियों को फुटबॉल खेलते देख इस कदर प्रभावित हुए कि अपने गांव की बेटियों को भी फुटबॉलर बनाने की जिद ठान ली। लोगों की टोका-टाकी के बीच यह जिद जुनून बन गई तो गांव में दर्जनों फुटबॉलर बेटियां तैयार हो गई हैं। अब आसपास के गांवों से भी अभिभावक खुद अपनी बेटियों को फुटबॉल सीखने के लिए उनके पास भेज रहे हैं।
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गांव के मैदान में बेटियों को नि:शुल्क ट्रेनिंग दे रहे जयकुमार से फुटबॉल सीखकर पिछले चार वर्षों में 25 से अधिक लड़कियां बाहर खेलने जा चुकी है। 20 बेटियां अभी भी सुबह-शाम नियमित अभ्यास कर रही हैं। शहर से दूर बिहार की सीमा से सटे गांव में लोग बेटियों को फुटबाल खेलते देखते हैं तो हैरत में पड़ जाते हैं। बकौल जयकुमार, उनका सपना है कि देश की महिला फुटबाल टीम हो, जिसमें पथरदेवा की लड़कियां भी प्रतिनिधित्व करें। इसी कोशिश के साथ इस मुहिम में जुटे हुए हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ के इस दौर में उनकी कोशिश से बेटियों को कमजोर समझने की सोच भी बदलेगी।
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आसान नहीं था बेटियों को इस खेल से जोडना
ताकत और मेहनत वाले इस खेल से बेटियों को जोड़ना आसान नहीं था। वह भी ऐसी जगह, जहां संसाधन तो दूर खेल के लिए अनुकूल माहौल तक नहीं था। तीन-चार साल के प्रयास के बाद लोग इस बात को समझ सके और वर्ष 2014 में उन्होंने प्रशिक्षण देने की शुरुआत की। इससे पहले गांव-गांव जाकर लोगों से बात की। तमाम स्कूलों में भी गए और बेटियों को फुटबाल खेलने के लिए भेजने का आह्वान किया। तमाम कोशिशों के बाद बंजरिया गांव निवासी रूपाली गुप्ता, रिंकी मद्धेशिया, शिखा गुप्ता के साथ उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की। अब तक करीब सौ लड़कियां फुटबॉल सीख चुकी हैं। फिलहाल रूपाली नेशनल खेल रही हैं। शिखा का चयन केडी बाबू हॉस्टल में हो चुका है। वह 400 मीटर दौड़ में गोल्ड भी जीत चुकी है। रिंकी ने भी दौड़ में मेडल जीता है।
नेशनल स्तर पर खेल रहीं कई खिलाड़ी
रुपाली, रिंकी और शिखा के अलावा भी कई लड़कियां अलग-अलग कैटेगरी मेें नेशनल स्तर पर खेल रही हैं। इसमें मुरार छपरा निवासी आयशा, मझौवा निवासी सोनाक्षी सिंह, हरफोड़ा निवासी सुष्मिता, गुरलिया निवासी शालिनी, हरफोड़ा की मुस्कान खान, फरीदा अंसारी, कंडीपट्टी की आकांक्षा सिंह अलग-अलग टीमों से खेल चुकी हैं। इन दिनों मैदान में ट्रेनिंग ले रही अनीता कन्नौजिया, रिया सिंह अंजली चौहान, रुकसार खातून, हीना, रागिनी, निशा यादव, सुनीता आदि ने बताया कि वह भी फुटबॉल में कॅरियर बनाना चाहती हैं।
ओडिशा में यूपी से खेलेगी मुस्कान
हरफोड़ा गांव निवासी आलम खान की बेटी मुस्कान का चयन यूपी टीम में हुआ है। वह जुलाई के प्रथम सप्ताह से ओडिशा के कटक में आयोजित अंडर-16 नेशनल स्पर्धा में यूपी का प्रतिनिधित्व करेगी। बरेली में हुए ट्रायल के बाद शुक्रवार को ही यह सूचना गांव पहुंची तो लोग खुशी से झूम उठे। घर वालों ने संपर्क किया तो वह उड़ीसा के लिए रवाना हो चुकी थी। फोन पर बातचीत में उसने बताया कि बरेली में 30 लड़कियों ने ट्रायल दिया था। इसमें 20 खिलाड़ी चुनी गई हैं। उन्होंने इसका श्रेय कोच जयकुमार व अपने अभिभावकों को दिया।