फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   यहां लगातार जीतना है तो दल बदलो या चेहरा

यहां लगातार जीतना है तो दल बदलो या चेहरा

Sat, 27 Apr 2019 10:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Apr 2019 10:43 PM IST
विज्ञापन
यहां लगातार जीतना है तो दल बदलो या चेहरा
देवरिया : यहां लगातार जीतना है तो दल बदलो या चेहरा
विज्ञापन

- अब तक सिर्फ विश्वनाथ राय को ही मिली है कांग्रेस से लगातार तीन जीत
- राय ने 1962 से 1971 के बीच तीन बार हासिल की थी जीत

मनीष जायसवाल
देवरिया। संसदीय सीट देवरिया के साथ एक अजब संयोग जुड़ा है। वर्ष 1971 के बाद से यहां कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं जीता, जो लगातार दूसरी बार अपने ही दल से चुनाव लड़ रहा हो। अगर उसी दल को जीत मिली तो प्रत्याशी का चेहरा नया था और अगर चेहरा वही था तो दल बदला हुआ था। अब तक के चुनावी इतिहास में सिर्फ विश्वनाथ राय ही ऐसे रहे हैं, जिन्हें लगातार एक ही दल से तीन बार जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
वर्ष 1952 के पहले चुनाव में यहां से तीन सांसद सोशलिस्ट पार्टी से रामजी वर्मा और कांग्रेस से विश्वनाथ राय व सरजू प्रसाद मिश्र चुने गए थे। 1957 के चुनाव में रामजी वर्मा को जीत मिली। 1962 में कांग्रेस के विश्वनाथ राय ने सोशलिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता अशोक मेहता को हराकर जीत का क्रम शुरू किया और 1971 तक लगातार तीन बार कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतते रहे। इसके बाद से किसी को इतिहास दोहराने का मौका नहीं मिला। इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनाव में जेपी लहर ने कांग्रेसी किले को ध्वस्त कर दिया। तब उग्रसेन सिंह जनता पार्टी से सांसद चुने गए थे। 1980 में कांग्रेस से रमायन राय निर्वाचित हुए और फिर 1984 में भी कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन तब रमायन राय की जगह राजमंगल पांडेय मैदान में थे। 1989 में राजमंगल पांडेय लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए, मगर इस बार वह जनता दल में शामिल हो चुके थे। 1991 में भी यह सीट जनता दल के खाते में ही गई, लेकिन विजेता मोहन सिंह थे। 1996 में भाजपा के श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी जीते तो 1998 में सपा के मोहन सिंह। 1999 में फिर से भाजपा के श्रीप्रकाश मणि ने जीत हासिल की और 2004 में सपा के मोहन सिंह को जीत मिली। वर्ष 2009 में पहली बार बसपा का खाता खोलते हुए गोरख प्रसाद जायसवाल निर्वाचित हुए थे।
विज्ञापन

---


इस बार भी कायम रहेगा मिथक
- एक ही दल और चेहरे पर लगातार दूसरी जीत हासिल करने का मौका इस बार भी नहीं है। चुनावी दंगल में ताल ठोंक रहे सभी उम्मीदवार नए हैं। वर्ष 2014 में भाजपा के कलराज मिश्र को जीत मिली थी। इस बार रमापति राम त्रिपाठी भाजपा से मैदान में है। बसपा से नियाज अहमद चुनाव लड़े थे, जो अबकी कांग्रेस के सिंबल पर वोट मांग रहे हैं। बसपा ने विनोद जायसवाल को प्रत्याशी बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed