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कॉलेज की जमीन पर एसडीएम ने दिया स्थगन आदेश
Updated Fri, 07 Dec 2018 10:36 PM IST
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रंग लाया आंदोलन, एसडीएम ने दिया स्थगनादेश
भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मिलकर रखा पक्ष
डीएम ने कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए पैरवी का आश्वासन दिया
बोले डीएम: कॉलेज प्राचार्य की चूक से आगे तक बढ़ा मामला
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बीआरडीपीजी कॉलेज को आवंटित जमीन रद्द होने के मामले में छात्रों का आंदोलन रंग लाया है। एसडीएम ने अपने फैसले पर अग्रिम आदेश तक के के लिए स्थगनादेश दिया है। इसके लिए जनहित को हवाला दिया गया है। हालांकि अंतिम फैसला मान्यता संबंधी जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद होगा। शुक्रवार को भाजपा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से इस मामले में पुनर्विचार की मांग की। तल्ख लहजे में बातचीत के बाद डीएम ने एसडीएम से वार्ता कर मामले को फिलहाल स्थगित रखने को कहा। मामले में प्राचार्य के स्तर पर चूक की बात सामने आई। इस दौरान डीएम ने प्रतिनिधिमंडल को यह भरोसा भी दिया कि कॉलेज को कृषि विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिलाने के लिए प्रशासन पुरजोर पैरवी करेगा। अतिरिक्त जमीन भी उपलब्ध कराएंगे।
वर्ष 1954 में स्थापित बीआरडी कॉलेज को आवंटित करीब 11.25 हेक्टेयर जमीन का आवंटन एसडीएम कोर्ट ने पिछले दिनों रद्द कर दिया था। इसके बाद से छात्र सहित अन्य संगठन आंदोलित हैं। कॉलेज में कृषि पाठ्यक्रम की मान्यता पर खतरे की आशंका जताई जा रही है। बढ़ते आक्रोश को देखते हुए शुक्रवार को भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ. अंतर्यामी सिंह के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारी व कॉलेज के शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को डीएम से मिला। जनहित का हवाला बताते हुए एसडीएम के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि कॉलेज किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि जनहित के लिए है। पूर्वांचल सहित देश-विदेश से भी बच्चे यहां कृषि की पढ़ाई करने आते हैं। बीआरडी कॉलेज जिले की धरोहर है। इस पर गहराए संकट को दूर किया जाए। डीएम अमित किशोर ने सदर एसडीएम से बात करने के बाद बताया कि कॉलेज की जमीन रद्द करने के मामले में स्थगन आदेश दे दिया गया है। पूरे मामले में प्राचार्य के स्तर पर लापरवाही बरती गई। सही ढंग से बात न रखने के कारण ऐसी नौबत आई। डीएम ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए वह पुरजोर पैरवी करेंगे। कॉलेज की जमीन के समीप करीब 50 एकड़ सिलिंग की जमीन है। कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए इसे कॉलेज के नाम किया जाएगा। डीएम की इस बात से सहमत भाजपा नेता व छात्र नेताओं ने खुशी जताया। इस दौरान राजेंद्र विक्रम सिंह, संजय शाही, दिनेश त्रिपाठी, संजय राव, अजय कुमार दुबे, प्रेम अग्रवाल, अंबिकेश पांडेय, पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव, रामप्रीत मणि त्रिपाठी, दीपक वर्मा आदि मौजूद रहे।
पांच सदस्यीय कमेटी ने शुरू की जांच
देवरिया। जमीन का आवंटन रद्द होने से कॉलेज की मान्यता पर संकट के मद्देनजर गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। कलेक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन राकेश कुमार पटेल की अध्यक्षता में टीम के सदस्यों ने बंद कमरे में गहन मंत्रणा की। विभिन्न बिंदुओं पर विचार के बाद कॉलेज प्रशासन से दस्तावेज तलब करने का फैसला लिया गया। टीम ने कहा कि कॉलेज प्रशासन के पास उपलब्ध जमीन का ब्योरा, बाइलाज देखकर पूरे मामले की बारीकि से जांच की जाएगी। यह भी रिकार्ड देखने पर सहमति बनी कि कॉलेज ने अब तक कितने विद्यार्थियों को शोध कार्य कराया है। कई अन्य बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज भी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया। बैठक में एसडीएम रामकेश यादव, महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अंजलिका निगम, आईटीआई के प्राचार्य विपिन मौजूद रहे।
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भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मिलकर रखा पक्ष
डीएम ने कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए पैरवी का आश्वासन दिया
बोले डीएम: कॉलेज प्राचार्य की चूक से आगे तक बढ़ा मामला
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बीआरडीपीजी कॉलेज को आवंटित जमीन रद्द होने के मामले में छात्रों का आंदोलन रंग लाया है। एसडीएम ने अपने फैसले पर अग्रिम आदेश तक के के लिए स्थगनादेश दिया है। इसके लिए जनहित को हवाला दिया गया है। हालांकि अंतिम फैसला मान्यता संबंधी जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद होगा। शुक्रवार को भाजपा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से इस मामले में पुनर्विचार की मांग की। तल्ख लहजे में बातचीत के बाद डीएम ने एसडीएम से वार्ता कर मामले को फिलहाल स्थगित रखने को कहा। मामले में प्राचार्य के स्तर पर चूक की बात सामने आई। इस दौरान डीएम ने प्रतिनिधिमंडल को यह भरोसा भी दिया कि कॉलेज को कृषि विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिलाने के लिए प्रशासन पुरजोर पैरवी करेगा। अतिरिक्त जमीन भी उपलब्ध कराएंगे।
वर्ष 1954 में स्थापित बीआरडी कॉलेज को आवंटित करीब 11.25 हेक्टेयर जमीन का आवंटन एसडीएम कोर्ट ने पिछले दिनों रद्द कर दिया था। इसके बाद से छात्र सहित अन्य संगठन आंदोलित हैं। कॉलेज में कृषि पाठ्यक्रम की मान्यता पर खतरे की आशंका जताई जा रही है। बढ़ते आक्रोश को देखते हुए शुक्रवार को भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ. अंतर्यामी सिंह के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारी व कॉलेज के शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को डीएम से मिला। जनहित का हवाला बताते हुए एसडीएम के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि कॉलेज किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि जनहित के लिए है। पूर्वांचल सहित देश-विदेश से भी बच्चे यहां कृषि की पढ़ाई करने आते हैं। बीआरडी कॉलेज जिले की धरोहर है। इस पर गहराए संकट को दूर किया जाए। डीएम अमित किशोर ने सदर एसडीएम से बात करने के बाद बताया कि कॉलेज की जमीन रद्द करने के मामले में स्थगन आदेश दे दिया गया है। पूरे मामले में प्राचार्य के स्तर पर लापरवाही बरती गई। सही ढंग से बात न रखने के कारण ऐसी नौबत आई। डीएम ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए वह पुरजोर पैरवी करेंगे। कॉलेज की जमीन के समीप करीब 50 एकड़ सिलिंग की जमीन है। कृषि विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए इसे कॉलेज के नाम किया जाएगा। डीएम की इस बात से सहमत भाजपा नेता व छात्र नेताओं ने खुशी जताया। इस दौरान राजेंद्र विक्रम सिंह, संजय शाही, दिनेश त्रिपाठी, संजय राव, अजय कुमार दुबे, प्रेम अग्रवाल, अंबिकेश पांडेय, पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव, रामप्रीत मणि त्रिपाठी, दीपक वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पांच सदस्यीय कमेटी ने शुरू की जांच
देवरिया। जमीन का आवंटन रद्द होने से कॉलेज की मान्यता पर संकट के मद्देनजर गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। कलेक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन राकेश कुमार पटेल की अध्यक्षता में टीम के सदस्यों ने बंद कमरे में गहन मंत्रणा की। विभिन्न बिंदुओं पर विचार के बाद कॉलेज प्रशासन से दस्तावेज तलब करने का फैसला लिया गया। टीम ने कहा कि कॉलेज प्रशासन के पास उपलब्ध जमीन का ब्योरा, बाइलाज देखकर पूरे मामले की बारीकि से जांच की जाएगी। यह भी रिकार्ड देखने पर सहमति बनी कि कॉलेज ने अब तक कितने विद्यार्थियों को शोध कार्य कराया है। कई अन्य बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज भी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया। बैठक में एसडीएम रामकेश यादव, महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अंजलिका निगम, आईटीआई के प्राचार्य विपिन मौजूद रहे।
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