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टपक और फव्वारा सिंचाई से लहलहाएगी फसल
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:45 PM IST
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जिले में अब फव्वारा विधि से होगी सिंचाई
कम पानी में ही मिलेगी अच्छी पैदावार, घटेगी लागत
जिले को 865 हेक्टेयर में सिंचाई का मिला लक्ष्य
बैकुंठ नाथ शुक्ल
देवरिया। पानी की कमी और सिंचाई संसाधनों की बदहाली से जूझते किसानों की कृषि लागत घटाने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले के 865 हेक्टेयर खेतों में टपक (ड्रिप) और फव्वारा (पोर्टेबल स्प्रिंकलर) सिंचाई उपकरण लगाने का लक्ष्य दिया है। इससे पानी की तो बचत होगी ही, सिंचाई का खर्च कम होने से लाभ भी बढ़ेगा।
सिंचाई की यह विधि पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी में अधिक प्रचलित है। पूर्वी यूपी में इसे बढ़ावा देने के लिए अनुदान पर यह उपकरण लगाए जाएंगे। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को यूपी एग्रीकल्चर की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिला उद्यान विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना कर आवेदन का सत्यापन करेंगे। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद किसान अपने खर्चे से पंजीकृत फर्म से खेतों में इच्छा अनुसार टपक या फव्वारा उपकरण लगवाएंगे। जिला उद्यान विभाग लघु एवं सीमांत किसान को 90 प्रतिशत व इससे अधिक भूमि वाले किसान को लागत का 80 अनुदान देगा।
ऐसे होती है सिंचाई
खेत में टपक विधि का इस्तेमाल करने के लिए पौधों की दूरी निर्धारित होना आवश्यक है। ऊपर से लगे पाइप में सुराख के जरिए पानी की बूंद बराबर पौधों पर गिरती रहती है। इसके लिए खेत में एक बड़ी टंकी लगाई जाती है, जबकि फव्वारा विधि में मोटर से पानी सप्लाई के जरिए पौधों को फुहारे दिए जाते हैं। टपक विधि में प्रति हेक्टेयर 1.15 लाख रुपये लागत आएगी। इसमें सरकार की ओर से 80 से 90 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। दस से बीस हजार रुपये किसान को खर्च करना होगा। इस विधि से गन्ना, आलू, फूल, सब्जी आदि की सिंचाई की जाएगी।
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कम पानी से मिलती है अधिक पैदावार
टपक और फव्वारा दोनों विधि अपनाने से पानी की बर्बादी कम होती है। पौधों की सिंचाई निरंतर होती रहती है। इससे पैदावार में वृद्धि होती है। इस विधि का प्रयोग अनाज या बागवानी किसी भी फसल के लिए किया जा सकता है। योजना का लाभ आधा हेक्टेयर वाले किसानों को भी दिया जाएगा।
- सीताराम यादव, जिला उद्यान अधिकारी।
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कम पानी में ही मिलेगी अच्छी पैदावार, घटेगी लागत
जिले को 865 हेक्टेयर में सिंचाई का मिला लक्ष्य
बैकुंठ नाथ शुक्ल
देवरिया। पानी की कमी और सिंचाई संसाधनों की बदहाली से जूझते किसानों की कृषि लागत घटाने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले के 865 हेक्टेयर खेतों में टपक (ड्रिप) और फव्वारा (पोर्टेबल स्प्रिंकलर) सिंचाई उपकरण लगाने का लक्ष्य दिया है। इससे पानी की तो बचत होगी ही, सिंचाई का खर्च कम होने से लाभ भी बढ़ेगा।
सिंचाई की यह विधि पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी में अधिक प्रचलित है। पूर्वी यूपी में इसे बढ़ावा देने के लिए अनुदान पर यह उपकरण लगाए जाएंगे। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को यूपी एग्रीकल्चर की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिला उद्यान विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना कर आवेदन का सत्यापन करेंगे। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद किसान अपने खर्चे से पंजीकृत फर्म से खेतों में इच्छा अनुसार टपक या फव्वारा उपकरण लगवाएंगे। जिला उद्यान विभाग लघु एवं सीमांत किसान को 90 प्रतिशत व इससे अधिक भूमि वाले किसान को लागत का 80 अनुदान देगा।
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ऐसे होती है सिंचाई
खेत में टपक विधि का इस्तेमाल करने के लिए पौधों की दूरी निर्धारित होना आवश्यक है। ऊपर से लगे पाइप में सुराख के जरिए पानी की बूंद बराबर पौधों पर गिरती रहती है। इसके लिए खेत में एक बड़ी टंकी लगाई जाती है, जबकि फव्वारा विधि में मोटर से पानी सप्लाई के जरिए पौधों को फुहारे दिए जाते हैं। टपक विधि में प्रति हेक्टेयर 1.15 लाख रुपये लागत आएगी। इसमें सरकार की ओर से 80 से 90 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। दस से बीस हजार रुपये किसान को खर्च करना होगा। इस विधि से गन्ना, आलू, फूल, सब्जी आदि की सिंचाई की जाएगी।
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कम पानी से मिलती है अधिक पैदावार
टपक और फव्वारा दोनों विधि अपनाने से पानी की बर्बादी कम होती है। पौधों की सिंचाई निरंतर होती रहती है। इससे पैदावार में वृद्धि होती है। इस विधि का प्रयोग अनाज या बागवानी किसी भी फसल के लिए किया जा सकता है। योजना का लाभ आधा हेक्टेयर वाले किसानों को भी दिया जाएगा।
- सीताराम यादव, जिला उद्यान अधिकारी।