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Deoria News: बाल गृह से तीन साल में 10 बच्चे गायब, व्यवस्था जस की तस
Sun, 13 Sep 2026 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 13 Sep 2026 01:31 AM IST
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देवरिया। राजकीय बाल गृह (बालक) से बीते तीन वर्षों में नौ किशोर और एक बालक निकल भाग चुके हैं। जिम्मेदारों ने कभी इससे सबक नहीं लिया और लचर व्यवस्था जस की तस बनी रही। बीते गुरुवार को स्कूल गए दो किशोर लापता हो गए। दोनों किशोरों की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही एक बार फिर पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बालक गृह में शिक्षक, सहायक अधीक्षक, केयरटेकर और लिपिक के पद खाली होने का असर बच्चों की पढ़ाई, निगरानी और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। अलग-अलग काम के लिए हिसाब से कर्मचारियों के पद सृजित हैं। शिक्षक तैनात होते तो परिसर में ही पढ़ाई की व्यवस्था होती और बच्चों को बाहर के स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।
स्कूल गए दो किशोरों के नहीं लौटने के बाद इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाल गृह में सहायक अधीक्षक का पद भी खाली है। ऐसे में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के साथ कर्मचारियों की निगरानी, दैनिक गतिविधियों, रजिस्टर, बजट और दूसरे विभागों से समन्वय जैसे प्रशासनिक कामों का अधिकतर भार प्रभारी अधीक्षक पर है।
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केयरटेकर नहीं होने से बच्चों की रोजमर्रा की देखभाल, अनुशासन, साफ-सफाई और निगरानी का काम प्रभावित हो रहा है। बच्चों को जरूरत पड़ने पर बाहर ले जाने और उनके साथ कर्मचारी उपलब्ध कराने जैसी जिम्मेदारियां जैसे-तैसे चल रही हैं।
लिपिक की तैनाती नहीं होने से उपस्थिति, प्रवेश-छुट्टी, स्टॉक, बजट, पत्राचार और दूसरे अभिलेखों से जुड़े कार्यालयी काम भी अन्य कर्मचारियों को संभालने पड़ते हैं। इस संबंध में सीडीओ का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने करने की कोशिश की गई मगर बात नहीं हो पाई। संवाद
बालक गृह में शिक्षक, सहायक अधीक्षक, केयरटेकर और लिपिक के पद खाली होने का असर बच्चों की पढ़ाई, निगरानी और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। अलग-अलग काम के लिए हिसाब से कर्मचारियों के पद सृजित हैं। शिक्षक तैनात होते तो परिसर में ही पढ़ाई की व्यवस्था होती और बच्चों को बाहर के स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।
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स्कूल गए दो किशोरों के नहीं लौटने के बाद इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाल गृह में सहायक अधीक्षक का पद भी खाली है। ऐसे में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के साथ कर्मचारियों की निगरानी, दैनिक गतिविधियों, रजिस्टर, बजट और दूसरे विभागों से समन्वय जैसे प्रशासनिक कामों का अधिकतर भार प्रभारी अधीक्षक पर है।
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केयरटेकर नहीं होने से बच्चों की रोजमर्रा की देखभाल, अनुशासन, साफ-सफाई और निगरानी का काम प्रभावित हो रहा है। बच्चों को जरूरत पड़ने पर बाहर ले जाने और उनके साथ कर्मचारी उपलब्ध कराने जैसी जिम्मेदारियां जैसे-तैसे चल रही हैं।
लिपिक की तैनाती नहीं होने से उपस्थिति, प्रवेश-छुट्टी, स्टॉक, बजट, पत्राचार और दूसरे अभिलेखों से जुड़े कार्यालयी काम भी अन्य कर्मचारियों को संभालने पड़ते हैं। इस संबंध में सीडीओ का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने करने की कोशिश की गई मगर बात नहीं हो पाई। संवाद