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Chitrakoot News: लकड़ी के खिलौनों को मिलेगी पहचान, बढ़ेगा बाजार

Fri, 13 Feb 2026 11:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 11:56 PM IST
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Wooden toys will gain recognition, the market will grow
13-सीकेटीपी-02-सीतापुर में तैयार हो रहा सामान्य सुविधा केंद्र। संवाद
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-डेढ़ करोड़ के सामान्य सुविधा केंद्र में लकड़ी के खिलौने होंगे तैयार

-मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू, दो महीने में केंद्र संचालन की संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जिले की सदियों पुरानी लकड़ी के खिलौनों की कला को पुनर्जीवित करने की दिशा में शासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से सीतापुर में बन रहा सामान्य सुविधा केंद्र (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) अब अपने अंतिम चरण में है। एक बीघे भूमि में निर्मित यह केंद्र आधुनिक मशीनों की स्थापना के साथ ही स्थानीय कारीगरों को तकनीकी सहयोग और तैयार उत्पादों के लिए एक नया और सुलभ बाजार प्रदान करेगा।
कभी चित्रकूट के लकड़ी के खिलौनों की पहचान देश के कोने-कोने में थी। लेकिन समय के साथ, आधुनिक उत्पादों और विशेष रूप से विदेशी, खासकर चीनी खिलौनों की बढ़ती मांग ने इस पारंपरिक उद्योग को समाप्ति की ओर धकेल दिया। इस कारण से जुड़े सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया था। इस स्थिति को भांपते हुए, शासन ने इस कला को बचाने और कारीगरों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इस सुविधा केंद्र की स्थापना का निर्णय लिया।
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आधुनिक मशीनों से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता
नवनिर्मित केंद्र में लकड़ी काटने, डिजाइन तैयार करने और फिनिशिंग के लिए तीन उन्नत मशीनें स्थापित की जाएंगी। इन मशीनों के लगने से न केवल उत्पादन की गति तेज होगी, बल्कि तैयार होने वाले खिलौनों की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार आएगा। यह स्थानीय कारीगरों को अधिक टिकाऊ और आकर्षक उत्पाद बनाने में मदद करेगा। सुविधा केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यह तैयार खिलौनों की मार्केटिंग और बिक्री की व्यवस्था भी संभालेगा। इस पहल से सीधे तौर पर लगभग पांच सौ लोगों को स्थायी रोजगार मिलने की उम्मीद है, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से कई अन्य परिवारों के लिए भी आय के नए अवसर सृजित होंगे।
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150 परिवारों में जागी उम्मीद की किरण
जिले में लगभग 150 परिवार अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से लकड़ी के खिलौनों के निर्माण पर निर्भर थे। काम कम होने के कारण कई लोगों को वैकल्पिक रोजगार की तलाश करनी पड़ी थी। अनुभवी कारीगरों का कहना है कि वे पहले 50 से अधिक प्रकार के खिलौने और अन्य लकड़ी के उत्पाद बनाते थे, जिनकी मांग दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी थी लेकिन चीनी उत्पादों के बाजार में आने से उनकी कला को उचित पहचान और मूल्य मिलना मुश्किल हो गया था। पहले करीब 10 से 15 करोड़ को होता कारोबार

सालाना कारोबार एक करोड़ में सिमटा
वाराणसी का लकड़ी के खिलौना उद्योग लगभग 40-45 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर रखता है। चित्रकूट का उद्योग वर्तमान में वाराणसी की तुलना में छोटा और कुटीर उद्योग रूप में संचालित है। पहले यहां करीब 10 से 15 करोड़ के लकड़ी के खिलौनों का कारोबार होता था। अब लगभग एक करोड़ में सिमट गया है।

वर्जन
इस सामान्य सुविधा केंद्र के निर्माण से यह पारंपरिक उद्योग निश्चित रूप से एक नई दिशा पकड़ेगा। केंद्र के माध्यम से न केवल 500 से अधिक कारीगरों को स्थायी रोजगार मिलेगा, बल्कि अन्य परिवारों के लिए भी आय के नए रास्ते खुलेंगे। केंद्र का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और मशीनों की खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे उम्मीद है कि अगले दो महीनों में यह केंद्र कार्यशील हो जाएगा।-अजय प्रसाद, सहायक उपायुक्त, उद्योग विभाग
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