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Chitrakoot News: चित्रकूटः प्राकृतिक संसाधन का उपयोग करें दोहन नहीं
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के बीएससी प्रथम वर्ष के बायो समूह के छात्र-छात्राओं के दल ने ग्राम प्रवास शिविर के अंतर्गत ग्राम टेढी में किया। इसमें 36 छात्र व 42 छात्राएं शामिल रहीं। इसमें संदेश दिया गया कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाए। इनका दोहन न किया जाए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने टेढ़ी गांव में विद्यालयों के शिक्षकों से शिक्षण व्यवस्था की चर्चा की। छात्रों को 10-10 के समूहों में बांटकर विभिन्न विषयों पर गांव के लोगों से जानकारी एकत्र करने के लिए भेजा गया। इसके लिए निर्धारित विषय साक्षरता की स्थिति, स्वास्थ्य की स्थिति, परिवार संरचना, पशुपालन की स्थिति, फसल चक्र की स्थिति, विद्यालय द्वारा किए जा रहे नवाचार, गांव में जल का स्तर व मंदाकिनी जल संरक्षण पर जन विचार एकत्र किए गए।
इसमें यह सामने आया कि गांव में जल का स्तर बहुत ही अच्छा है। लगभग 40 से 60 फीट के अंतर्गत जल उपलब्ध हो जाता है। मंदाकिनी जल संरक्षण के बारे में भी लोगों को जागरूक किया गया। लोगों को बताया गया कि सतत विकास की परिकल्पना पर कार्य करें। जो भी हमें प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं उनका हम सदुपयोग करें न कि दोहन ताकि यह सारे प्राकृतिक संसाधन हमारी आगामी पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें।
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फिर विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंकर लाल द्विवेदी व शंकर प्रसाद प्रजापति से भी विद्यालय व छात्रों के बारे में जानकारी ली गई। इस दौरान डॉ. रविंद्र सिंह, डॉ. घनश्याम गुप्ता, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद , डा.साधना चौरसिया, गुलाब रानी व शिवानी मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने टेढ़ी गांव में विद्यालयों के शिक्षकों से शिक्षण व्यवस्था की चर्चा की। छात्रों को 10-10 के समूहों में बांटकर विभिन्न विषयों पर गांव के लोगों से जानकारी एकत्र करने के लिए भेजा गया। इसके लिए निर्धारित विषय साक्षरता की स्थिति, स्वास्थ्य की स्थिति, परिवार संरचना, पशुपालन की स्थिति, फसल चक्र की स्थिति, विद्यालय द्वारा किए जा रहे नवाचार, गांव में जल का स्तर व मंदाकिनी जल संरक्षण पर जन विचार एकत्र किए गए।
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इसमें यह सामने आया कि गांव में जल का स्तर बहुत ही अच्छा है। लगभग 40 से 60 फीट के अंतर्गत जल उपलब्ध हो जाता है। मंदाकिनी जल संरक्षण के बारे में भी लोगों को जागरूक किया गया। लोगों को बताया गया कि सतत विकास की परिकल्पना पर कार्य करें। जो भी हमें प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं उनका हम सदुपयोग करें न कि दोहन ताकि यह सारे प्राकृतिक संसाधन हमारी आगामी पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें।
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फिर विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंकर लाल द्विवेदी व शंकर प्रसाद प्रजापति से भी विद्यालय व छात्रों के बारे में जानकारी ली गई। इस दौरान डॉ. रविंद्र सिंह, डॉ. घनश्याम गुप्ता, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद , डा.साधना चौरसिया, गुलाब रानी व शिवानी मौजूद रहीं।