{"_id":"f81c2e40d43ee9ee64b350774563fee4","slug":"university-students-with-disabilities-deuce-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकलांग विवि के छात्रों का उपद्रव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकलांग विवि के छात्रों का उपद्रव
Updated Fri, 27 Mar 2015 10:41 PM IST
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के
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छात्रों ने शुक्रवार को जमकर उपद्रव किया। रात में किसी बात से उग्र
छात्रों ने पहले तो आपस में मारपीट की, शाम को जाम लगा दिया। सीतापुर एसओ
की मिन्नतों के बाद भी नहीं मान रहे थेे।
पुलिस ने किसी तरह एक तरफ से आवागमन शुरू कराया। इनकी मांग थी कि कुलाधिपति आकर उनकी बात सुनें। कोतवाली प्रभारी के कोर्ट का आदेश बताने पर ये सड़क से तो हट गए पर कालेज के मुख्य गेट के पास बैठे रहे।
गुरुवार रात लगभग तीन बजे किसी बात को लेकर दृष्टि बाधित छात्रों और निशक्त छात्रों के बीच गालीगलौज हुई और मारपीट होने लगी। वार्डन बालमुकुंद पांडे वहां पहुंचे और मामला शांत कराने की कोशिश की पर छात्र नहीं माने। सुबह मामला गर्मा गया।
निशक्त छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दे दिया। इनका कहना था कि दो दृष्टि बाधित छात्रों ने उनसे मारपीट की, इसलिए इनको बाहर किया जाए। प्रति कुलपति योगेश चंद्र दुबे ने आश्वासन दिया कि वे शाम तीन बजे तक अपना निर्णय दे देंगे।
इस पर उग्र छात्रों ने मेस पर ताला डाल दिया। प्रति कुलपति के निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना छात्रों ने बेड़ी पुलिया मार्ग पर जाम लगा दिया। ये वार्डन बालमुकुंद को हटाने की मांग कर रहे थे। एसओ नीरज यादव ने प्रति कुलपति से बात की। प्रति कुलपति ने मांग मान ली और लिखित आदेश जारी कर दिया।
छात्रों ने प्रति कुलपति को बुलाने की मांग कर दी। एसओ प्रति कुलपति योगेश चंद्र दुबे को लिवा लाए। छात्र उन्हें देखकर और उग्र हो गए। छात्रों ने मांग रखी कि तीनों वार्डनों को हटाया जाए, दृष्टिबाधित छात्रों पर कार्रवाई हो। कुलपति ने आनन फानन मीटिंग बुलाई और कहा कि कुलाधिपति के आदेश आने तक तीनों वार्डनों को जांच पूरी होने तक हटा दिया जाता है।
छात्रों को यह आदेश दिखाया तो बोले, मुहर लगाकर लाओ। पुलिसकर्मियों ने फिर जाकर मुहर लगवाई। छात्रों को यह दिखाया गया तो फिर भी ये न माने, बोले- तीनों को कैंपस से निष्कासित किया जाए। इस दौरान दोनों तरफ भारी भीड़ लग गई।
छात्रों की मांग थी कि कुलाधिपति को बुलाओ तीनों वार्डनों को निष्कासित करो तभी जाम खोला जाएगा। पुलिस प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश की पर छात्र प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
पुलिसकर्मियों ने एक तरफ से आवागमन शुरू करा दिया था। लगभग तीन घंटे बाद पहुंचे कोतवाली प्रभारी ओपी तिवारी ने छात्रों को जाम के संबंध में कोर्ट का आदेश बताया। इस पर छात्र सड़क से तो हट गए पर गेट के सामने बैठ गए।
छात्रों ने सारी हदें पार कर दीं। एसओ के समझाने और बार-बार मिन्नतों के बाद ये अपनी मांगें बदलते रहे। बेड़ी पुलिया से तीर्थ क्षेत्र आने जाने वाले लोगों को भी परेशान करते। कोई निकलने की कोशिश करता तो पीटते थे। बकरियों को भी दौड़ाकर पीटा।
आंदोलन करने वालों को सहपाठियों तक की फिक्र नहीं रही। मेस पर शाम तक ताला डला रहा, जिससे छात्र और छात्राएं भूखे रहे। कुछ ने तो बाहर बिस्कुट या ढाबे में खाकर भूख मिटाई पर छात्राएं छात्रों के उग्र प्रदर्शन की वजह से अंदर ही भूखी बैठी रहीं। वार्डन ने मेस का ताला खोलने की मिन्नत की पर ये नहीं माने।
प्रति कुलपति ने बताया कि कुलाधिपति रामभद्राचार्य से बात करने के बाद जांच तक तीनों वार्डनों को हटा दिया गया है। कुलाधिपति रामनवमी के कार्यक्रम की तैयारियों में होने की वजह से नहीं आ सके। छात्रों पर निर्णय कुलाधिपति के आने पर ही किया जाएगा।
पुलिस ने किसी तरह एक तरफ से आवागमन शुरू कराया। इनकी मांग थी कि कुलाधिपति आकर उनकी बात सुनें। कोतवाली प्रभारी के कोर्ट का आदेश बताने पर ये सड़क से तो हट गए पर कालेज के मुख्य गेट के पास बैठे रहे।
गुरुवार रात लगभग तीन बजे किसी बात को लेकर दृष्टि बाधित छात्रों और निशक्त छात्रों के बीच गालीगलौज हुई और मारपीट होने लगी। वार्डन बालमुकुंद पांडे वहां पहुंचे और मामला शांत कराने की कोशिश की पर छात्र नहीं माने। सुबह मामला गर्मा गया।
निशक्त छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दे दिया। इनका कहना था कि दो दृष्टि बाधित छात्रों ने उनसे मारपीट की, इसलिए इनको बाहर किया जाए। प्रति कुलपति योगेश चंद्र दुबे ने आश्वासन दिया कि वे शाम तीन बजे तक अपना निर्णय दे देंगे।
इस पर उग्र छात्रों ने मेस पर ताला डाल दिया। प्रति कुलपति के निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना छात्रों ने बेड़ी पुलिया मार्ग पर जाम लगा दिया। ये वार्डन बालमुकुंद को हटाने की मांग कर रहे थे। एसओ नीरज यादव ने प्रति कुलपति से बात की। प्रति कुलपति ने मांग मान ली और लिखित आदेश जारी कर दिया।
छात्रों ने प्रति कुलपति को बुलाने की मांग कर दी। एसओ प्रति कुलपति योगेश चंद्र दुबे को लिवा लाए। छात्र उन्हें देखकर और उग्र हो गए। छात्रों ने मांग रखी कि तीनों वार्डनों को हटाया जाए, दृष्टिबाधित छात्रों पर कार्रवाई हो। कुलपति ने आनन फानन मीटिंग बुलाई और कहा कि कुलाधिपति के आदेश आने तक तीनों वार्डनों को जांच पूरी होने तक हटा दिया जाता है।
छात्रों को यह आदेश दिखाया तो बोले, मुहर लगाकर लाओ। पुलिसकर्मियों ने फिर जाकर मुहर लगवाई। छात्रों को यह दिखाया गया तो फिर भी ये न माने, बोले- तीनों को कैंपस से निष्कासित किया जाए। इस दौरान दोनों तरफ भारी भीड़ लग गई।
छात्रों की मांग थी कि कुलाधिपति को बुलाओ तीनों वार्डनों को निष्कासित करो तभी जाम खोला जाएगा। पुलिस प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश की पर छात्र प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
पुलिसकर्मियों ने एक तरफ से आवागमन शुरू करा दिया था। लगभग तीन घंटे बाद पहुंचे कोतवाली प्रभारी ओपी तिवारी ने छात्रों को जाम के संबंध में कोर्ट का आदेश बताया। इस पर छात्र सड़क से तो हट गए पर गेट के सामने बैठ गए।
छात्रों ने सारी हदें पार कर दीं। एसओ के समझाने और बार-बार मिन्नतों के बाद ये अपनी मांगें बदलते रहे। बेड़ी पुलिया से तीर्थ क्षेत्र आने जाने वाले लोगों को भी परेशान करते। कोई निकलने की कोशिश करता तो पीटते थे। बकरियों को भी दौड़ाकर पीटा।
आंदोलन करने वालों को सहपाठियों तक की फिक्र नहीं रही। मेस पर शाम तक ताला डला रहा, जिससे छात्र और छात्राएं भूखे रहे। कुछ ने तो बाहर बिस्कुट या ढाबे में खाकर भूख मिटाई पर छात्राएं छात्रों के उग्र प्रदर्शन की वजह से अंदर ही भूखी बैठी रहीं। वार्डन ने मेस का ताला खोलने की मिन्नत की पर ये नहीं माने।
प्रति कुलपति ने बताया कि कुलाधिपति रामभद्राचार्य से बात करने के बाद जांच तक तीनों वार्डनों को हटा दिया गया है। कुलाधिपति रामनवमी के कार्यक्रम की तैयारियों में होने की वजह से नहीं आ सके। छात्रों पर निर्णय कुलाधिपति के आने पर ही किया जाएगा।