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Chitrakoot News: ओटीपी बंद होने से घोटाले को मिला बढ़ावा, ऑडिट टीम आने से पहले ही सतर्क हो जाते थे
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कोषागार घोटाला
फोटो नंबर- 16- कोषागार विभाग में जांच व पूछताछ करते एडी कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी व मौजूद एसटीओ रमेश सिंह। संवाद
फाइलों के रखरखाव का तरीका बदलने के निर्देश, कई सवालों पर बोले एडी कोषागार-ईडी कर लेगी सब पता
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। वर्ष 2018 में भुगतान के लिए ओटीपी बंद होने से कोषागार घोटाले को बढ़ावा मिला। इससे अभी हाल ही में कोषागार में हुए 43.13 करोड़ के घोटाले के आरोपियों को मुंह मांगी मुराद मिल गई। उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया और जमकर पैसा निकासी कर सरकारी धनराशि हड़प ली। खास बात तो यह है कि आडिट टीम आने से पहले ही कोषागार के अफसर-बिचौलिए अलर्ट हो जाते थे और शातिराना अंदाज में ये ऑडिट टीम को घुमाते भी रहे।
विभागीय जानकारों की मानें तो पहले बैंक से भुगतान के पूर्व ओटीपी आने पर संबधित अधिकारी एसटीओ से पूछकर ओटीपी बताता था। इससे भुगतान कितना और किसे जा रहा है, इसकी जानकारी एसटीओ को हो जाती थी। लेकिन आठ साल से यह भुगतान प्रक्रिया बदली और कोषागार से बैंक खाते में रकम जाने के बाद कोई जांच नहीं होती सीधे भुगतान हो जाता है। इसके अलावा ऑडिट टीम को भी ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी शातिराना तरीके से घुमाते थे। दरअसल एक माह पूर्व ही विभाग को पता चलता था कि ऑडिट टीम आ रही है और वह एक माह पूर्व के भुगतान का ऑडिट करती है। रेंडम चेकिंग में शातिर अधिकारी व कर्मचारी उस माह में अवैध रूप से अपने चहेतों को भेजे जाने वाली रकम नहीं भेजते थे। इससे यह पकड़ में नहीं आ पाया।
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एडी कोषागार ने देखी घोटाले की फाइलें
शुक्रवार को जिला कोषागार कार्यालय में मामले की जांच करने अपर निदेशक कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी पहुंचे। डबल लॉक का निरीक्षण करने के बाद घोटाला मामले की फाइलों को भी देखा। कहा कि यहां पर फाइलों के रखरखाव का तरीका बदलना होगा। अब ऑनलाइन सब रिकार्ड होने के कारण फाइलों का काम भी कम करना होगा। घोटाला होने के बारे में कहा कि इसी वजह से फाइलों के आंकडे कई खाताधारकों के बैंक व सांख्यकीय विभाग लखनऊ से भी नहीं मिल पा रहे हैं। ज्यादा बडा घोटाला होने के कारण ही अब ईडी सारे तथ्य निकाल लेगी। सारा रिकार्ड उन्हें भेजा जा चुका है। किसी भी दिन ईडी की टीम जिले व अन्य जरुरत वाले स्थलों पर जा सकती है। निरीक्षण के बाद उन्होंने एसटीओ रमेश सिंह समेत अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों से भी पूछताछ की। सारे मामले में निर्देश दिए कि कोई भी तथ्य कोई छिपाए नहीं जिसे जो पता हो वह जांच टीम को बताए। इससे सही रिपोर्ट सामने आएगी और भविष्य में ऐसे घोटाले की संभावना भी न रहे।
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इनसेट
चित्रकूट। पत्रकारों से बातचीत में अपर निदेशक कोषागार ने बताया कि कोई भी भुगतान तीन चार पटल से होकर गुजरता है ऐसे में आठ साल या 12 साल से यह कैसे चलता रहा। यह सब ईडी पता कर लेगी। इतना जरुर बताया कि पहले किसी भी पेंशनर के भुगतान के पूर्व ओटीपी नंबर आता था इसके लिए विभागीय कर्मचारी एसटीओ से पुष्टि कराता था। अब यह सिस्टम बंद है। इससे पता नहीं चल पाता कि किसे कितना भुगतान कितनी बार भेजा गया है। किसी शिकायत पर ही यह जांच होती है। अभी कई अधिकारियों के और शामिल होने या किसी को बचाने के लिए चल रहे प्रयास के सवाल पर कहा कि ऑडिट टीम को भी धोखे में रखने का तरीका भ्रष्टाचारियों को पता था। एक माह पहले ही इसकी तैयारी करते थे। अब यह सामने आ रहा है। चेकिंग के दौरान सभी पांच हजार फाइलों की जांच तो होती नहीं थी रेंडम तरीके से फाइल देखी जाती है। कौन सी फाइल कब दिखानी है इसमें विभागीय अधिकारी कर्मचारी टीम को भ्रमित करते थे। बताया कि विभागीय जांच में विभाग के कई लोगों के नाम हैं। इसमें चार के खिलाफ तो प्राथमिकी दर्ज है कुछ और होने की संभावना के सवाल पर हंसकर टाल दिया। कहा कि ईडी एसआईटी सब पता करेगी।
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फोटो नंबर- 16- कोषागार विभाग में जांच व पूछताछ करते एडी कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी व मौजूद एसटीओ रमेश सिंह। संवाद
फाइलों के रखरखाव का तरीका बदलने के निर्देश, कई सवालों पर बोले एडी कोषागार-ईडी कर लेगी सब पता
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। वर्ष 2018 में भुगतान के लिए ओटीपी बंद होने से कोषागार घोटाले को बढ़ावा मिला। इससे अभी हाल ही में कोषागार में हुए 43.13 करोड़ के घोटाले के आरोपियों को मुंह मांगी मुराद मिल गई। उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया और जमकर पैसा निकासी कर सरकारी धनराशि हड़प ली। खास बात तो यह है कि आडिट टीम आने से पहले ही कोषागार के अफसर-बिचौलिए अलर्ट हो जाते थे और शातिराना अंदाज में ये ऑडिट टीम को घुमाते भी रहे।
विभागीय जानकारों की मानें तो पहले बैंक से भुगतान के पूर्व ओटीपी आने पर संबधित अधिकारी एसटीओ से पूछकर ओटीपी बताता था। इससे भुगतान कितना और किसे जा रहा है, इसकी जानकारी एसटीओ को हो जाती थी। लेकिन आठ साल से यह भुगतान प्रक्रिया बदली और कोषागार से बैंक खाते में रकम जाने के बाद कोई जांच नहीं होती सीधे भुगतान हो जाता है। इसके अलावा ऑडिट टीम को भी ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी शातिराना तरीके से घुमाते थे। दरअसल एक माह पूर्व ही विभाग को पता चलता था कि ऑडिट टीम आ रही है और वह एक माह पूर्व के भुगतान का ऑडिट करती है। रेंडम चेकिंग में शातिर अधिकारी व कर्मचारी उस माह में अवैध रूप से अपने चहेतों को भेजे जाने वाली रकम नहीं भेजते थे। इससे यह पकड़ में नहीं आ पाया।
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एडी कोषागार ने देखी घोटाले की फाइलें
शुक्रवार को जिला कोषागार कार्यालय में मामले की जांच करने अपर निदेशक कोषागार विष्णुकांत द्विवेदी पहुंचे। डबल लॉक का निरीक्षण करने के बाद घोटाला मामले की फाइलों को भी देखा। कहा कि यहां पर फाइलों के रखरखाव का तरीका बदलना होगा। अब ऑनलाइन सब रिकार्ड होने के कारण फाइलों का काम भी कम करना होगा। घोटाला होने के बारे में कहा कि इसी वजह से फाइलों के आंकडे कई खाताधारकों के बैंक व सांख्यकीय विभाग लखनऊ से भी नहीं मिल पा रहे हैं। ज्यादा बडा घोटाला होने के कारण ही अब ईडी सारे तथ्य निकाल लेगी। सारा रिकार्ड उन्हें भेजा जा चुका है। किसी भी दिन ईडी की टीम जिले व अन्य जरुरत वाले स्थलों पर जा सकती है। निरीक्षण के बाद उन्होंने एसटीओ रमेश सिंह समेत अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों से भी पूछताछ की। सारे मामले में निर्देश दिए कि कोई भी तथ्य कोई छिपाए नहीं जिसे जो पता हो वह जांच टीम को बताए। इससे सही रिपोर्ट सामने आएगी और भविष्य में ऐसे घोटाले की संभावना भी न रहे।
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चित्रकूट। पत्रकारों से बातचीत में अपर निदेशक कोषागार ने बताया कि कोई भी भुगतान तीन चार पटल से होकर गुजरता है ऐसे में आठ साल या 12 साल से यह कैसे चलता रहा। यह सब ईडी पता कर लेगी। इतना जरुर बताया कि पहले किसी भी पेंशनर के भुगतान के पूर्व ओटीपी नंबर आता था इसके लिए विभागीय कर्मचारी एसटीओ से पुष्टि कराता था। अब यह सिस्टम बंद है। इससे पता नहीं चल पाता कि किसे कितना भुगतान कितनी बार भेजा गया है। किसी शिकायत पर ही यह जांच होती है। अभी कई अधिकारियों के और शामिल होने या किसी को बचाने के लिए चल रहे प्रयास के सवाल पर कहा कि ऑडिट टीम को भी धोखे में रखने का तरीका भ्रष्टाचारियों को पता था। एक माह पहले ही इसकी तैयारी करते थे। अब यह सामने आ रहा है। चेकिंग के दौरान सभी पांच हजार फाइलों की जांच तो होती नहीं थी रेंडम तरीके से फाइल देखी जाती है। कौन सी फाइल कब दिखानी है इसमें विभागीय अधिकारी कर्मचारी टीम को भ्रमित करते थे। बताया कि विभागीय जांच में विभाग के कई लोगों के नाम हैं। इसमें चार के खिलाफ तो प्राथमिकी दर्ज है कुछ और होने की संभावना के सवाल पर हंसकर टाल दिया। कहा कि ईडी एसआईटी सब पता करेगी।