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दो घंटे बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
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चित्रकूट। कहने को तो जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों को घर से लाने के लिए एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है, लेकिन दो घंटे तक इंतजार के बाद भी बच्चे व परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली। इससे वे परेशान रहे।
भौंरी गांव निवासी मुनिया देवी ने बताया कि नाती अमन के कुपोषित होने पर कुछ दिनों पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। दोनों आंगनबाड़ी
कार्यकर्ता के साथ घर जाने के लिए अस्पताल से बाहर आकर 102 एंबुलेंस को फोन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि दो घंटे में तीन बार फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं आई। ठंड में वह बच्चे व उसकी दादी के साथ परेशान रहीं।
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एंबुलेंस प्रभारी अश्वनी कुमार ने बताया कि दरअसल अस्पताल पहुंचाने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है। इस केस में मरीज को घर पहुंचाना था और एंबुलेंस आसपास नहीं थी, इसीलिए कुछ देरी हुई है।
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भौंरी गांव निवासी मुनिया देवी ने बताया कि नाती अमन के कुपोषित होने पर कुछ दिनों पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। दोनों आंगनबाड़ी
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कार्यकर्ता के साथ घर जाने के लिए अस्पताल से बाहर आकर 102 एंबुलेंस को फोन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि दो घंटे में तीन बार फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं आई। ठंड में वह बच्चे व उसकी दादी के साथ परेशान रहीं।
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एंबुलेंस प्रभारी अश्वनी कुमार ने बताया कि दरअसल अस्पताल पहुंचाने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है। इस केस में मरीज को घर पहुंचाना था और एंबुलेंस आसपास नहीं थी, इसीलिए कुछ देरी हुई है।