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Chitrakoot News: मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, यूपी-एमपी का संपर्क टूटा
Sat, 29 Aug 2026 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:36 PM IST
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फोटो 29 सीकेटीपी 19 बाढ़ से पुल घाट में बनी मंदिर डूबी। संवाद
चित्रकूट/खोही। मध्य प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद शनिवार सुबह मंदाकिनी नदी विकराल और रौद्र रूप में आ गई।
शनिवार सुबह छह बजे से जलस्तर बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ और सात बजते-बजते नदी खतरे के निशान को पार कर गई। इससे यूपी-एमपी का संपर्क टूट चुका है। वहीं खतरे को देखते हुए चित्रकूट-बांदा मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
इस साल की सबसे बड़ी बाढ़ ने आरोग्य धाम, रामघाट, तरौंहा सहित आसपास के गांवों में तबाही मचा दी है। दो से चार मंजिला मकान भी पानी में समा गए हैं। बेडी पुलिया से रामघाट के मुख्य मार्ग पर नावें चलने लगी। मंदाकिनी में आई बाढ़ से पूरा रामघाट, आरोग्य धाम पानी से भर गया।
मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर से रामघाट के आसपास की करीब 800 दुकानें पूरी तरह से डूब गईं हैं। वहीं रामघाट के आसपास व यूपी एमपी मार्ग के दो मंजिला इमारतें पूरी तरह डूब चुकी हैं। इसके बाद भी मंदाकिनी का जलस्तर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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मध्य प्रदेश में अभी भी तेज बारिश जारी है, इससे जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। काफी संख्या में लोग घरों में कैद हो गए हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वहीं कुछ लोग अपना सामान लेकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग घरों से सामान नहीं निकाल पाए हैं। जिससे सब बर्बाद हो गया। बढ़ते जलस्तर को लेकर सतना जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया गया है और सीतापुर शंख चौराहा से वाहनों को रोका गया है।
हालात को देखते हुए एसपी अरुण कुमार सिंह, एडीएम चंद्रशेखर, एसडीएम अजय यादव सहित पूरा प्रशासनिक अमला रामघाट पहुंच गया। प्रशासन लाउडस्पीकर से लोगों को नदी किनारे न जाने की अपील कर रहा है और निचले इलाकों को खाली करा रहा है।
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हनुमान धारा जाने वाला पुल बहा
मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट में भारी तबाही मचा दी है। रामघाट के लंका तिराहा से हनुमान धारा जाने वाला बड़ा पुल बाढ़ के तेज बहाव में टूट गया है। पुल टूटने की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोगों में दहशत है। बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। कई घाट और संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं, जिससे आवागमन ठप हो गया है।
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होटलों में फंसे लोग, वीडियो वायरल कर लगाई मदद की गुहार
खोही। मंदाकिनी में आई बाढ़ के बाद रामघाट के आसपास के होटलों में सैकड़ों श्रद्धालु फंस गए हैं। सबसे ज्यादा आरोग्य धाम और पुरानी लंका तिराहा के होटलों में श्रद्धालु फंसे हुए हैं। चारों तरफ पानी ही पानी होने से श्रद्धालु होटलों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने होटल की खिड़कियों और छतों से फंसे होने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
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अब हेलीकॉप्टर से होगा राहत-बचाव कार्य
खोही/चित्रकूट। मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ में फंसे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सतना सांसद गणेश सिंह ने बाढ़ पीड़ितों के लिए हवाई राहत सेवा की मांग की थी, जिस पर सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने जल्द ही हेलीकॉप्टर भेजने का आश्वासन दिया है। हेलीकॉप्टर की मदद से होटलों और ऊंचे स्थानों पर फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आसानी से निकाला जा सकेगा। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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मंदाकिनी के रौद्र रूप से पुल के करीब पहुंचा पानी, झांसी-मिर्जापुर हाईवे बंद
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर व तेज बहाव ने शनिवार को शहर की रफ्तार रोक दी। दोपहर करीब 1:30 बजे नदी का पानी झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर कर्वी को जोड़ने वाले पुल के करीब पहुंच गया। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पुल पर आवागमन बंद कर दिया।
हाईवे बंद होने से कानपुर, प्रयागराज, बांदा, हमीरपुर समेत कई जिलों की ओर जाने और मुख्यालय आने वाले करीब 10 से 15 हजार राहगीर रास्ते में फंस गए। बांदा से प्रयागराज जाने वाली बसों को बेड़ी पुलिया में ही रोक दिया गया। दूसरे वाहनों को भी बैरिकेडिंग कर रोक दिया गया। देखते ही देखते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोग पानी कम होने और पुल खुलने का इंतजार करते रहे।
पुल के पास पानी पहुंचने की सूचना मिलते ही डीएम पुलकित गर्ग और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने पुल के पास बांस-बल्ली लगाकर बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद भी कई लोग बैरिकेडिंग पार कर पुल के करीब पहुंचने की कोशिश करते रहे।
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रक्षाबंधन के बाद लौटने वालों की भीड़ से बढ़ी परेशानी
रक्षाबंधन के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और कामकाज की जगहों पर लौट रहे थे। इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या भी काफी थी। हाईवे पर आवागमन बंद होने के कारण कई महिलाएं बच्चों के साथ घंटों सड़क किनारे बैठकर पुल खुलने का इंतजार करती रहीं। लोगों का कहना था कि पानी कम होने के बाद ही वह अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सकेंगे।
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शनिवार सुबह छह बजे से जलस्तर बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ और सात बजते-बजते नदी खतरे के निशान को पार कर गई। इससे यूपी-एमपी का संपर्क टूट चुका है। वहीं खतरे को देखते हुए चित्रकूट-बांदा मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
इस साल की सबसे बड़ी बाढ़ ने आरोग्य धाम, रामघाट, तरौंहा सहित आसपास के गांवों में तबाही मचा दी है। दो से चार मंजिला मकान भी पानी में समा गए हैं। बेडी पुलिया से रामघाट के मुख्य मार्ग पर नावें चलने लगी। मंदाकिनी में आई बाढ़ से पूरा रामघाट, आरोग्य धाम पानी से भर गया।
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मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर से रामघाट के आसपास की करीब 800 दुकानें पूरी तरह से डूब गईं हैं। वहीं रामघाट के आसपास व यूपी एमपी मार्ग के दो मंजिला इमारतें पूरी तरह डूब चुकी हैं। इसके बाद भी मंदाकिनी का जलस्तर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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मध्य प्रदेश में अभी भी तेज बारिश जारी है, इससे जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। काफी संख्या में लोग घरों में कैद हो गए हैं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वहीं कुछ लोग अपना सामान लेकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग घरों से सामान नहीं निकाल पाए हैं। जिससे सब बर्बाद हो गया। बढ़ते जलस्तर को लेकर सतना जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया गया है और सीतापुर शंख चौराहा से वाहनों को रोका गया है।
हालात को देखते हुए एसपी अरुण कुमार सिंह, एडीएम चंद्रशेखर, एसडीएम अजय यादव सहित पूरा प्रशासनिक अमला रामघाट पहुंच गया। प्रशासन लाउडस्पीकर से लोगों को नदी किनारे न जाने की अपील कर रहा है और निचले इलाकों को खाली करा रहा है।
हनुमान धारा जाने वाला पुल बहा
मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट में भारी तबाही मचा दी है। रामघाट के लंका तिराहा से हनुमान धारा जाने वाला बड़ा पुल बाढ़ के तेज बहाव में टूट गया है। पुल टूटने की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोगों में दहशत है। बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। कई घाट और संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं, जिससे आवागमन ठप हो गया है।
होटलों में फंसे लोग, वीडियो वायरल कर लगाई मदद की गुहार
खोही। मंदाकिनी में आई बाढ़ के बाद रामघाट के आसपास के होटलों में सैकड़ों श्रद्धालु फंस गए हैं। सबसे ज्यादा आरोग्य धाम और पुरानी लंका तिराहा के होटलों में श्रद्धालु फंसे हुए हैं। चारों तरफ पानी ही पानी होने से श्रद्धालु होटलों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने होटल की खिड़कियों और छतों से फंसे होने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
अब हेलीकॉप्टर से होगा राहत-बचाव कार्य
खोही/चित्रकूट। मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ में फंसे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। सतना सांसद गणेश सिंह ने बाढ़ पीड़ितों के लिए हवाई राहत सेवा की मांग की थी, जिस पर सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने जल्द ही हेलीकॉप्टर भेजने का आश्वासन दिया है। हेलीकॉप्टर की मदद से होटलों और ऊंचे स्थानों पर फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आसानी से निकाला जा सकेगा। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मंदाकिनी के रौद्र रूप से पुल के करीब पहुंचा पानी, झांसी-मिर्जापुर हाईवे बंद
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर व तेज बहाव ने शनिवार को शहर की रफ्तार रोक दी। दोपहर करीब 1:30 बजे नदी का पानी झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर कर्वी को जोड़ने वाले पुल के करीब पहुंच गया। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पुल पर आवागमन बंद कर दिया।
हाईवे बंद होने से कानपुर, प्रयागराज, बांदा, हमीरपुर समेत कई जिलों की ओर जाने और मुख्यालय आने वाले करीब 10 से 15 हजार राहगीर रास्ते में फंस गए। बांदा से प्रयागराज जाने वाली बसों को बेड़ी पुलिया में ही रोक दिया गया। दूसरे वाहनों को भी बैरिकेडिंग कर रोक दिया गया। देखते ही देखते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लोग पानी कम होने और पुल खुलने का इंतजार करते रहे।
पुल के पास पानी पहुंचने की सूचना मिलते ही डीएम पुलकित गर्ग और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने पुल के पास बांस-बल्ली लगाकर बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद भी कई लोग बैरिकेडिंग पार कर पुल के करीब पहुंचने की कोशिश करते रहे।
रक्षाबंधन के बाद लौटने वालों की भीड़ से बढ़ी परेशानी
रक्षाबंधन के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और कामकाज की जगहों पर लौट रहे थे। इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या भी काफी थी। हाईवे पर आवागमन बंद होने के कारण कई महिलाएं बच्चों के साथ घंटों सड़क किनारे बैठकर पुल खुलने का इंतजार करती रहीं। लोगों का कहना था कि पानी कम होने के बाद ही वह अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सकेंगे।