{"_id":"625080b2f1f82b129730e5b6","slug":"ramayana-fair-from-tomorrow-scholars-and-artists-will-gather-chitrakoot-news-knp69013596","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामायण मेला कल से, जुटेंगे विद्वान व कलाकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामायण मेला कल से, जुटेंगे विद्वान व कलाकार
विज्ञापन
रामायण मेला के आयोजन की रूपरेखा बताते अध्यक्ष राजेश करवरिया व महामंत्री करूणा शंकर द्विवेदी। सं
- फोटो : CHITRAKOOT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोस्थली में 49 वां रामायण मेला का आयोजन 10 अप्रैल से होगा। पांच दिवसीय मेले में देश के कई प्रांतों के विद्वानों के अलावा यूपी एमपी सरकार के कई मंत्री भी शामिल होंगे। इस बार का रामायण मेला कई विपरीत परिस्थितियों में होने की संभावना है।
शुक्रवार को मेला परिसर में राष्ट्रीय रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया व महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि समतामूलक समाज की संरचना व भारतीय संस्कृति के संवर्द्धन के लिए वर्ष 1960 में रामायण मेले के आयोजन की परिकल्पना समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया ने चित्रकूट में की थी। वर्ष 1973 से रामायण मेले का शुभारंभ हुआ।
तभी से प्रतिवर्ष नए कलेवर के साथ आयोजित हो रहा है। कहा कि इस समय प्रचंड गर्मी है। जिसका प्रभाव पड़ेगा। दूसरी समस्या यह भी है कि अथक प्रयास के बावजूद प्रतिवर्ष आयोजन के लिए जो अनुदान मिलता रहा है वह भी नहीं मिला। बताया कि समिति के समक्ष भारी आर्थिक संकट है। पदाधिकारियों ने कहा कि हर स्तर से मेले को भव्य बनाने का प्रयास होगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि रामायण मेले में प्रतिभाग करने के लिए ख्यातिलब्ध कथा व्यास, उच्च स्तरीय सांस्कृतिक दल, कलाकार आमंत्रित किए गए हैं। प्रात: व सायं वृंदावन की मंडली रामलीला और कृष्णलीला का मंचन करेगी। बताया कि मेले में रमेश पाल बांदा का दीवारी नृत्य, मानसी सिंह लखनऊ के लोकगीत व भजन, रामाधीन आर्य झांसी, सूर्य उदय परिवार प्रयागराज की ध्वनि एवं प्रकाश के माध्यम से रामलीला कार्यक्रम व विशेष नारायण, लल्लूराम शुक्ल के भजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
विज्ञापन
शुक्रवार को मेला परिसर में राष्ट्रीय रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया व महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि समतामूलक समाज की संरचना व भारतीय संस्कृति के संवर्द्धन के लिए वर्ष 1960 में रामायण मेले के आयोजन की परिकल्पना समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया ने चित्रकूट में की थी। वर्ष 1973 से रामायण मेले का शुभारंभ हुआ।
विज्ञापन
तभी से प्रतिवर्ष नए कलेवर के साथ आयोजित हो रहा है। कहा कि इस समय प्रचंड गर्मी है। जिसका प्रभाव पड़ेगा। दूसरी समस्या यह भी है कि अथक प्रयास के बावजूद प्रतिवर्ष आयोजन के लिए जो अनुदान मिलता रहा है वह भी नहीं मिला। बताया कि समिति के समक्ष भारी आर्थिक संकट है। पदाधिकारियों ने कहा कि हर स्तर से मेले को भव्य बनाने का प्रयास होगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि रामायण मेले में प्रतिभाग करने के लिए ख्यातिलब्ध कथा व्यास, उच्च स्तरीय सांस्कृतिक दल, कलाकार आमंत्रित किए गए हैं। प्रात: व सायं वृंदावन की मंडली रामलीला और कृष्णलीला का मंचन करेगी। बताया कि मेले में रमेश पाल बांदा का दीवारी नृत्य, मानसी सिंह लखनऊ के लोकगीत व भजन, रामाधीन आर्य झांसी, सूर्य उदय परिवार प्रयागराज की ध्वनि एवं प्रकाश के माध्यम से रामलीला कार्यक्रम व विशेष नारायण, लल्लूराम शुक्ल के भजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।