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काश, दोनों मान जाते बांदा में रात रुक जाने की बात
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घटना के बाद गमगीन बैठे परिजन। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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राजापुर। चकौंध गांव के पास सड़क दुर्घटना मेें मृत अमित व विशाल चचेरे भाई थे। दोनों के बीच जीगरी दोस्त जैसा व्यवहार था। इन्होंने करीब चार साल पहले कनकोटा गांव से राजापुर आकर दुकान खोली थी। दोनों मिलकर कार्य करते थे और एक ही दुकान में रहते थे। परिजनों ने बताया कि काश, दोनों बांदा में बुधवार रात रुक जाने की बात मान लेते, कहा था लेकिन नहीं माने।
अमित की लूकलाइन में बाइक सर्विसिंग सेंटर की दुकान थी। इसके अलावा स्टील फ्रेमिंग और भवन सामग्री का भी काम था। इसी दुकान पर विशाल भी कार्य करता था। दोनों के अच्छे व्यवहार से दुकान खूब चलती थी। अमित के एक पुत्र है। पत्नी प्रीती हादसा सुनकर बेहाल हो गई। अमित इकलौता पुत्र था। माता-पिता पुणे में रोजगार करते हैं। घटना की जानकारी होने पर पुणे से परिजन राजापुर के लिए रवाना हो चुके हैं।
विशाल दो भाइयों में छोटा था। बेटे की मौत सुनने के बाद से मां संजू पांडेय के आंसू नहीं थम रहे। परिजनों ने बताया कि रात में करीब साढ़े आठ बजे बांदा आने पर विशाल ने फोन किया था। कहा गया था कि रात में बांदा में ही रुक जाओ। दोनों ने एक होटल में खाना खाया फिर कहा कि जब यहां तक आ गए हैं तो रात में ही राजापुर भी आ जाएंगे। इतना कहकर दोनों वहां से रवाना हुए थे। अब लगता है कि काश, बात मानकर बांदा में ही रुक जाते तो ऐसा हादसा न होता।
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अमित की लूकलाइन में बाइक सर्विसिंग सेंटर की दुकान थी। इसके अलावा स्टील फ्रेमिंग और भवन सामग्री का भी काम था। इसी दुकान पर विशाल भी कार्य करता था। दोनों के अच्छे व्यवहार से दुकान खूब चलती थी। अमित के एक पुत्र है। पत्नी प्रीती हादसा सुनकर बेहाल हो गई। अमित इकलौता पुत्र था। माता-पिता पुणे में रोजगार करते हैं। घटना की जानकारी होने पर पुणे से परिजन राजापुर के लिए रवाना हो चुके हैं।
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विशाल दो भाइयों में छोटा था। बेटे की मौत सुनने के बाद से मां संजू पांडेय के आंसू नहीं थम रहे। परिजनों ने बताया कि रात में करीब साढ़े आठ बजे बांदा आने पर विशाल ने फोन किया था। कहा गया था कि रात में बांदा में ही रुक जाओ। दोनों ने एक होटल में खाना खाया फिर कहा कि जब यहां तक आ गए हैं तो रात में ही राजापुर भी आ जाएंगे। इतना कहकर दोनों वहां से रवाना हुए थे। अब लगता है कि काश, बात मानकर बांदा में ही रुक जाते तो ऐसा हादसा न होता।
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