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बहिलपुरवा स्टेशन के पास पहुंची आग, ट्रेनें बंद

Tue, 06 Apr 2021 08:07 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Apr 2021 08:07 PM IST
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फोटो-1- बरगढ़ के परानू बाबा जंगल में लगी आग को बुझाने का प्रयास करते वनकर्मी व ग्रामीण। संवाद - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। बहिलपुरवा के जंगल में लगी आग मंगलवार को बहिलपुरवा रेलवे स्टेशन के पास तक पहुंच गई। आग इतनी भीषण है कि रेलवे को ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। जिसके चलते चंबल एक्सप्रेस सहित झांसी प्रयागराज पैंसेजर प्रभावित हो गई। डेढ़ घंटे तक ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। इससे यात्रियों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।
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आग को बुझाने में आरपीएफ टीम सहित वन विभाग की टीम लगी हुई है। संभावना जताई जा रही है आग से पटरी किनारे लगे उपकरण भी जल गए। इसके अलावा देवांगना पहाड़ के पास और रानीपुर के जंगल में भी आग धधकती रही। जिले की सीमा से सटे बरौंधा जंगल की आग को बुझाने में मध्यप्रदेश के 50 से अधिक कर्मचारी डटे है। बहिलपुरवा रेलवे स्टेशन के दोनो ओर 200 मीटर के दायरे में मंगलवार की दोपहर 1:45 बजे आग लग गई। जो रेलवे लाइन तक पहुंच गई। इस घटना से चंबल एक्सप्रेस चित्रकूट रेलवे स्टेशन पर 2:20 बजे आई और 3:25 बजे तक खड़ी रही। इसी तरह से झांसी प्रयागराज पैंसेजर गाड़ी संख्या (04111)शिवरामपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही।
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आग बुझाने के लिए चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन के आरपीएफ थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर पुलिस के जवानों के साथ मिलकर रेलवे पटरी के आसपास लगी आग को बुझाया। इसके बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हो सका। रेलवे स्टेशन बहिलपुरवा के स्टेशन के अधीक्षक रामशरण ने बताया कि लगभग डेढ़ घंटे ट्रेनों का संचालन बंद रहा।
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अधिकतर स्थानों पर आग को बुझा दिया गया
मऊ/बरगढ। बरगढ़ क्षेत्र के परानू बाबा के जंगलों में लगी आग के दूसरे दिन मंगलवार को भी कई स्थानों पर आग धधक रही है। वही मानिकपुर क्षेत्र के बरौधा के जंगलों में भी आग लगी है। इसको बुझाने के लिए अलग अलग टीमें लगाई गई है। परानू बाबा के जंगल में लगी आग के नुकसान का वन विभाग सर्वे कर रही है। वन विभाग के डीएफओ कैलास प्रकाश ने बताया कि अधिकतर स्थानों पर आग को बुझा दिया गया। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

आग लगाने वाले पांच लोगों पर कार्रवाई
चित्रकूट। जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण महुआ फूल बीनने के उद्देश्य से महुआ के पेड़ के नीचे पत्तियों को साफ करने के लिए ग्रामीण रात्रि में आग लगा देते हैं। इसके बाद बिना बुझाए चले जाते हैं। यही आाग जंगल में फैल जाती है। महुआ फूल के एकत्रीकरण एवं बिक्री से लगभग पांच करोड़ की आय ग्रामीणों, आदिवासियों को होती है। वन क्षेत्र में लगभग एक लाख से अधिक महुआ के पेड़ है। लगभग एक हजार का महुआ प्रति पेड़ मिलता है। 28. 29 व 30 मार्च को चित्रकूट वन प्रभाग के अन्तर्गत बरगढ़ रेंज में खण्डेहा, कलचिहा, कटैयाडांडी, कोटा कण्डैला, औझर वन ब्लाकों, कर्वी रेंज के अन्तर्गत देवांगना हवाई पट्टी, सिद्धपुर, कोलगदहिया, कोल्हुआ, मड़फा वन ब्लाक, मारकुण्डी रेंज के अन्तर्गत मडैयन वन ब्लाक में आग लगी हुई थी। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि आग लगाने वालों पर विभागीय एफआईआर दर्ज व अलग से जांच कर कार्रवाई की जा रही है। उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके दीक्षित ने बताया कि महुआ के पत्तों में आग लगाने वाले छोटकू, मुन्ना, बच्चीलाल निवासी रम्पुरिया, सलीम व उसके भाई निवासी मुस्लिम पुरवा को गिरफ्तार कर नौ हजार रुपये प्रति से वसूल की गई है।
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